प्राक्कथन
एम०ए० हिन्दी उत्तरार्द्ध के अष्टम प्रश्नपत्र हेतु 'लघु शोध' के चयनोपरान्त से ही अग्रिम शोध की बलवती इच्छा को माँ सरस्वती की अनुकम्पा से विद्वान गुरु सहज, सरल आदरणीय डॉ० ज्ञानचन्द रावल जी (प्रो० हिन्दी विभाग, गुरुकुल कांगडी विश्वविद्यालय, हरिद्वार) का आशीर्वाद एवं प्रश्रय प्राप्त हुआ। उनके उचित दिशानिर्देशन एवं सत्परामर्श के परिणाम स्वरूप ही मुझे महाकवि निराला के युग समाहित काव्य के अध्ययन की प्रेरणा एवं प्रोत्साहन मिला। निःसंदेह ऐसे गौरवपूर्ण काव्य के प्रति जिज्ञासा स्वाभाविक थी। सम्यक् अनुशीलन के आधार पर यह जाना कि जीवन का सर्वांगीण विकास चाहने वाले निराला जी की काव्य दृष्टि व्यापक एवं प्रशस्त है। निराला युग का कवि नहीं, युग-युग के कवि हैं। उनके समृद्ध साहित्य में भारतीय संस्कृति के नूतन एवं पुरातन सारे रूप, सम्पूर्ण रंग, सभी स्वर और सारे आकार समाये हुए हैं, वहीं तत्कालीन समस्याओं की अभिव्यक्ति के साथ भारतीय संस्कृति की गहन आस्था का उदात्त स्वर भी मुखरित है। आध्यात्मिक प्रबलता, दार्शनिकता, यथार्थ की पकड़, विचारों का पैनापन-विविधता से ओत-प्रोत उनके काव्य में निरालापन दृष्टिगत होता है। शिल्पपक्ष की प्रौढ़ता, भाव और भाषा का सामंजस्य, ध्वन्यात्मकता उनके काव्य का वैशिष्ट्य है। इसके पूर्व अनेक शोधार्थी निराला काव्य के विभिन्न पक्षों का अध्ययन कर चुके थे। परन्तु 'ध्वनि सिद्धान्त' के आलोक में निराला काव्य का अध्ययन शोध की प्रतीक्षा में था। अतः ज्ञान विस्तार की उत्कण्ठा एवं साहित्य में यत् किञ्चित् योग ध्वनि सिद्धान्त के आलोक में निराला काव्य का अध्ययन' प्रस्तुत विषय के अध्ययन की सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए छह अध्यायों में विभक्त किया गया है। प्रथम अध्याय के अन्तर्गत निराला के जीवन वृत्त, उनके निजी जीवन संघर्षो की झलक, उनके कृतित्व के पुनरावलोकन के पश्चात् समकालीन कवि प्रसाद, पंद और महादेवी वर्मा के साथ-साथ निराला जी की रचनादृष्टि एवं प्रस्तुत अध्ययन की उपयोगिता पर प्रकाश डालने का यथासामर्थ्य प्रयास है। द्वितीय अध्याय में ध्वन्यालोककार आनन्दवर्धनाचार्य के 'ध्वनि सिद्धान्त' को समझने का विनम्र प्रयास है। जिसके अन्तर्गत ध्वनि का उद्भव, परिचय, स्वरूप एवं प्रकार का वर्णन है। ध्वनिवादी आचार्य और उनकी ध्वनिविषयक मीमांसा के साथ-साथ हिन्दी साहित्य में ध्वनि, अन्य काव्यशास्त्रीय सिद्धान्त एवं उनकी ध्वनि सम्बन्धी अवधारणा की पुनर्व्याख्या है। अग्रिम अध्यायों की आधारभूमि वस्तु ध्वनि, अलंकार ध्वनि और रस ध्वनि है। अतः यह स्पष्ट करना अपना कर्त्तव्य समझती हूँ कि वस्तु एवं अलंकार ध्वनि को स्पष्ट करने के लिए संलक्ष्यक्रमव्यंग्यध्वनि के अन्तर्गत शब्दशक्त्युद्भव और अर्थशक्त्युद्भव ध्वनि के स्वतः संभवी, कविप्रौढ़ोक्तिसिद्ध, कविनिबद्धवक्तृप्रौढ़ोक्ति सिद्ध को ही अपनी सीमा रेखा स्वीकार की है। तृतीय अध्याय 'निराला काव्य में वस्तु ध्वनि' है। ध्वन्यालोककार आनन्दवर्धनाचार्य ने वस्तु ध्वनि की सत्ता संलक्ष्यक्रमव्यंग्य के अन्तर्गत स्पष्ट की है। जिसमें वाच्यार्थ एवं व्यंग्यार्थ का पौर्वापर्यक्रम स्पष्ट रहता है अर्थात् अभिधा द्वारा वाच्यार्थ की स्पष्ट प्रतीति के बाद व्यंग्यार्थ संलक्षित होता है।
