प्रस्तुत कृति गाँधी दर्शन: एक पुनरवलोकन का प्रकाशन का उद्देश्य गाँधीजी के बहुआयामी चिन्तन को पाठकों के सम्मुख प्रस्तुत कर वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता को दर्शाना है। वस्तुतः गाँधीजी का योगदान सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक एवं नैतिक क्षेत्रों में अद्वितीय रहा है। गाँधी दर्शन का सार सर्वस्व जीवन-दर्शन है। गाँधी ने केवल जीवन-मूल्यों की व्याख्या ही नहीं की, उनको अपने जीवन में अपनाया भी। गाँधी ने चिन्तन को जीवन और जगत की व्यावहारिक समस्याओं से जोड़ा जिसके द्वारा समानता, स्वतंत्रता और न्याय पर आधारित समृद्ध एवं खुशहाल सामाज की स्थापना की जा सके। गाँधी-चिन्तन वर्ग-संघर्ष के स्थान पर वर्ग सामंजस्य, हिंसा के स्थान पर अहिंसा, अधिकार के स्थान पर कर्त्तव्य, कथनी के स्थान पर करनी, बहुजन हिताय के स्थान पर सर्वजन हिताय (सर्वोदय) का जीवन-दर्शन है। ऐसे जीवन-दर्शन की आवश्यकता सम्पूर्ण विश्व-समाज महसूस कर रहा है। गाँधीजी का बहुआयामी चिन्तन ही विश्व समाज का जीवन-दृष्टि तथा आचार-धर्म बन सकता है। इसे ही रेखांकित करने का कार्य विज्ञ लेखकों ने किया है, जिसका संकलन आपके समक्ष है।
डॉ. श्यामल किशोर का जन्म 12 अगस्त, 1965 में ग्राम-सिमुआरा, जिला-अरवल (बिहार) में हुआ। स्नातक प्रतिष्ठा व स्नातकोत्तर (दर्शनशास्त्र) स्वर्णपदक प्राप्त, पी-एच. डी. तक की सारी तालीम पटना विश्वविद्यालय, पटना द्वारा। प्राध्यापक व अध्यक्ष, दर्शनशास्त्र, एस. बी. आर. कॉलेज बाढ़ में 1.8.89 से अध्यापन कार्य प्रारंभकिया, तदुपरान्त किसान कॉलेज, सोहसराय, नालंदा, सम्प्रति एसोसिएट प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, स्नातकोत्तर दर्शनशास्त्र विभाग, टी.पी.एस. कॉलेज, पटना। कई शोधार्थियों ने इनके निर्देशन में मगध विश्वविद्यालय द्वारा पी-एच. डी. की डिग्री प्राप्त की। इन्होंने कई अधिवेशन, राष्ट्रीय संगोष्ठी, व्याख्यान माला का सफल आयोजन करवाया। समय-समय पर राष्ट्रीय व प्रांतीय अधिवेशनों तथा भारतीय वि. वि. द्वारा आयोजित सेमिनारों में व्याख्यान प्रस्तुत करते रहे हैं। कई शोध पत्रिकाओं में इनके शोध आलेख प्रकाशित हो चुके हैं। कृति गाँधी-दर्शन के विविध आयाम, प्रारंभिक दर्शनशास्त्र : एक सामान्य परिचय को काफी सराहना मिली है। इन्होंने कई वर्षों तक 'बिहार दर्शन परिषद्' की शोध-पत्रिका 'दार्शनिक अनुगूंज' का संपादन भी किया। वर्तमान में 'बिहार दर्शन परिषद्' के महामंत्री और 'अखिल भारतीय दर्शन परिषद्' के संयुक्त मंत्री के रूप में सक्रिय हैं।
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