Easy Returns
Easy Returns
Return within 7 days of
order delivery.See T&Cs
1M+ Customers
1M+ Customers
Serving more than a
million customers worldwide.
25+ Years in Business
25+ Years in Business
A trustworthy name in Indian
art, fashion and literature.

गाँधी का पुनर्मूल्यांकन: Gandhi Ka Punarmulyankan (How He Delayed Independence and Mainstreamed Radical Islam)

SG$49
Includes any tariffs and taxes
Specifications
Publisher: GARUDA PRAKASHAN PVT. LTD.
Author Susmit Kumar
Language: Hindi
Pages: 443
Cover: PAPERBACK
9.5x6.5 inch
Weight 460 gm
Edition: 2024
ISBN: 9798885751773
HCH078
Delivery and Return Policies
Usually ships in 3 days
Returns and Exchanges accepted within 7 days
Free Delivery
Easy Returns
Easy Returns
Return within 7 days of
order delivery.See T&Cs
1M+ Customers
1M+ Customers
Serving more than a
million customers worldwide.
25+ Years in Business
25+ Years in Business
A trustworthy name in Indian
art, fashion and literature.
Book Description
प्रस्तावना

मे *री 2016 की पुस्तक आनंद मार्गः विक्टिम ऑफ कम्युनिस्ट कॉस्पिरेसी ड्यूरिंग 1969-77 के लिए इन्टरनेट पर शोध के दौरान मुझे ब्रिटिश नेशनल आर्काइव (राष्ट्रीय अभिलेखागार) की वेबसाइट पर दो अवर्गीकृत प्रपत्र (दस्तावेज) मिले जिनमें महात्मा गाँधी द्वारा 1942 के भारत छोड़ो आन्दोलन को आरम्भ करने के पीछे के कारणों की चर्चा की गई थी। वो (गाँधी) इस बात से डरे हुए थे कि जापानी सेना द्वारा बनाई गई और समर्थित भारतीय राष्ट्रीय सेना (आजाद हिन्द फौज), भारत को ब्रिटेन से आजाद करा लेगी। ब्रिटिश गुप्तचर एजेंसियों के अनुसार 1942 के मध्य तक गाँधी का मानना था कि जर्मनी और जापान द्वितीय विश्वयुद्ध में विजयी होंगे, जो उन्हें भारतीय इतिहास के मात्र एक 'फुटनोट' बना कर रख देती क्योंकि तब तक उन्होंने अपनी काँग्रेस पार्टी में स्वतंत्रता को लेकर किसी भी विमर्श को हमेशा शान्त कराया था। यहाँ तक कि उनके 1942 भारत छोड़ो आन्दोलन का मसौदा जापान के पक्ष में था। इससे पहले उन्होंने दो आन्दोलन आरम्भ किया था, किन्तु उनमें से कोई भी ब्रिटेन से स्वतंत्रता के लिए नहीं थे। इन दो अवर्गीकृत प्रपत्रों में से एक में कहा गया - "... इस बात के बढ़ते हुए संकेत मिल रहे हैं कि गाँधी सरकार को शर्मसार न करने की अपनी पुरानी नीति को छोड़ रहे हैं और काँग्रेस का नेतृत्व ब्रिटेन को भारत छोड़ने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से एक बड़े आन्दोलन की तैयारी कर रहे हैं।"

अपनी 2008 की पुस्तक द मॉडर्नाइज़ेशन ऑफ इस्लाम एंड द क्रिएशन ऑफ मल्टीपोलर वर्ल्ड ऑर्डर में मैंने लिखा था कि वस्तुतः द्वितीय विश्वयुद्ध ने साम्राज्यवादी शक्तियों को अपने उपनिवेशों को स्वतंत्र करने पर मजबूर किया था, क्योंकि युद्ध के बाद उन्होंने मात्र भारत ही नहीं वरन लगभग बाकी सारे उपनिवेशों को अगले एक दशक के भीतर स्वतंत्र कर दिया। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटेन ने न सिर्फ भारत को, बल्कि अन्य कई उपनिवेशों को स्वतंत्रता दे दी जिसमें 1946 में जॉर्डन, 1947 में फिलिस्तीन, 1948 में श्री लंका, 1948 में म्यांमार, 1952 में मिस्र और 1957 में मलेशिया शामिल थे। इसी कारण से फ्रांस को 1949 में लाओस, 1953 में कम्बोडिया को स्वतंत्रता देनी पड़ी; और 1954 में विएतनाम को छोड़ना पड़ा। नीदरलैंड्स ने भी डच ईस्ट इंडीज़ कहे जाने वाले उपनिवेशों, मुख्यतः इंडोनेशिया, को 1949 में छोड़ दिया। पिछले वर्ष के मध्य में मैंने अपने पूर्व के कार्यों को विस्तार देने के उद्देश्य से गाँधी और भारतीय स्वतन्त्रता पर लिखने का विचार किया और ये पुस्तक उसी का परिणाम है।

