डा० शिवन कृष्ण रेणा
जन्म 22 अप्रैल, 1942। एम०ए० हिन्दी और अग्रेजी में। मातृभाषा कश्मीरी। चौदह पुस्तकें प्रकाशित। कश्मीरी भाषा और साहित्य के बहुप्रशंसित हिन्दी अनुवादक। कश्मीरी रामायण 'रामावतारचरित' का सानुवाद लिप्यंतरण हिन्दी क्षेत्रों में बहुचर्चित। साहित्य-सेवाओं एवं देश की दो जातियों के बीच वास्तविक सेतु-निर्माता के रूप में बिहार राजभाषा विभाग, पटनाः उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ, केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय, भारत सरकार: राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर, भारतीय अनुवाद परिषद्, दिल्ली: आदि द्वारा पुरस्कारों/ ताम्रपपत्रों आदि से सम्मानित । राजस्थान उच्च शिक्षा सेवा में 32 वर्षों तक हिन्दी व्याख्याता, विभागाध्यक्ष, उप्राचार्य/प्राचार्य आदि पदों पर कार्यरत । राजस्थान सरकार से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर 1999 से 2001 तक भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, राष्ट्रपति निवास, शिमला में फैलो के रूप में 'भारतीय भाषाओं से हिन्दी में अनुवाद की समस्याएं' विषय पर शोधरत। देश की विभन्न प्रसिद्ध/प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित लेखों, निबन्धों, वार्ताओं आदि की संख्या डेढ़ सौ के लगभग । आकाशवाणी के लिए कहानी एवं नाट्य-लेखन भी। 'मौन संभाषण' शीर्षक से एक कहानी संग्रह प्रकाशित। राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की अनेक संगोष्ठियों में सक्रिय भागीदारी ।
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