पुस्तक के बारे में
वैदिक ज्योतिष पुस्तकों के आधिक्य से कई बाजार भरे हुए हैं। जिनमें जन्मपत्रियों के सामान्य संकेत पर ही विशेष ध्यान दिया गया है।
वास्ताविक रूप में वैयक्तियत अध्ययनों द्वारा स्पष्टीकृत, सांख्यकीय रूप से परिक्षित, भविष्यवाणी की पुनरावृत्तिक तकनीकों को दर्शाता हुआ कोई भी उत्कृष्ठ शोध नहीं है।
प्रथम बार यह पुस्तक न केवल वैदिक ज्योतिष के भविष्यवाणी निर्धारक गुप्त सिद्धान्तों का सुस्पष्ट और सूक्ष्म विवरण प्रस्तुत करती है बल्कि इनके सफल और पुनरावृत्तिक प्रयोग की व्याख्या करते हुए इस उत्कृष्ठ विज्ञान के आलोचकों द्वारा प्रस्तुत सभी संदेहों को दूर करती है।
यहां दी गई तकनीकों का परीक्षण स्वय प्रयोग श्री के० एन० राव के आवास की ज्योतिष प्रयोशाला में तथा उनके मार्गदर्शन में संचालित प्रसिद्ध विद्यालय भारतीय विद्या भवन (नई दिल्ली) में हजारों जन्मपत्रियों में किया जा चुका है।
भौतिक वैज्ञानिकों की यह आलोचना कि ज्योतिषीय तकनीकें पुनरावृत्तिक नहीं होती हैं, का इसमें सटीक उत्तर दिया गया है।
पुस्तक की इस पृष्ठभूमि पर पाठक ज्योतिषीय योगों की प्रभावकारिता, दशाक्रम और भविष्य के उतार-चढ़ाव को निर्धारित करने वाली शनि व बृहस्पति की दोहरे गोचर की सहक्रियात्मक उपयोगिता का क्रमबद्ध अध्ययन करेंगे।
अनुक्रमणिका |
||
1 |
आभार |
3 |
2 |
निवेदन |
4 |
3 |
लेखक-एक परिचय |
6 |
4 |
अनुक्रमणिका |
9 |
5 |
द्वितीय संस्करण का पूर्वावलोकन |
11 |
6 |
प्रथम सस्करण का पूर्वावलोकन |
11 |
7 |
प्रस्तावना |
19 |
प्रथम खण्ड |
||
अध्याय एक |
विष्य कथन के तीन चरण; भाग-एक |
23 |
अध्याय दो |
भविष्य कथन के तीन चरण; भाग–दो |
40 |
द्वितीय खण्ड |
||
वैयत्तिक अध्ययन-1 |
एक नाटकीय भविष्यवाणी-न्यायमूर्ति नन्दलाल अन्तवालिया |
50 |
वैयत्तिक अध्ययन-2 |
एक भविष्य-कथन की पीड़ा-मोरारजी देसाई का पराभव |
56 |
वैयत्तिक अध्ययन-3 |
एक असमंजषपूर्ण भविष्यवाणी-अमिताभ बच्चन |
64 |
वैयत्तिक अध्ययन-4 |
एक भविष्य कथन की नाड़ी-डॉ. पी. दियेश की पत्नी की खोयी सम्पत्ति की पुन: प्राप्ति |
74 |
वैयत्तिक अध्ययन-5 |
भविष्वाणी के तीन तल - रेलवे की एक घटना का भविष्यकथन |
78 |
वैयत्तिक अध्ययन-6 |
एक भविष्यवाणी की प्रेरणा-शिराज शहीद |
85 |
वैयत्तिक अध्ययन-7 |
एक भविष्य-कथन का हर्ष -शैक्षणिक विशिष्टता की भविष्यवाणी, विश्वास माधव सबनिस |
91 |
वैयत्तिक अध्ययन-8 |
एक भविष्यवाणी का अपनत्व -के०सी० पन्त |
100 |
वैयत्तिक अध्ययन-9 |
एक भविष्यवाणी का रोमांच मारग्रेट अल्वा |
107 |
वैयत्तिक अध्ययन-10 |
निराशा में आशाजनक भविष्यवाणी सजय श्रीवास्तव का आई.ए.एस के लिए चयन |
113 |
वैयत्तिक अध्ययन-11 |
पुनरावृत्तिक प्रक्रिया क्या है? |
121 |
वैयत्तिक अध्ययन-12 |
अमरीका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन |
124 |
वैयत्तिक अध्ययन-13 |
एक खोया गया साम्राज्य |
130 |
वैयत्तिक अध्ययन-14 |
व्यावसायिक क्षेत्र में आश्चर्यजनक उन्नति |
136 |
वैयत्तिक अध्ययन-15 |
लड़का जो घर से भाग गया |
139 |
वैयत्तिक अध्ययन-16 |
एक राजदूत जिनका अपहरण हुआ |
143 |
वैयत्तिक अध्ययन-17 |
चमत्कारिक अभिनेता राजनीतिज्ञ एन.टी.आर. |
150 |
तृतीय खण्ड |
||
1 |
अध्याय तीन ज्योतिष और विज्ञान निष्कर्ष |
156 |
2 |
शब्दावली |
162 |
पुस्तक के बारे में
