The Call of Mahadev' सर्वप्रथम २०२१ में अंग्रेज़ी में प्रकाशित हुई और उसे पाठकों का अपार प्रेम प्राप्त हुआ।
विभिन्न स्रोतों से मिली उत्साहवर्द्धक प्रतिक्रियाओं के आधार पर मैंने पुस्तक को हिन्दी में भी लाने का निर्णय किया और नीलाभ श्रीवास्तव को यह कार्य सौंपा। नीलाभ ने इस कार्य को पूरी निष्ठा व लगन के साथ किया है, और अपने अनुवाद में उन्होंने न केवल शब्दों का अपितु भावों का भी उचित समावेश किया है।
महादेव की अनुकम्पा से मुझे पाठकों के हाथों में यह हिन्दी संस्करण सौंपते हुए हर्ष हो रहा है। मुझे आशा है कि हिन्दी में यह पुस्तक और भी अधिक लोगों तक पहुँचेगी और उनके हृदयों में भोलेनाथ के प्रेम की लौ जलाएगी।
इस पुस्तक का हिस्सा बनना मेरे लिए एक गहन आध्यात्मिक अनुभव रहा है, और मुझे आशा है कि पाठकों के लिए भी यह ऐसा ही अनुभव होगा। इस पुस्तक में रघु द्वारा की गई यात्रा, उसके मार्ग में आने वाली बाधाएँ, उसे मिलने वाला सहयोग तथा अनुग्रह, प्रतीक हैं एक वास्तविक आध्यात्मिक यात्रा का जो कि ऐसे ही सोपानों से होकर गुज़रती है। रघु हम सभी के भीतर सुषुप्त अवस्था में उपस्थित है। मैं कामना करता हूँ कि हम अपनी दृढ़ साधना, महादेव की कृपा और गुरुजनों के आशीर्वाद से अपने भीतर के रघु को जाग्रत करें और स्वयं के आन्तरिक परिवर्तन की यात्रा पर अग्रसर हों!
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