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ज्योतिश्चन्द्रार्क: Jyotish Chandrarka (Second Part)

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ज्योतिश्चन्द्रार्क: Jyotish Chandrarka (Second Part)
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Item Code: NZE946
Author: प्रो. जगन्नाथ जोशी (Prof. J.N. Joshi)
Publisher: White Falcon Self Publishing
Language: Hindi
Edition: 2016
ISBN: 9781943851720
Pages: 336
Cover: Paperback
Other Details: 8.5 inch X 5.5 inch
weight of the book: 375 gms

लेखक परिचय

प्रो. जगन्नाथ जोशी

जन्म 15 अक्टूबर 1937 को उत्तराखंड के ग्राम किमाड़ प्रो. रीठाखाल जिला चम्पावत के ज्योतिषियो, कर्मकाण्डी एवं वैधो के प्रतिष्ठित परिवार में हुआ! इनके नाना भी प्रसिद्ध दैवज्ञ थे! प्राइमरी शिक्षा के बाद संस्कृत महाविद्धयालयो में गुरुकुलपद्धति से अध्ययन! हाईस्कूल पास करने के बाद जी.आई.सी. पिथौरागढ़ से इण्टर परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास! लखनऊ विश्वविद्यालय से 1960 में ऍम.बी.ए. एवं 1963 में अलीगढ विश्वविद्यालय से ऍम.ए. (संस्कृत) में सर्वाधिक अंको के साथ प्रथम श्रेणी प्रथम तथा स्वर्णपदक से पुरस्कृत! 1969 में पी.एच.डी. की उपाधि! संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी से शास्त्री आदि की परीक्षाएं पास की!

अलीग़ढ विश्वविद्यालय से शिक्षण कार्य (1966 - 67 ) में आरम्भ हुआ! संस्कृत महाविद्धयालयो में उच्च कक्षाओ को अंग्रेजी और संस्कृत का अध्यापन लगभग 3 वर्षो तक! राजकीय महाविद्यालय नैनीताल में संस्कृत प्रवक्ता के रूप में वर्ष 1970 में पढ़ाने के पश्चात् राजकीय महाविद्यालय रामपुर (यू.पी.) में संस्कृत विभागाध्यक्ष के रूप में कुमाऊँ विश्वविद्यालय नैनीताल में 20 वर्षो तक कार्यात! सन् 1998 में सेवानिवृत्त!

प्रो. जोशी के निर्देशन में लगभग 30 सोध छात्रों ने पी.एच.डी. की उपाधियॉ प्राप्त की! आप अनेक राष्ट्रीय संस्कृतसम्मेलनों में सम्मानित हुए! प्रो. जोशी काव्यशास्त्र, साहित्य दर्शन, व्याकरण, ज्योतिष कर्मकाण्ड आदि में विशेष पकड़ रखते है ! हिंदी व्याख्या के साथ संपादित ग्रंथ - शृगारमंजरीसटट्क, संस्कृतकाव्यसंग्रह, तीन पांडुलिपियां - हिंदी व्याख्या के साथ संपादित - ज्योतिषरूद्रप्रदीप (3 भाग), श्रीपरशुरामचरित और ज्योतिषचंद्रार्क - छठा अध्याय, द्वितीय भाग ! संपादित ग्रंथ - धर्म और दर्शन (शोध लेखमंजरी) प्रथम भाग और भारतीय दर्शन में अध्यात्मविद्या और आत्माI प्रकाशनाधीन - अनेक ग्रन्थ ! प्रो. जोशी के दर्जनों शोधपत्र प्रकाशित है ! यू.जी.सी. बृहत् शोधपरियोजना के तहत प्रधान अन्वेषक के रूप में 'कुमाऊँ की ज्योतिषशास्त्र एवं कर्मकांड की परंपरा, सर्वेक्षण एवं मूल्यांकन' विषय पर शोधकार्य किया ! मानव संसाधन मंत्रालय भारत सर्कार के अंतर्गत राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान (मानित वि.वि.) जनकपुरी नै दिल्ली से आपने शास्त्रचूड़ामणि विद्वान के रूप में शोधकार्य किया! अभी भी आप दुर्लभ पांडुलिपियों के संग्रह एवं प्रकाशन में जुटे हुए है!
















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