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बालू रेत की बेटी- Balu Ret Ki Beti (A Living Document of Contemporary Problems, An Important Novel)

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Specifications
Publisher: Ayan Prakashan, Delhi
Author Jamna Singh
Language: Hindi
Pages: 144
Cover: HARDCOVER
9x6 inch
Weight 290 gm
Edition: 2006
ISBN: 8174082573
HBD972
Statutory Information
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Book Description

दो शब्द

साहित्य समाज का दर्पण होता है। लेखक अपने आस-पास घटित घटनाओं को देखता है और उनका चित्रण वह अपनी लेखनी से करता है यह चित्रण गद्य रूप में हो या पद्य रूप में। कुछ घटनाएं लेखक के स्वयं के जीवन से भी जुड़ी होती है। उन्हीं का चित्रण कविता, कहानी, नाटक तथा उपन्यास के रूप में होता है। कुछ कल्पनाएं भी होती है।

मेरा यह उपन्यास बालू रेत की बेटी भी मेरे आस-पास घटित कुछ घटनाओं का तथा कुछ कल्पनाओं का चित्रण है। यह उपन्यास ऐसे क्षेत्र की दुर्दशा का चित्रण है जहां लोग इन्द्र देव पर निर्भर करते हैं। बारिश होती है तो अनाज हो जाता है, नहीं तो अकाल। रेगिस्तान में बसर करने वाले लोगों के रहन-सहन तथा जीविकोपार्जन का चित्रण करने का प्रयत्न किया गया है। इस उपन्यास को पढ़कर शायद कोई सरकार ऐसे क्षेत्र की बदतर स्थिति को सुधारने का प्रयत्न करे।

यह एक अनूठी प्रेम-गाथा है। एक अनपढ़ सुन्दर युवती से एक पढ़े-लिखे युवक का वासनात्मक प्रेम हो जाता है। दोनों पक्ष विछोह भी झेलते हैं. जुल्म सहते हैं। अंत में सुखान्त यानी मिलन होता है। इसमें युवती कमला को तरह-तरह के कष्ट तथा जुल्म सहने पड़ते हैं। किन्तु वह एक वीरांगना की तरह समाज के ठेकेदारों का मुकाबला करती हुई सफल होती है।

उपन्यास में डॉक्टरों के काम-काज का भी चित्रण किया गया है, जो एक प्रकार से वास्तविकता है। कार्यालयों, कोर्ट-कचहरियों में आम जनता को भ्रष्ट लोगों के अत्याचारों का शिकार होना पड़ता है, यह भी दिखाया गया है। किस प्रकार वकील, कर्मचारी, अधिकारी मिलकर क्या-क्या खेल खेलते हैं. इसका संक्षिप्त, पर सटीक चित्रण करने का प्रयास किया गया है।

समाज में बेमेल शादियां किस प्रकार युवा तथा युवतियों के जीवन को नरक बनाती हैं, यह दर्शाने का प्रयास किया गया है।

कमला की शादी बाल्यावस्था में एक नपुंसक के साथ कर दी जाती है जिससे कमला का जीवन नरक बन गया है। युवती का रूप-सौंदर्य देखकर हर कोई उसका उपभोग करना चाहता है। कमला का जेठ उसके रूप पर मोहित होकर उससे बलात्कार का असफल प्रयास करता है। इसकी परिणति उसकी मृत्यु से होती है। कामवासना व्यक्ति की नैसर्गिक आवश्यकता है जिसे पूरा करना भी आवश्यक होता है। वासना युवावस्था में ज्यादा जागृत होती है। इसलिए विवाह के लिए एक विशेष आयु निर्धारित है। इसी आयु में विवाह हो तो अच्छा होता है। विवाह के तीन उद्देश्य होते हैं प्रथम, कामवासना की तृप्ति. द्वितीय, संतानोत्पत्ति तथा तृतीय, गृहस्थी बसाना।

