पुस्तक परिचय
किसान अपने अभाव, समस्या, तनाव, कुंठा, पीड़ा व एकाकीपन को, 'गोदान' के होरी की तरह अकेला भोगता हुआ दुनिया से विदा ले लेता है या 'फॉस' उपन्यास के शिबू की तरह खुशहाल जीवन जी पाने की लालसा लिए, आर्थिक तंगी, सामाजिक बंधनों, कटाक्षेपों एवं पारंपरिक संस्कारों की शृंखला में जकड़ा हुआ आत्महत्या जैसी भयावह त्रासदी से गुज़रता है। 21वीं सदी में किसान जीवन को लेकर बहुत कुछ लिखा गया। इधर के कुछ वर्षों में किसान केंद्रित साहित्य को लेकर कुछ पत्रिकाओं ने विशेषांक निकाले । साहित्य में किसान विमर्श पर विश्वविद्यालयों में शोध कार्य होने लगे। इस बीच शोधार्थियों के सामने किसान केंद्रित साहित्य पर समीक्षात्मक एवं शोधपरक लेखन की न्यूनता की समस्या आई। इसी को ध्यान में रखकर हमने किसान केंद्रित साहित्य पर शोधपरक और समीक्षात्मक आलेखों का एक संकलन निकालने की योजना बनाई।
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