जन्म: 1950। कर्नाटक के शिवमोग्गा नगर में। शिक्षा: एम.ए. (हिन्दी), बी.एड., राष्ट्रभाषा प्रवीण कार्यक्षेत्र: हिन्दी-कन्नड़ के प्रमुख अनुवादक। अब तक 105 अनूदित किताबें प्रकाशित, जिनमें उपन्यास और कहानी-संग्रह प्रमुख हैं। कन्नड़ की सभी प्रमुख पत्रिकाओं में अनूदित रचनाएँ प्रकाशित होती रहती हैं, अन्य भारतीय भाषाओं के उपन्यास और कहानियाँ हिन्दी के माध्यम से कन्नड़ में अनूदित और प्रकाशित । कन्नड़ की रचनाओं के हिन्दी अनुवाद भी हिन्दी की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं। अनुवाद को भी सृजनशीलता प्रदान करनेवालों में डी एन श्रीनाथ का योगदान बड़ा महत्वपूर्ण है। डी. एन. श्रीनाथ सम्मान: 1983 में कर्नाटक सरकार की ओर से अहिंदी भाषा लेखन पुरस्कार। 1998 में गोरूर पुरस्कार। 2001 में मध्यप्रदेश राष्ट्रभाषा समिति, भोपाल से स्वर्गीय हजारीलाल जैन स्मृति सम्मान। 2001-02 में केन्द्रीय हिन्दी निदेशनालय, भारत सरकार, नई दिल्ली से अनुवाद पुरस्कार। 2004 में विश्वेश्वरय्या साहित्य पुरस्कार। 2007 में कर्नाटक अनुवाद साहित्य अकादेमी पुरस्कार 2009 में केंद्र साहित्य अकादेमी का अनुवाद पुरस्कार। 2009 में कमला गोइंका अनुवाद पुरस्कार। 11-03-2012 में शिवमोग्गा में सम्पन्न हुई "अखिल कर्नाटक प्रथम हिन्दी साहित्य सम्मेलन" की अध्यक्षता। 29-06-2014 में होसहल्ली, शिवमोग्गा में सम्पन्न हुई "चौथवाँ तालुका कन्नड़ साहित्य सम्मेलन" की अध्यक्षता। 2014 में उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान, लखनऊ का प्रतिष्ठित "सौहार्द सम्मान"। 2016 में कर्नाटक संघ, शिवमोग्गा का श्री एस.वी. परमेश्वर भट्ट अनुवाद पुरस्कार। 2016 में कुवेम्पु भाषा भारती प्राधिकार, बैंगलोर से अनुवाद पुरस्कार। 2018 में कर्नाटक साहित्य अकादेमी, बेंगलोर से अनुवाद के अंतर्गत कन्नड़ से भारतीय भाषा में अनूदित पुरसकों को दिये जानेवाले पुरस्कार के तहत "कन्नड़ की चर्चित बीस कहानियाँ" के लिए पुरस्कार। 2020 में कुवेम्पु भाषा भारती प्राधिकार, बैंगलोर से "गौरव प्रशस्ति" पुरस्कार ।
पिछले चालीस वर्षों में कन्नड में कहानियों का क्षेत्र आगे की ओर अग्रसर होता आ रहा है। कहानियाँ ये रूप ही प्रमुख है, ऐसा कहा जा सकता है। उपन्यास से कहानी ने ज्यादा प्रचुर और विविधता के रूप में राज किया है। कन्नड कहानी सफर के चार पड़ाव हैं-नवोदय धारा, प्रगतिशील धारा, नव्य धारा और नव्योत्तर धारा। पाश्चात्य साहित्य के प्रभाव से कहानियाँ एक विशिष्ट प्रकार के रूप में कन्नड में उभर कर आई हैं। 1900 में पंजे मंगेशराय जी की दो कहानियाँ छप गई। एम. एन. कामत, केरूरु वासुदेवाचार्य जी ने भी आरम्भ में कहानियाँ लिखीं। मगर कहानी के लिए एक आकार देकर उसे एक गंभीर और चिंतन-माध्यम बनाने वाले हैं। 