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रह गईं दिशाएँ इसी पार: The Directions Have Remained Here

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Item Code: NZE557
Author: संजीव (Sanjeev)
Publisher: Rajkamal Prakashan Pvt. Ltd.
Language: Hindi
Edition: 2012
ISBN: 9788126721894
Pages: 312
Cover: Paperback
Other Details: 8.5 inch X 5.5 inch
weight of the book: 325 gms

पुस्तक के विषय में

सृष्टि और संहार, जीवन और मृत्यु के बफर जोन पर खड़े आदमी की नियति से साक्षात्कार करता संजीव का यह उपन्यास हिन्दी साहित्य में जैविकी पर रचा गया पहला उपन्यास है | उपन्यास के पारम्परिक ढांचे में गैर पारम्परिक हस्तक्षेप और तज्जनित रचाव और रसाव इसकी खास पहचान है | निरंतर नए से नए और वर्जित से वर्जित विषय के अवगाहनकर्ता संजीव ने इसमें अपने ही बनाए दायरों का अतिक्रमण किया है और अपने ही गढ़े मानकों को तोड़ा है |

मिथ, इतिहास, विज्ञान, प्रोद्दोगिकी और नए से नए विषय तथा चिंतन की प्रयोग भूमि है यह उपन्यास और यह जीवन और मृत्यु के दोनों छोरों के आर पार तक ढलकता ही चला गया है, जहां कल अनंत है, जहां दिशाएँ छोटी पद जाती है, जहां गहराइयाँ अगम हो जाती है और व्याप्तियां अगोचर |






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