प्रस्तुत पुस्तक ब्रह्म चिन्तन का मुख्य सार संसार में लीन होकर ब्रह्म में तल्लीन कैसे हों। जब हमने भगवान् की सेवा में आत्मसमर्पण कर दिया, तब फिर हमारा समय, हमारा धन, हमारी शक्ति, मन, बुद्धि सब कुछ भगवान् का हो गया। फिर हम इनका सदुपयोग केवल भगवत्कैंकर्य में कर सकते हैं । समय का एक क्षण भी, शक्ति का एक कण भी, द्रव्य का एक पैसा भी हम व्यर्थ और निरर्थक कार्यों में नष्ट नहीं कर सकते। जिन कार्यों से न अपना उपकार होता हो, न पराये का, अपितु परिवार या समाज का अनिष्ट ही होता हो तो ऐसे कार्यों में समय, शक्ति, समझ और धन को लगाना बड़ी भूल है। व्यर्थ गपशप में, निरर्थक वाद-विवाद में, समझ, समय, शक्ति और संपदा का दुरुपयोग अक्षम्य अपराध है। कबहुँक करि कहना नर देही। देत ईस बिनु हेतु सनेही.
डॉ० (श्रीमती) किरण त्रिपाठी 'वेदान्ती' जन्म संवत 2019 भावपद अष्टमी कृष्ण पक्ष । में। शिक्षा-स्कूली शिक्षा बरवाडीह, पलामू एम. ए. राँची विश्वविद्यालय, राँची । शिक्षा-एम.ए. Ph.D., D.P.P.H. रुचि - ज्योतिष, हस्तरेखा रे की वास्तु। अद्वैत वेदान्त पर शोध कार्य पूर्व प्रकाशित ग्रंथ ब्रह्मज्ञान अनेक रचनाओं का आकाशवाणी, दूरदर्शन एवं विभन्नि पत्र-पत्रिकाओं में प्रसारण एवं प्रकाशन । रुचियाँ अध्यात्म, ज्ञानदर्शन का अनुसंधान, तंत्र साधना, ज्योतिष एवं वस्तु विषमका । संप्रति पराविद्या अनुसंधान केन्द्र की चेयर पर्सन
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