डॉ. वन्दना शर्मा जन्मः जुलाई 7,1985 जन्म स्थानः हिसार (हरियाणा) शिक्षाः स्नातक (आर्ट्स) कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र स्नातकोतर हिंदी हिंदी विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय चण्डीगढ़ विद्यावाचस्पति हिंदी हिंदी विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय चण्डीगढ़ स्नातकोतर डिप्लोमा अनुवाद (हिंदी-अंग्रेजी पंजाबी) हिंदी विभाग पंजाब विश्वविद्यालय चण्डीगढ़ स्नातकोतर डिप्लोमा सॉफ्टवेयर टेक्नोलोजी वेब डिजाइनिंग NICT-चंडीगढ़ प्रकाशन कार्य: राष्ट्रीय अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की अनेक पत्र-पत्रिकाओं में हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं से जुड़े 27 शोध पत्र प्रकाशित विभिन्न पुस्तकों में 7 चेप्टर प्रकाशित भाषा विज्ञान : वस्तुनिष्ठ दर्पण (प्रेस में) सेमीनार / वेबीनार / एफ. डी. पी. राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न संगोष्ठियों तथा वेबीनारों में 38 शोध पत्रों की प्रस्तुती & 20 एफ. डी. पी. में उपस्तिथि दर्ज अध्यापन: 2012-2014 तक वैश्य महिला महाविद्यालय रोहतक सम्प्रति : राजकीय महाविद्यालय नलवा पब्लिक सर्विस कमिशन) के तहत हिसार (हरियाणा अभिरुचि: शैक्षणिक गतिविधियों संगोष्ठियों में सक्रिय सहभागिता एक अनुसन्धित्सु के रूप में सदैव कुछ सीखने-जानने, पढ़ने-सुनने और समझने की ललक.
पुस्तक "हिंदी भाषा एवं संप्रेषण" की भूमिका प्रस्तुत करते हुए मुझे प्रसन्नता है कि यह ग्रंथ हिंदी भाषा की संरचना, संप्रेषण कौशल और आधुनिक संचार-विधियों का समन्वित परिचय कराता है। भाषा केवल व्याकरणिक नियमों की संरचना भर नहीं, बल्कि सामाजिक संबंधों, मानवीय अनुभूतियों और विचार-प्रवाह का आधार है। इस पुस्तक की भूमिका तीन प्रमुख उद्देश्यों पर आधारित है-1. हिंदी भाषा की वैज्ञानिकता और सौंदर्य को समझाना। 2. संप्रेषण की विभिन्न विधियों को सरल एवं व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत करना। 3. आधुनिक तकनीकी युग के संचार साधनोंखईमेल, सोशल मीडिया, प्रस्तुतीकरण, रिपोर्टिंगख्खआदि को शिक्षा से जोड़ना। इस पुस्तक "हिंदी भाषा एवं संप्रेषण" की सृजना का उद्देश्य विद्यार्थियों, अध्येताओं और हिंदी-प्रेमियों को हिंदी भाषा की बुनियादी संरचना, अभिव्यक्ति कौशल, संप्रेषण के आधुनिक रूपों और व्यावहारिक प्रयोगों से परिचित कराना है। पुस्तक में मैंने प्रयास किया है कि हिंदी की वैज्ञानिकता, उसकी स्वाभाविक सरलता, और उसके व्यावहारिक पक्ष को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाए. ताकि पाठक न केवल भाषा को समझ सकें, बल्कि उसे प्रभावी ढंग से प्रयोग भी कर सकें। इस कृति में पाठकों को हिंदी व्याकरण, शैली, शब्द भंडार, पत्र-विधाएँ, रिपोर्टिंग, तकनीकी लेखन, समूह-संचार, डिजिटल संप्रेषण और व्यावसायिक संवाद जैसे विविध आयामों का संतुलित संयोजन मिलेगा। आज की शैक्षिक और व्यावसायिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए संप्रेषण के आधुनिक उपकरणों ईमेल, सोशल मीडिया, प्रस्तुति-तकनीक आदि-को भी विशेष स्थान दिया गया है। पुस्तक के निर्माण में मैंने पाठकों की सुविधा और सावश्यकता को सर्वोपरि रखा है। उदाहरणों, अभ्यासों और व्यावहारिक गतिविधियों को इस तरह संजोया गया है कि विद्यार्थी स्वयं अभ्यास कर अपने संप्रेषण कौशल को विकसित कर सकें। मेरा विश्वास है कि यह पुस्तक प्रतियोगी परीक्षाओं, व्यावसायिक प्रशिक्षण, उच्च शिक्षा तथा दैनिक जीवनखसभी क्षेत्रों में उपयोगी सिद्ध होगी।
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