इस पुस्तक में गुजरात के ऐतिहासिक एवं पौराणिक सभी स्थलों का स्थापत्य, कला के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्त्व एवं धार्मिक महत्त्व पर भी प्रकाश डाला गया है। गुजरात का इतिहास पाषाण युग के बस्तियों के साथ शुरू हुआ। इसके बाद चोलकोधिक और कांस्य युग के चस्तियों जैसे सिंधु घाटी की सभ्यता का विकास हुआ। यहाँ बौद्ध और जैन धर्म के अनेक स्थलों का भी उल्लेख किया गया है। इसे प्रत्येक प्रखंड के अनुसार रखने का प्रयास भी किया गया है, जो अत्यंत ही प्रशंसनीय एवं सराहनीय है। भारतीय संस्कृति की अप्रतिक अध्येतू डॉ० किरण कुमारी ने अब तक संस्कृत एवं हिन्दी वाङ् मय में अपनी स्पृहनीय स्थान बनाने के साथ-साथ साहित्य (कविता) में भी इनका महत्वपूर्ण योगदान है। मौलिक चिन्तन की धनी विदुशी लेखिका की कई कृतियों ने असंदिग्ध उपयोगिता, सूजन संप्रेशनियता एवं पठनीयता के फलस्वरूप लोकप्रियता के उन उतंग शिखरों का स्पर्श किया है जो औरों के लिए असभंव ही है। इनकी पुस्तक "वैदिक साहित्य और संस्कति" (दो भागो में), भारतीय संस्कृति कोष इण्डिका (तीन भागों में), भारत की विरासत (इस भागों में) प्रकाशित हैं। भारत की विरासत वह अमूल्य निधि है जिसमें उन्होंने सम्पूर्ण भारत की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक तीनों पहलुओं पर प्रकाश डालने का एक सराहनीय प्रयास किया है। उपनिषद् एवं पुराण के साथ-साथ इन्होंने सीता, राधा, मीरा की जीवनी "त्रयोदशी" पद्म में एवं वाल्मीकि, तुलसी एवं साई बाबा की जीवनी (पद्म में) "त्रिशूल" और कविता "युग-धर्म" भी लिखा है। साथ ही साथ कृष्णावतार एवं रामावतार की सम्पूर्ण क्रमबद्ध गाधाएं "राधा गोविन्द गाथा" एवं श्री श्री राम जानकी गाथा" इनकी एक महत्वपूर्ण कृतियाँ हैं। गाँधी साहित्य पर भी इनकी चार पुस्तकें अपनी अमिट छाप बनाये हुए हैं। इसके अलावा भी कई अन्य पुस्तकें धर्म, दर्शन एवं संस्कृति पर उपलब्ध हैं। सौ से भी अधिक आलेख इनकी राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिओं में प्रकाशित है। इन्होंने मानव संसाधन विकास मंत्रालय, शिक्षा विभाग, नयी दिल्ली द्वारा आयोजित प्रोजेक्ट "दर्शन शास्त्र परिभाषा कोष" में भी विशेषज्ञ के रूप में कार्य किया है।
डॉ० किरण कुमारी तीन विषयों में एम०ए० एम०ए० संस्कृत, एम०ए० दर्शन शास्त्र, एम० एड० पी०एच०डी० किया है। अब तक इनकी तीस से भी अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें सात पुस्तकों का लोकार्पण महामहिम राज्यपाल, बिहार, श्री लालजी टंडन एवं आरिफ मोहम्मद खां ने राजभवन में किया है जिसमें पद्म श्री डॉ० के. के. मुहम्मद भी शामिल थे। गंगा देवी महिला महाविद्यालय, कंकडबाग, पटना में संस्कृत विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागध्यक्षा होते हुए डॉ० किरण कुमारी ने कई सम्मेलनों और संगोष्ठियों में प्रशंसनीय सहभागिता द्वारा अपनी अमीट पहचान गढ़ी है। लेखिका की जिह्वा पर ऐसे वाग्देवी विराजती हैं जिसके फलस्वरूप उनके लेखन के साथ-साथ उनकी वाचा-शक्ति भी प्रशंसनीय हुई है। सम्प्रति डॉ० किरण कुमारी, गंगा देवी महिला महाविद्यालय, कंकड़बाग, पटना में संस्कृत विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर से अभी-अभी अवकाश प्राप्त कर चुकी हैं और लेखन कार्य में निरंतर संलग्न हैं।
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