हमारे परम आराध्यतम नित्यलीला प्रविष्ट ॐ विष्णुपाद अष्टोतरशत्त श्री श्रीमद् ए. सी. भक्तिवेदांत स्वामी श्रील प्रभुपाद की असीम कृपा से 'हरिनाम जप सुधारने की कला' नामक इस पुस्तिका को श्रद्धालु पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करते हुए मैं अपार प्रसन्नता का अनुभव कर रहा हूँ।
मैं जब भी भक्तों से मिलता हूँ एक ही प्रश्न बारम्बार मेरे समक्ष आता है-हम अपना नामजप कैसे सुधारें? भक्तों के इस अति महत्त्वपूर्ण प्रश्न से प्रेरित होकर मैं श्रील प्रभुपाद की शिक्षाओं पर आधारित इस पुस्तिका को भेंट कर रहा हूँ, जिसमें हमारे जप को सुधारने के लिए कुछ महत्त्वपूर्ण बातें एवं अनुभव साझा किये गए हैं। आशा करता हूँ यह लघु मार्गदर्शिका आप सभी के जप में सुधार लाएगी और आप श्रीहरिनाम प्रभु की उत्तम सेवा कर पाएंगे।
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