प्रश्नों का हमारे जीवन में अहम स्थान है। प्रश्न, जानने की प्र प्रक्रिया की ओर बढ़ाया गया पहला कदमन दम है। आपने गौर किया होगा कि हम जब भी कोई नई चीज देखते हैं, तो तुरंत ही उसके बारे में कोई धारणा नहीं बनाते। हम जब कुछ नया देखते हैं, तो हमारे मन में विचारों कि प्रक्रिया हमारी मर्जी के बिना ही चलना शुरू हो जाती है। हमारे मन में उस वस्तु को लेकर प्रश्न आने लगते हैं, जैसे इसका नाम क्या है? ये काम कैसे करती होगी? आदि।
तो इस तरह से प्रश्न हमारे मन कि शंका, समस्या, जिज्ञासा, ज्ञान, रुचि आदि की निरुक्ति करते हैं। अगर हम हमारी भारतीय सभ्यता की बात करें, तो हमारे यहाँ प्रश्नों का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। प्रश्नों को सत्य की खोज के लिए प्रथम उपकरणों के रूप में माना जाता है। हमारे भारत के ज्यादातर शास्त्रों का आधार प्रश्न- उत्तर के रूप में ही हैं। कुछ विद्वानों का ये भी मत है कि भाषा का विकास भी प्रश्नों से ही हुआ है। तो इस तरह प्रश्नों की हम सब के जीवन में अहम भूमिका है।
हम जब किसी छोटे बालक को देखते हैं, वह जीवन को एक नई आँख से देखता है। हर एक चीज उसके लिए नई है, वह हर एक वस्तु को हैरानी के भाव से देखता है, हर चीज उसको आकर्षित करती है। जब भी कहीं वह कोई नई चीज देखता है, तो वह उसके बारे में प्रश्न पूछता है। इसको हम एक उदाहरण से समझने की कोशिश करते हैं। मान लो किसी बच्चे ने अगर अपने जीवन में कुत्ता पहली बार देखा हो, तो वह उसको देख कर बहुत हैरान होता है। उसके आस पास अगर कोई हो, तो वह उस से पूछता है कि यह है क्या, तो उसके माता पिता या कोई और उसे बताता है कि यह कुत्ता है, और यह एक जानवर है, और इसका नाम मोती है।
12 परन्तु उतनी दूसरी बार उस जानवर को देखने पर उसे खुशी तो होती है प नहीं, जितनी पहली बार देखने पर हुई थी। दूसरी और तीसरी बार वह खुशी और हैरानी बहुत कम, न के बराबर ही होती है। क्योंकि अब उस बालक को उस जानवर के बारे में सब मालूम है कि यह मोती है, और यह एक जानवर है, और कुत्ता उसकी प्रजाति है। यह बात किसी बालक की ही नहीं बल्कि हम सबकी भी है। जब भी हम किसी वस्तु या विषय के बारे में जान लेते हैं, तो फिर हम उसको साधारण मानने लगते हैं। आपने गौर किया होगा कि जब इंसान बड़ा हो जाता है, तो वह पूरी दुनिया को ही साधारणता से लेने लगता है। वह किसी भी चीज को देखकर हैरानी नहीं प्रकट करता, और न ही उसकी कोई रुचि होती है किसी विषय को समझने में। हर रोज जिंदगी में नया और अलग घटता है मगर इंसान के लिए सब साधारण और समान है। खैर ! बच्चे का प्रश्न पूछना ये कोई अलग बात नहीं और सोचें तो साधारण ले भी सकते हैं कि ऐसे प्रश्न आम तौर पर बच्चे पूछते ही हैं और बता देने पर वह दोबारा नहीं पूछता।
परंतु बच्चे अपने जीवन में ऐसे प्रश्न भी पूछते हैं, कि जिनके उत्तर का प्रभाव उनके जीवन भर रहता है। बचपन में ज्यादातर बच्चे ऐसे प्रश्न भी पूछते हैं, कि आप ने मेरा नाम यही क्यों रखा, कोई और क्यों नहीं ? क्या भगवान ही इस दुनिया के सभी कर्म करते हैं? भगवान है कहाँ और वह कैसे दिखते हैं? मैं दूसरों से अलग क्यों हूँ, आदि। तो ऐसे प्रश्नों का साधारण और छोटा उत्तर बच्चे के हाथ में थमा देना उसके और उसके जीवन के साथ अन्याय है।
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