लेखक परिचय
नाम: ऑ० मीरा भारद्वाज नाडुनाम: श्रीमती राजकुमारी शर्मा पितृनाम: श्री रामस्वरूप शर्मा 'शास्त्री' पतिदेव: श्री संजय भारद्वाज जन्न स्थान: सहारनपुर, उ०प्र० जन्मतिथि: 20 मई सन् 1969 ई० शिक्षा: एम०ए० (संस्कृत, हिन्दी, अंग्रेजी), बी०एड० पी०एच०डी० (তিন্দ্বী) सम्प्रति : अध्यापिका, बेसिक शिक्षा विभाग, हरिद्वार, उत्तराखण्ड कृतियाँ: 1. बुलबुला (काव्य संग्रह) प्रकाशित 2011 ई. 2. कोपल (बाल काव्य संग्रह) प्रकाशन 2017 है.. 3. मृगावती में प्रतिविम्बित सामान्य जीवन (लघु शोध), 4. 'ध्वनि सिद्धान्त के आलोक में निराला काव्य का अध्ययन (शोथ प्रबन्ध)। सारस्वत सम्मानः दीपशिखा साहित्यिक सम्मान (दीपशिखा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच, हरिद्वार) 2007 ई. प्रशस्ति पत्र राष्ट्रभाषा स्वाभिमान न्यास 'भारत' गाजियाबाद 2011 ई. माँ लक्ष्मीदेवी दीपशिखा सम्मान (दीपशिखा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच, हरिद्वार) 2011ई. कविता भास्कर सम्मान (हिन्दी साहित्य सभा भटिण्डा, पंजाब) 2012 ई. हिमालय व हिन्दुस्तान अवार्ड (हिमालय और हिन्दुस्तान फाउण्डेशन ऋषिकेश) 2013 ई. विशिष्टि अकादमी सम्मान (पंजाब कला साहित्य अकादमी (रजि.) जालंधर, पंजाब) 2014 ई. उत्कृष्ट शिक्षण सम्मान (लायन्स क्लब 'भागीरथी हरिद्वार) 2014 ई. विशिष्ट सम्मान (हरिद्वार नागरिक मंच (रजि.), हरिद्वार) 2016 ई. 'काव्य प्रतिमा सम्मान' (संस्कार भारती, हरिद्वार) 2016 ई. 'विद्यासागर' सम्मानोपाधि (विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ, भागलपुर, बिहार) 2016 ई. बाल साहित्यकार रचना सम्मान (ज्ञानोदय अकादमी, हरिद्वार), 2017 ई. विशेष शिक्षक सम्मान अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर द्वारा जिला अधिकारी, हरिद्वार 2018ई. 'प्रशस्ति पत्र' आजादी का अमृत महोत्सव द्वारा अधीक्षक राजकीय विशेष गृह, हरिद्वार (2022) प्रबुद्ध जन सम्मान (अध्यात्म चिंतन (रजि.), हरिद्वार) 2022 ई. आदि अनेक सम्मानों से सम्मानित साहित्यिक गतिविधियाँ : अध्यक्ष, 'दीपशिखा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच', हरिद्वार। कविता, लेख, लघुकथा, हाईकू व समीक्षा विधाओं पर आधारित रचनाओं का विभिन्न राज्यों की पत्र पत्रिकाओं में निरन्तर प्रकाशन। विभिन्न राज्यों के साहित्यिक मंचों एवं नगर की मासिक गोष्ठियों में निरन्तर सहभागिता । अध्ययन अध्यापन काव्य रचना व मंच संचालन
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