'श्रीनिवास' यानी मास्ति वेंकटेश अय्यंगार। मास्ति जी का स्थान कन्नड कहानी क्षेत्र में सबसे पहले आता है। ये कन्नड कहानी विधा के शिखर और प्रवर्तक लेखक हैं। मास्ति जी के समकालीन लेखकों में नवरत्न रामराय जी, ए. आर. कृष्णशास्त्री जी, शिवराम कारन्त जी, देवुडु, सी. के. वेंकटरामय्या, आनंदकंदा, नरसिंह शास्त्री, रं. श्री. मुगली आदि कहानीकारों को भी याद कर लेना चाहिए। बाद में आनंद लोकप्रिय कहानीकार के रूप में सामने आए। जे. पी. राजरत्न जी ने अच्छी-अच्छी लघु कथाएँ लिखीं। कोड़गिना गौरम्मा, कृष्णकुमार कल्लूर, सी. के. नागराज राव, एल. एस. शेषगिरिराव, चदुरंग, श्रीनिवास हावनूर, मिर्जी अण्णाराय आदि कहानीकारों ने भी अच्छी कहानियाँ लिखीं। त्रिवेणी की राह में एम. के. इन्दिरा, हेच. एस. पार्वती, प्रेमाभट, नीलादेवी, शांतादेवी कणवी आदियों का नाम लिया जा सकता है। गाँवों के कई चेहरों का चित्रण गोरूर रामस्वामी अव्यंगर जी ने बड़ी विशिष्टता के साथ किया है। इनके नाम के साथ बागलोड़ी देवराव, अ. न. कृष्णराय का नाम भी उल्लेखनीय है। प्रगतिशील विचारों को बढ़ाने की दिशा में इन्होंने कई कहानियाँ लिखीं। त. रा. सु., बसवराज कट्टीमनी, निरंजन आदि ने भी कहानियाँ लिखीं। प्रगतिशील कहानीकारों में चदुरंग, एस. अनंतनारायण आदि प्रमुख हैं। नव्य धारा के कहानीकारों में राजलक्ष्मी एन. राव. रामचन्द्र शर्मा, के. सदाशिव प्रमुख हैं। डॉ. यू. आर. अनंतमूर्ति जी की कहानियों में परंपरागत मूल्यों की कसौटी देखी जा सकती है। लंकेश जी की कहानियों में भाषा-शक्ति का निर्वहन बहुत ही सावधानी से निभाया गया है। नव्य धारा के कहानीकारों में शांतिनाथ देसाई, गिरड्डी गोविन्दराज, खासनीस प्रमुख हैं। टी.जी. राघव, के. सदाशिव, जी. एस. सदाशिव, वीरभद्र, श्रीकृष्ण आलनहल्ली, वीणा एलबुर्गी, पूर्णचन्द्र तेजस्वी के पात्रों को समाज के आवरण में देख पाते हैं जिन्हें ये कहानीकार मानो जीवित रूप में सृष्टि करते हैं। बेसगरा हल्ली रामन्ना, देवनूर महादेव की कहानियों में संवाद कम हैं। गत पंद्रह-बीस सालों में वजन की कहानियाँ लिखने वालों में ईश्वरन, वी. च. हित्तलमनि, वरदराज हुयिलगोल, बिन्दु माधव कुलकर्णी, अश्वत्थ, लक्ष्मनराव बेंद्रे, व्यासराय बल्लाल आदि प्रमुख हैं। व्यासराय बल्लाल ने अपनी कहानियों में भारत की आजादी की लड़ाई, देश-विभाजन के बाद के दुखांत का चित्रण और आजादी के बाद की समस्याओं का चित्रण बाखूबी किया है।
Hindu (हिंदू धर्म) (14033)
Tantra (तन्त्र) (1043)
Vedas (वेद) (733)
Ayurveda (आयुर्वेद) (2138)
Chaukhamba | चौखंबा (3455)
Jyotish (ज्योतिष) (1633)
Yoga (योग) (1209)
Ramayana (रामायण) (1311)
Gita Press (गीता प्रेस) (714)
Sahitya (साहित्य) (25416)
History (इतिहास) (9379)
Philosophy (दर्शन) (3706)
Santvani (सन्त वाणी) (2598)
Vedanta (वेदांत) (120)
Send as free online greeting card
Email a Friend
Visual Search
Manage Wishlist