निर्विवादतः अनेक कारणों से आज विश्व सर्वनाश के कगार पर खड़ा है। भयंकर विश्व-समर की समस्याएँ एवं विभीषिकाएँ प्रतिपल प्राणों को भयविकंपित कर रही हैं। इस दुःस्थिति का सर्वोपरि कारण है-विश्व के धारक एवं पालक धर्म के प्रति हमारा विकट उपेक्षा-भाव तथा पारम्परिक भारतीय संस्त्रति एवं सदाचार में हमारी उत्तरोत्तर उन्नीततर हो रही अनास्था। प्रत्येक प्राणी सुखाकांक्षी है और सुख भी ऐसा जो सतत् मिले, सर्वदा मिले, जिसके लिए श्रमशील न होना पड़े। जो पराधीन न हो एवं जिसका अविरत मान होता रहे। इतनी उच्चकोटिक महत्वकांक्षा होने पर भी यह एक विचित्र बात देखने में आती है कि उसकी सम्प्राप्ति के साधन के सम्बन्ध में सब एकमत नहीं हैं।
डॉ० (श्रीमती) किरण त्रिपाठी 'वेदान्ती' जन्म संवत 2019 भावपद अष्टमी कृष्ण पक्ष । में। शिक्षा-स्कूली शिक्षा बरवाडीह, पलामू एम. ए. राँची विश्वविद्यालय, राँची । शिक्षा-एम.ए. Ph.D., D.P.P.H. रुचि - ज्योतिष, हस्तरेखा रे की वास्तु। अद्वैत वेदान्त पर शोध कार्य पूर्व प्रकाशित ग्रंथ ब्रह्मज्ञान अनेक रचनाओं का आकाशवाणी, दूरदर्शन एवं विभन्नि पत्र-पत्रिकाओं में प्रसारण एवं प्रकाशन । रुचियाँ अध्यात्म, ज्ञानदर्शन का अनुसंधान, तंत्र साधना, ज्योतिष एवं वस्तु विषमका । संप्रति पराविद्या अनुसंधान केन्द्र की चेयर पर्सन
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