पुस्तक परिचय
चम्पारण में बापू अबतक प्रकाशित ग्रन्थों में एक विशिष्ट स्थान रखता है, क्योंकि इसकी रचना न केवल गहन शोध-प्रक्रिया के माध्यम से हुई है, बल्कि अनुभवी विद्वान लेखक ने बापू के कदमों पर चलकर चम्पारण के उन तमाम जगहों का भ्रमण किया है और उन परिवारों के सदस्यों का साक्षात्कार भी लिया है जिनके पूर्वजों ने बापू के दर्शन किये थे। पुस्तक पन्द्रह आकर्षक अध्यायों में विभाजित है। इसके अलावे पुस्तक में रोचक शीर्षकों को दरसाया गया है जिनसे विषयों का आकर्षक ढंग से स्पष्टीकरण हो सका है। इसकी ग्रन्थसूची और अनुक्रमणिका पुस्तक की शोधधर्मिता को जाहिर करती है। इसमें अनेक नयी समस्याओं और गूढ़ तथ्यों का नये ढंग से मूल्यांकन किया गया है जिनके परिणामस्वरूप भविष्य में शोधकार्य करने के लिए मार्ग प्रशस्त किया गया है। यह पुस्तक आज के सामाजिक माहौल में राजनीतिक कार्यकत्ताओं, इतिहास-प्रेमियों और गाँधीजी के भक्तों के लिए सर्वाधिक सहज-सरल रूप से पठनीय है।
लेखक परिचय
श्री ब्रज किशोर सिंह बी०एस-सी० (कृषि), बी०एल० भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आई), विधान सभा क्षेत्र जन्म : 18 जनवरी, 1937 ई० ग्राम : चैता, जिला-पूर्वी चम्पारण पिता : स्व० श्री नारायण सिंह तीन पुत्र, दो पुत्रियाँ; पटना कालेजियट स्कूल, पटना साइन्स कॉलेज, बिहार कृषि महाविद्यालय, सबौर तथा पटना लॉ कालेज में शिक्षा; श्री नारायण सिंह कालेज मोतिहारी के संस्थापकः एम०एस० कॉलेज मोतिहारी के शासी निकाय के सदस्य; जयमंगल उच्च विद्यालय के पूर्व मंत्री; मधुबन तथा पकड़ीदयाल प्रखण्डों में बालक बालिकाओं के लिए विद्यालयों के संस्थापक; भारत सेवक समाज (पूर्वी चम्पारण) के अध्यक्ष के रूप में नेत्रदान शिविर का आयोजन; 1957 में अखिल भारतीय आलू उत्पादक प्रतियोगिता में सर्वप्रथम राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्तः 1955 में चम्पारण जिला युवा कांग्रेस के अध्यक्ष; 1957 में मंडल कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष एवं चम्पारण जिला कमिटी के सदस्य; 1962 में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के सदस्य; 1978 में पूर्वी चम्पारण जिला कांग्रेस कमिटी के महामंत्री; 1979 से 1985 तक बिहार प्रदेश कांग्रेस (आई०) कमिटी की कार्यकारिणी के विशेष आमंत्रित सदस्य; 1980 में मधुवन क्षेत्र से बिहार विधान सभा के सदस्य निर्वाचित; 1983 से 1985 तक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री; 1983 में बिहार कौमी एकता कमिटी के उपाध्यक्ष; 1985 में बिहार प्रदेश कांग्रेस-शाताब्दी समारोह समिति के सदस्यः 1987 से बिहार कांग्रेस कमिटी में आर्थिक सलाहकार प्रकोष्ठ के संयोजक; 1987 में भारत-रूस मैत्री राज्य समिति के सदस्य; 1986 में विधान सभा क्षेत्र से बिहार विधान परिषद् के सदस्य तथा अगस्त 1987 से बिहार विधान परिषद् की आश्वासन समिति के अध्यक्ष ।
प्राक्कथन
मैं बचपन से ही महात्मा गाँधी के विषय में अपने दादा स्व० जयमंगल सिंह से सुना करता था, क्योंकि महात्मा गाँधी के चम्पारण-आगमन पर निलहों के विरोध की लड़ाई में वे सक्रिय रूप से भाग लिये थे। मेरे परिवार के अनेक सदस्य सत्याग्रह आंदोलन में भाग लेने के फलस्वरूप बहुत बार जेल जा चुके थे। मैं समयसमय पर उन लोगों से विभिन्न घटनाओं के बारे में सुना करता था। इस तरह मुझ में बचपन से हो महात्मा गाँधी के प्रति विशेष श्रद्धाभक्ति बढ़ने लगी। इसके अलावे चम्पारण के पुराने स्वतंत्रता सेनानियों से मिलने पर उनकी बातों को सुनकर महात्मा गाँधी के बारे में रोचक जानकारी मिली। अनेक पुस्तके, पत्र-पत्रिकाओं के पढ़ने पर गाँधीजी के कार्यकलापों के सम्बन्ध में अपनी बात लिखने की उत्कण्ठा हुई जिसका फल यह पुस्तक है। इस पुस्तक में महात्मा गाँधी के चम्पारण-आगमन से पहले की स्थितियों से लेकर अंग्रेज निलहों के अत्याचारों, संघर्षरत चम्पारण की जनता की दयनीय दशा का मामिक वर्णन किया गया है। इसमें 19वीं शताब्दी के अंतिम दशकों से लेकर 20 वीं शताब्दी के पूर्व के चम्पारण के इतिहास पर एक झलक को प्रस्तुत किया है। इस सिलसिले में मैंने चम्पारण के गाँवों में घूम-घूम कर ऐसे व्यक्तियों का साक्षात्कार किया है जिन्होंने गाँधीजी को अपनी आँखों से देखा था या गाँधीजी के सम्पर्क में आने का सौभाग्य प्राप्त किया था। इसके अतिरिक्त कुछ ऐसी स्थितियों का भी वर्णन किया है जिनके चलते नील की खेती और अंग्रेज निलहे जमींदारों के प्रति जनता में आक्रोश की लहर उठ रही थी।
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