मैं इस अवसर पर श्री ट्रोंड ओवरलैंड का इस पुस्तक के सम्पादन के लिए आभार प्रकट करता हूँ; साथ ही ओक्लाहोमा स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर राज एन. सिंह जी की इस पुस्तक को लिखने में प्रदान की गई सहायता का आभार प्रकट करता हूँ। मैं मेरी पीएचडी के सलाहकार (advisor), पेनसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के स्वर्गीय प्रोफेसर स्टीवर्ट के. कर्ज, जिन्होंने मुझे शोध करना और शोध पत्र/ लेख लिखना सिखाया, का सदैव आभारी रहूँगा। मैं अपनी माँ का धन्यवाद करता हूँ, जिन्होंने मुझे अनगिनत प्रकार से प्रेरणा दी, जिसे शब्दों में मैं कभी नहीं कह सकता।

भूमिका

परे विश्व में गाँधी और उनके अहिंसा के मार्ग को भारत की ब्रिटेन से स्वतंत्रता की चाभी साना जाता है। भारत में अभी भी गाँधी को संत और राष्ट्रपिता के तौर पर देखा जाता है।

लगभग छः दशकों से बड़े पैमाने पर महिमामंडित किए गए नेहरु-गाँधी वंश के कारण, भारत के 'दरबारी' इतिहासकारों ने देश के इतिहास को पूर्णतया भ्रष्ट कर दिया है। अपनी पुस्तक लिबर्टी और डेथः इंडियाज़ जर्नी टू इंडिपेंडेंस एंड डिवीज़न में पैट्रिक फ्रेंच ने सही लिखा है:

रिचर्ड एटेनबरो की 1982 की फिल्म गाँधी में जिस 'प्लास्टर' महात्मा को संपुटित किया गया है, वह निश्चय ही सही नहीं है। जैसा सलमान रश्दी ने लिखा है: "गाँधी को पश्चिम के बाजार में आकर्षक बनाने के लिए उन्हें पवित्रता प्रदान करना आवश्यक था और (इसलिए) उन्हें क्राइस्ट (ईसा मसीह) बना दिया गया-एक चतुर गुजराती वकील के लिए भाग्य की एक अजीब विडंबना और (इसके) लिए एक सदी के सबसे महान आन्दोलनों में से एक के इतिहास को पूरी तरह क्षत-विक्षत कर दिया गया।" ये फिल्म हमें सन्देश देती है कि 'स्वतंत्रता प्राप्ति का सबसे बढ़िया तरीका है कि आप एक पंक्ति में खड़े हो जाएँ, बिना किसी हथियार के, और अपने दमनकर्ता की तरफ बढ़ें और उन्हें आपको मार-मार कर जमीन पर गिरा देने की स्वीकृति दें; आप यदि एक लम्बे समय तक ऐसा कर पाते हैं, तब आप उनको इतना शर्मिंदा कर देंगे कि वे (आपको छोड़ कर) चले जाएँगे । ब्रिटिश के भारत छोड़ कर जाने के अनेकों कारण थे, किन्तु शर्मिंदगी उनमें से एक नहीं था।' किन्तु, घटनाओं का ये संस्करण न सिर्फ पश्चिमी बाजार के लिए, बल्कि भारत में भी, जहाँ स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद के दशकों में काँग्रेस की सत्ता पर पकड़ के दौरान निर्दोष और मंगलकारी राष्ट्रपिता का चित्रण उनके (काँग्रेस) लिए राजनैतिक तौर पर उपयोगी थी, आकर्षक था।

हालाँकि, पैट्रिक फ्रेंच ने उन बिन्दुओं को नहीं छुआ जिनकी चर्चा इस पुस्तक में की गई है।