वैदिक साहित्य में बाल-विवाह का निषेध है। महाभारत काल में भी बाल-विवाह की इजाजत नहीं थी। किन्तु इस काल (महाभारत) में सोलह वर्ष की नग्निका के विवाह का वर्णन है। गृह्य सूत्र विवाह के चौथे दिन संभोग की आज्ञा देता है। धर्मसूत्रकारों तथा स्मृतियों ने मासिक धर्म से पहले विवाह की अनुमति दी है। ब्रह्म पुराण के अनुसार चार वर्ष की आयु के पश्चात् लड़की का विवाह कभी भी किया जा सकता है। मनु कौटिल्य, वशिष्ट आदि ने रजोदर्शन के बाद तीन वर्ष के अंदर लड़की का विवाह करने पर बल दिया है। मुसलमानी शासन के दौरान अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए मां-बाप लड़की का विवाह आठ से नौ वर्ष की आयु में ही करने लगे। (भारतीय सामाजिक संस्थाएं, रविन्द्र नाथ मुखर्जी, पृष्ठ 347)

आज के जमाने में सरकार ने विवाह के लिए लड़की की आयु अठारह और लड़के की आयु इक्कीस वर्ष निर्धारित की है। प्राकृतिक दृष्टि से लड़की की शादी, जब उसे मासिक धर्म आना शुरू हो, उस समय करना उचित होता है। किन्तु आजकल लड़कियां भी पढ़ती-लिखती हैं और अपनी ज़िन्दगी संवारती हैं, इसलिए विवाह के लिए इस प्रकार की आयु सीमा निर्धारित कर पाना व्यावहारिक नहीं रह गया है।

कमला तथा जयन्त दोनों युवा हैं। इसलिए उन्होंने अपनी कामवासना की तृप्ति की जिससे कमला गर्भवती हो गई। उसका विवाह एक नपुंसक से कर दिया गया जो उसकी कामवासना तृप्त नहीं कर पाया। कमला की कामवासना सोई हुई थी किन्तु जयन्त के सम्पर्क में आने से वह सुप्त वासना ऐसी जागृत हुई कि वह लगातार पांच दिन सम्भोग करवाती रही। उसे यह भी अहसास नहीं हुआ कि वह समाज की दृष्टि से अनैतिक कार्य कर रही है। यदि उसका पति ठीक होता तो वह ससुराल चली जाती और ऐसा नहीं होता।

प्यार तो प्यार होता है। जयन्त ने कमला से सच्चा प्यार किया। उसने अपनी कमला के लिए सब कुछ कुर्बान कर दिया और किसी दूसरी औरत को अपनी जिन्दगी में नहीं लाया। वह दृढ़ निश्चयी था। उसे विश्वास था कि उसकी कमला उसे अवश्य मिलेगी। आखिर उसका विश्वास रंग लाया और वे दोनों प्रेमी मिल गए। प्यार ऊंच-नीच, जात-पांत कुछ नहीं देखता। प्यार तो प्यार है। इसमें अढाई अक्षर होते हैं। किन्तु इन अढाई अक्षरों का अर्थ गूढ़ है। इसे सच्चा प्रेमी ही समझ सकता है। प्यार के आगे जयन्त के मां-बाप को भी झुकना पड़ा।

यह कमला की दिल दहला देने वाली गाथा है। वह बचपन से ही काम में फंसी रहती है। पीहर में लोगों के खेतों में काम करती है। ससुराल आ जाती है। हालांकि उसका पति मर्द नहीं है। फिर भी अपने प्यार से उसे इंसान बनाती है। दोनों प्यार से रहते हैं। उसकी कामवासना जागती है पर वह उसे मारती है। घर और खेत में बहुत काम करती है। धीरे-धीरे उसके परिवार के सदस्यों की मृत्यु हो जाती है। जेठ उससे जबरदस्ती करता है। उसका पति जग्गी उसका कत्ल कर देता है। वह पकड़ा जाता है। उसके मुकदमें में जो पैसा खर्च होता है उसे जुटाने के लिए वह कड़ा संघर्ष करती है।

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