ब्रिटिश साम्राज्य का पहला नजर भारत के वस्त्र उद्योगों पर पड़ा, जो विश्व में छाया हुआ था और उन्होंने सबसे पहले इसी उद्योग को समाप्त किया क्योंकि भारत का आर्थिक स्तर इन्हीं उद्योगों पर पूर्णतया निर्भर था। भारत की आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय क्यों हुई, इस समस्या की ओर मेरा ध्यान सर्वप्रथम गया शायद यही वजह है कि मुझे इसी विषय पर पुस्तक को लिखने की प्रेरणा जगी। जब मैं गाँधी विचार से एम०ए० और दर्शन शास्त्र से भी एम०ए० किया, लेकिन मुझे गाँधीजी की अर्थव्यवस्था की दर्शन की ओर काफी झुकाव हुआ। में गाँधीजी के अर्थ दर्शन, राजनीतिक संबंधी दर्शन इत्यादि पुस्तकों को पढ़ा और अंत में मन ही मन मैंने फैसला कर लिया कि गाँधी के अर्थ दर्शन को ही प्रस्तुत पुस्तक में वर्णन किया गया है।
डॉ० अजीत कुमार ठाकुर 1. जन्म 1960 मोहल्ला रायसर, वासुदेवपुर, मुंगेर । शिक्षा : स्नातक आर डी० एण्ड डी० जे० कॉलेज, मुंगेर; त्रय एम० ए० (1) दर्शशास्त्र, (ii) गाँधी विचार, (iii) अर्थशास्त्र, पी-एच डी० 1992 भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर । 2. अध्यापन: सी बी० एल० के कॉलेज, बरियारपुर, दर्शन विभाग 1990-96; दर्शनशास्त्र विभाग, टी० एम० भा० वि० वि०, भागलपुर 8-11-96 से 22-11-96; दर्शनशास्त्र विभाग, आर० एस० कॉलेज, तारापुर 22-11-96 से कार्यरत । 3. संस्थागत संबंध अखिल भारतीय दर्शन परिषद्, आई० सी० पी० आर०, दिल्ली, आई पी सी परिषद् एवं बिहार दर्शन परिषद्, आजीवन सदस्य तथा राष्ट्रीय बुद्धिजीवी मंच, उपाध्यक्ष एवं प्रवक्ता । 4. एवार्ड भारत शिक्षा रत्न 2010 "ग्लोबुल सोसाइटी फॉर हेल्थ एण्ड एडुकेशनल ग्रोथ, नई दिल्ली" राष्ट्र रत्न 2010 "ऑल इण्डिया बिजनेस डवलपमेंट एसोसिएशन, नई दिल्ली ।" 5. शोधक निर्देशन लगभग चार शोधकर्ता शोध कर रहे हैं। 6. समाज सम्पर्क भारातीय तरुण शांति सेना।
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