1962 में जब रिचर्ड एटेनबरो ने एक फिल्म, जो आगे चल कर 1982 की फिल्म गाँधी बनती, के शोध के आरम्भ में भारत के पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरु से उनके स्वर्गीय साथी के बारे में प्रश्न किया कि उन्हें (महात्मा गाँधी को) किस प्रकार चित्रित किया जाए। नेहरु ने बड़ा ही मशहूर उत्तर दिया कि गाँधी "एक महान व्यक्ति थे, पर उनकी अपनी कमजोरियाँ थीं, उनके अपने मनोभाव थे और उनकी अपनी असफलताएँ थीं।" उन्होंने एटेनबरो से मिन्नत की कि गाँधी को संत में परिवर्तित न करें। "वो (काफी मायनों में) एक मानव थे," नेहरु ने कहा।

क्लेमेंट एटली-भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति के दौरान ब्रिटेन के प्रधान मंत्री थे, जिन्होंने कहा था कि गाँधी के अहिंसक आन्दोलन का ब्रिटिश पर प्रभाव (जिससे वो भारत छोड़ कर चले गए) लगभग शून्य था। कोलकाता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पी. बी. चक्रवर्ती, जिन्होंने (एक समय में) पश्चिम बंगाल के कार्यकारी राज्यपाल के रूप में भी कार्यभार संभाला था, ने रमेश चन्द्र मजूमदार की पुस्तक ए हिस्ट्री ऑफ बंगाल के प्रकाशक को लिखे अपने एक पत्र में निम्नलिखित खुलासा किया:

आपने डॉ मजूमदार को बंगाल का इतिहास लिखने के लिए मनाने और उसे प्रकाशित करने का एक महान कार्य किया है... पुस्तक की प्रस्तावना में डॉ मजूमदार ने लिखा है कि वो इस मान्यता से सहमत नहीं हो सकते कि भारत की स्वतंत्रता गाँधी के अहिंसक असहयोग आन्दोलन मात्र से मिली, या उसका सबसे अधिक योगदान था। जब मैं कार्यकारी राज्यपाल था, तब लॉर्ड एटली, जिन्होंने ब्रिटिश शासन को समाप्त कर हमें स्वतंत्रता दी थी, ने अपने भारत प्रवास के दौरान दो दिन राज्यपाल भवन में बिताए थे। उस समय हमारी उनसे ब्रिटेन के भारत छोड़ने के सही कारणों के विषय में लम्बी चर्चा हुई। मेरा उनसे सीधा प्रश्न था कि गाँधी का "भारत छोड़ो" आन्दोलन कुछ समय पहले ही ठंडा हो चला था और 1947 में ऐसी कोई नई परिस्थिति नहीं बनी थी जिसकी वजह से ब्रिटिश को शीघ्रता से भारत छोड़ने पर मजबूर होना पड़े, तो फिर ऐसे में उन्होंने भारत क्यों छोड़ा? अपने उत्तर में एटली ने कई कारण गिनाए, जिसमें सबसे महत्त्वपूर्ण कारण था नेताजी सुभाष चन्द्र बोस] की सैन्य गतिविधियों की वजह से भारतीय सेना और नौसैनिकों में ब्रिटिश क्राउन के प्रति घटती वफादारी। (जब हम) चर्चा के अंत पर आ रहे थे तो मैंने एटली से पूछा कि भारत छोड़ने के ब्रिटिश निर्णय पर गाँधी का कितना प्रभाव था। इस प्रश्न को सुन कर एटली के होंठों पर एक व्यंग्यात्मक मुस्कान आ गई और उन्होंने (शब्द) का एक-एक अक्षर चबाते हुए कहा, "मि-नि-म-ल" (अर्थात नगण्य)।

Frequently Asked Questions
  • Q. What locations do you deliver to ?
    A. Exotic India delivers orders to all countries having diplomatic relations with India.
  • Q. Do you offer free shipping ?
    A. Exotic India offers free shipping on all orders of value of $30 USD or more.
  • Q. Can I return the book?
    A. All returns must be postmarked within seven (7) days of the delivery date. All returned items must be in new and unused condition, with all original tags and labels attached. To know more please view our return policy
  • Q. Do you offer express shipping ?
    A. Yes, we do have a chargeable express shipping facility available. You can select express shipping while checking out on the website.
  • Q. I accidentally entered wrong delivery address, can I change the address ?
    A. Delivery addresses can only be changed only incase the order has not been shipped yet. Incase of an address change, you can reach us at help@exoticindia.com
  • Q. How do I track my order ?
    A. You can track your orders simply entering your order number through here or through your past orders if you are signed in on the website.
  • Q. How can I cancel an order ?
    A. An order can only be cancelled if it has not been shipped. To cancel an order, kindly reach out to us through help@exoticindia.com.
Add a review
Have A Question
By continuing, I agree to the Terms of Use and Privacy Policy
Book Categories