पुस्तक परिचय
पद्मजा शर्मा की कविता की दोनों किताबें 'मैं बोलूंगी' और 'पहाड़ नदी फूल और प्रेम एक साथ आई हैं। 'पहाड़ नदी फूल और प्रेम' में जिस तरह से पद्मजा ने पहाड़ों को उठाया है, जिस तरह उड़ते हुए आसमानों को बाहों में भरा है वो वही कर सकती है। फूल को तो बहुत लोगों ने प्यार दिया है। लेकिन पहाड़ों को पद्मजा ने दिया कविता में। कवयित्री पहाड़ को लेकर कहती हैं- 'पहाड़ ने ओढ़ी सफ़ेद चादर/बोला न बतलाया/कुछ खाया न पीया/बस पीठ कर के मेरी ओर/सोता रहा गहरी नींद में/रात भर पहाड़।' कवयित्री ने जापान और स्विट्जरलैण्ड की यात्राओं के दौरान प्रकृति को करीब से देखा। लेकिन यात्राओं में जाने पर जो लिखा जाता है यह लेखन उससे बहुत अलग है। यह अलग किस्म की प्रयोगधर्मिता है। जब वह कहती है- "बादलों का अथाह असीम समंदर/समंदर में समंदर / मैं खुद ऐसा समंदर/कि जिसका कोई ओर नहीं कोई छोर नहीं/कोई प्रारम्भ नहीं / कोई अंत नहीं' तो कवयित्री पद्मजा ने शब्दों से तस्वीर खींच दी है इनकी। लग रहा है जैसे सचमुच की धुनक के रुई बिछा दी है।... 'मैं बोलूंगी' में पद्मजा के भीतर की औरत इतना बोलती है, इतना बोलती है जैसे डंडा लेकर खड़ी है। स्त्री हक़ की आजादी की चौकीदार नजर आती है। इससे अलग स्त्री विमर्श क्या होगा। पद्मजा कहती है 'मैं सिर्फ शरीर नहीं मस्तिष्क भी हूँ। हाँ मस्तिष्क, मैं भी तो यही कहती हूँ। यह है स्त्री विमर्श। धड़ के नीचे के हिस्से का स्वातंत्र्य तो एक अंश है। धड़ के ऊपर मस्तिष्क भी है। भूमिका भी बहुत अच्छी है। अपनी दृष्टि को बल देने के लिए कवयित्री ने जो साहित्य लिया, चुना, उद्धरण दिए उससे किताब की चौखट में पाठक को घुसने का जैसे मौक़ा दिया।
लेखक परिचय
प्रो. (डॉ.) रामप्रसाद दाधीच 'प्रसाद' जन्म : 1 दिसम्बर-1926 परबतसर सिटी, नागौर (राजस्थान) किसी भी तरह के वाद से दूर, विभिन्न विधाओं की 80 किताबों के लेखक, रचनात्मकता को समर्पित, जाने-माने वरिष्ठ कवि, गद्यकार, चिंतक, भावानुवादक, संपादक लोक साहित्य के ज्ञाता डॉ. रामप्रसाद दाधीच ने एक दीर्घ कालखंड जिया है। आप अनवरत सृजनरत हैं। आपका मानना है कि साहित्य सत्ता का प्रतिपक्ष रचता है। उसे सत्ता के साथ नहीं बल्कि आम आदमी के साथ खड़ा होना चाहिए। अनेक सम्मान व पुरस्कारों से नवाजे जा चुके, 90 वर्षीय डॉ. रामप्रसाद दाधीच के, सुप्रसिद्ध लेखिका अमृता प्रीतम के जीवनवृत्त का नाट्यान्तर तथा महाकवि जयशंकर प्रसाद के महाकाव्य कामायनी का नाट्य रूपांतर शीघ्र प्रकाश्य।
Hindu (हिंदू धर्म) (13760)
Tantra (तन्त्र) (1011)
Vedas (वेद) (730)
Ayurveda (आयुर्वेद) (2100)
Chaukhamba | चौखंबा (3182)
Jyotish (ज्योतिष) (1564)
Yoga (योग) (1170)
Ramayana (रामायण) (1334)
Gita Press (गीता प्रेस) (723)
Sahitya (साहित्य) (24830)
History (इतिहास) (9055)
Philosophy (दर्शन) (3636)
Santvani (सन्त वाणी) (2630)
Vedanta (वेदांत) (115)
Send as free online greeting card
Email a Friend
Visual Search
Manage Wishlist