वैदिक ज्योतिष पुस्तकों के आधिक्य से कई बाजार भरे हुए हैं। जिनमें जन्मपत्रियों के सामान्य संकेत पर ही विशेष ध्यान दिया गया है।
वास्ताविक रूप में वैयक्तियत अध्ययनों द्वारा स्पष्टीकृत, सांख्यकीय रूप से परिक्षित, भविष्यवाणी की पुनरावृत्तिक तकनीकों को दर्शाता हुआ कोई भी उत्कृष्ठ शोध नहीं है।
प्रथम बार यह पुस्तक न केवल वैदिक ज्योतिष के भविष्यवाणी निर्धारक गुप्त सिद्धान्तों का सुस्पष्ट और सूक्ष्म विवरण प्रस्तुत करती है बल्कि इनके सफल और पुनरावृत्तिक प्रयोग की व्याख्या करते हुए इस उत्कृष्ठ विज्ञान के आलोचकों द्वारा प्रस्तुत सभी संदेहों को दूर करती है।
यहां दी गई तकनीकों का परीक्षण स्वय प्रयोग श्री के० एन० राव के आवास की ज्योतिष प्रयोशाला में तथा उनके मार्गदर्शन में संचालित प्रसिद्ध विद्यालय भारतीय विद्या भवन (नई दिल्ली) में हजारों जन्मपत्रियों में किया जा चुका है।
भौतिक वैज्ञानिकों की यह आलोचना कि ज्योतिषीय तकनीकें पुनरावृत्तिक नहीं होती हैं, का इसमें सटीक उत्तर दिया गया है।
पुस्तक की इस पृष्ठभूमि पर पाठक ज्योतिषीय योगों की प्रभावकारिता, दशाक्रम और भविष्य के उतार-चढ़ाव को निर्धारित करने वाली शनि व बृहस्पति की दोहरे गोचर की सहक्रियात्मक उपयोगिता का क्रमबद्ध अध्ययन करेंगे।
अनुक्रमणिका |
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1 |
आभार |
3 |
2 |
निवेदन |
4 |
3 |
लेखक-एक परिचय |
6 |
4 |
अनुक्रमणिका |
9 |
5 |
द्वितीय संस्करण का पूर्वावलोकन |
11 |
6 |
प्रथम सस्करण का पूर्वावलोकन |
11 |
7 |
प्रस्तावना |
19 |
प्रथम खण्ड |
||
अध्याय एक |
विष्य कथन के तीन चरण; भाग-एक |
23 |
अध्याय दो |
भविष्य कथन के तीन चरण; भाग–दो |
40 |
द्वितीय खण्ड |
||
वैयत्तिक अध्ययन-1 |
एक नाटकीय भविष्यवाणी-न्यायमूर्ति नन्दलाल अन्तवालिया |
50 |
वैयत्तिक अध्ययन-2 |
एक भविष्य-कथन की पीड़ा-मोरारजी देसाई का पराभव |
56 |
वैयत्तिक अध्ययन-3 |
एक असमंजषपूर्ण भविष्यवाणी-अमिताभ बच्चन |
64 |
वैयत्तिक अध्ययन-4 |
एक भविष्य कथन की नाड़ी-डॉ. पी. दियेश की पत्नी की खोयी सम्पत्ति की पुन: प्राप्ति |
74 |
वैयत्तिक अध्ययन-5 |
भविष्वाणी के तीन तल - रेलवे की एक घटना का भविष्यकथन |
78 |
वैयत्तिक अध्ययन-6 |
एक भविष्यवाणी की प्रेरणा-शिराज शहीद |
85 |
वैयत्तिक अध्ययन-7 |
एक भविष्य-कथन का हर्ष -शैक्षणिक विशिष्टता की भविष्यवाणी, विश्वास माधव सबनिस |
91 |
वैयत्तिक अध्ययन-8 |
एक भविष्यवाणी का अपनत्व -के०सी० पन्त |
100 |
वैयत्तिक अध्ययन-9 |
एक भविष्यवाणी का रोमांच मारग्रेट अल्वा |
107 |
वैयत्तिक अध्ययन-10 |
निराशा में आशाजनक भविष्यवाणी सजय श्रीवास्तव का आई.ए.एस के लिए चयन |
113 |
वैयत्तिक अध्ययन-11 |
पुनरावृत्तिक प्रक्रिया क्या है? |
121 |
वैयत्तिक अध्ययन-12 |
अमरीका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन |
124 |
वैयत्तिक अध्ययन-13 |
एक खोया गया साम्राज्य |
130 |
वैयत्तिक अध्ययन-14 |
व्यावसायिक क्षेत्र में आश्चर्यजनक उन्नति |
136 |
वैयत्तिक अध्ययन-15 |
लड़का जो घर से भाग गया |
139 |
वैयत्तिक अध्ययन-16 |
एक राजदूत जिनका अपहरण हुआ |
143 |
वैयत्तिक अध्ययन-17 |
चमत्कारिक अभिनेता राजनीतिज्ञ एन.टी.आर. |
150 |
तृतीय खण्ड |
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1 |
अध्याय तीन ज्योतिष और विज्ञान निष्कर्ष |
156 |
2 |
शब्दावली |
162 |