पुस्तक परिचय
प्रस्तुत ग्रंथ विज्ञापन की भाषा और अनुवाद में 'विज्ञापन का स्वरूप और विज्ञापनों में अनुवाद की भूमिका 'विज्ञापन का तकनीकी पक्ष और अनुवाद की समस्याएँ', 'आकाशवाणी की भाषा और अनुवाद', 'दूरदर्शन एवं विविध चैनलों के विज्ञापनों की भाषा और अनुवाद, तथा कम्प्यूटर, इंटरनेट और मोबाइल की भाषा और देश की प्रमुख विज्ञापन एजेंसियों और अनुवाद विषयक कुल पाँच अध्यायों में विज्ञापन की भाषा और अनुवाद के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पक्ष का शीर्षक उपशीर्षकवार समुचित रूप में तार्किक विभाजन करते हुए प्रस्तुत विषय का शोधपरक दृष्टि से अवगाहन किया है तथा यथास्थान साक्ष्य/प्रमाण प्रस्तुत करते हुए शोधपरक शैली में विषय का समुचित रूप से विवेचन, विश्लेषण एवं मूल्यांकन प्रस्तुत किया है तथा शोधपरक स्थापनाएँ यथास्थान प्रस्तुत की हैं। डॉ. अहीर ने अंत में उपसंहार के अंतर्गत शोध के समस्त निष्कर्षों को प्रस्तुत किया है। तदुपरांत संदर्भ ग्रंथ सूची प्रस्तुत की है। अतः प्रस्तुत ग्रंथ शोधपरक दृष्टि से सर्वथा मौलिक है तथा नवीन स्थापनाओं की प्रस्तुति करता है। आशा है कि डॉ. प्रभुनाथ रामनरेश अहीर का प्रस्तुत ग्रंथ 'विज्ञापन की भाषा और अनुवाद' विद्वज्जनों को अवश्य पसंद आएगा तथा संबंधित क्षेत्र में इस ग्रंथ का अवश्य स्वागत होगा।
लेखक परिचय
जन्म : 01 जून 1980 जन्म-स्थान : अहंमदाबाद (गुजरात) पिता : श्री रामनरेश यादव शिक्षा : ➤ स्नातकोत्तर अनुवाद डिप्लोमा, गुजरात विश्वविद्यालय अहमदाबाद (गुजरात) > एम.ए., (हिंदी अनुवाद विज्ञान), गुजरात विद्यापीठ अहमदाबाद (गुजरात) > बी.एड, केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा > एम.फिल. हिंदी (अनुवाद प्रौद्योगिकी), स्वर्णपदक, 2009 महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा (महाराष्ट्र) > पी-एच.डी. हिंदी, 2014 सौराष्ट्र विश्वविद्यालय, राजकोट (गुजरात) प्रकाशित पुस्तक : प्रयोजनमूलक प्रशासनिक हिंदी और पारिभाषिक शब्दावली, 2019 संपर्क-सूत्र : 617, बी/25, परमानंद पटेल चाली, विक्रम मिल के सामने सरसपुर, अहमदाबाद - 380018 (गुजरात) दूरभाष : 079-22924086 मोबाइल : 9968661666
आमुख
'वद' धातु में 'अनु' उपसर्ग और 'घ' प्रत्यय के योग से व्युत्पन्न 'अनुवाद' शब्द का सीधा अर्थ है- पुनर्कथन या पुनर्वाचन। संदर्भ के अनुसार 'पूर्वकथन' के समर्थन या पोषण तक इसका अर्थविस्तार हो जाता है। आजकल 'अनुवाद' शब्द अंग्रेजी के 'ट्रांसलेशन' शब्द के पर्याय के रूप में परिनिष्ठित हो गया है। अंग्रेजी कोश के अनुसार 'ट्रांसलेशन' का सीधा अर्थ है 'एक भाषा के पाठ को दूसरी भाषा में व्यक्त करना।' डॉ. नगेंद्र के अनुसार "निकटतम पर्याय शब्दावली और वाक्य विन्यास के द्वारा स्रोत भाषा के मूल पाठ को समय रूप में अर्थात् उसके संपूर्ण प्रतिपादद्य विषय में तथा रूपबंध आदि की यथासंभव रक्षा करते हुए लक्ष्य भाषा में प्रतिष्ठापित करना ही अनुवाद है।" (अनुवाद विज्ञान : सिद्धांत और अनुप्रयोग, हिन्दी माध्यम कार्यान्वय निदेशालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली से 1993, पृ. 79) उन्होंने अपनी इस परिभाषा को निर्दोष न होने पर कार्यसाधक अवश्य माना है। (अनुवाद विज्ञान सिद्धांत और अनुप्रयोग, हिन्दी माध्यम कार्यान्वय निदेशालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली, पृ. 82) अनुवाद के स्वरूप को स्पष्ट करते हुए उन्होंने लिखा है कि अनुवाद पारिभाषिक अर्थ में न विज्ञान है और न कला। इसके अतिरिक्त उसे निश्चित रूप से शिल्प भी कहना तर्कसंगत नहीं होगा। वास्तविक स्थिति यह है कि आधार विषय के अनुसार अनुवाद में इन तीनों ही तत्वों का यथानुपात समावेश रहता है। साहित्यिक अनुवाद विशेष रूप से काव्यानुवाद का अंतर्भाव जहाँ कला में ही हो जाता है, वहीं वैज्ञानिक तथा शास्त्रीय अनुवाद में विज्ञान के आधार तत्वों का प्राधान्य रहता है, जबकि शिल्प का प्रयोग प्रायः सर्वत्र ही मिलता है।
प्रस्तावना
विज्ञापन आधुनिक समाज में मनोवैज्ञानिक रूप से अपना प्रभाव छोड़ता है तथा लोगों को वस्तुओं, मान्यताओं, ब्रांड, जीवनशैली आदि की ओर इतना आकर्षित करता है कि लोग विज्ञापन की वजह से संबंधित वस्तु, विचार या भाव की ओर स्वतः खिंचे चले आते हैं। 'विज्ञापन' आज उपभोक्तावादी संस्कृति में लोगों में तरह-तरह के शौक पालने तथा उन्हें उस वस्तु की ओर आकर्षित बनाए रखने की बड़ी ही आकर्षक, हृदयहारी, विशुद्ध व्यावसायिक स्तर पर किए गए लुभावने प्रयास हैं जो उपभोक्ताओं को विज्ञापित वस्तु की ओर लालायित करके उसे उस वस्तु मात्र की लत डालने में प्रभावी भूमिका निभाते हैं। वैसे 'विज्ञापन' मूलरूप से राजनैतिक अर्थशास्त्र का हिस्सा है पर विश्वविद्यालय के कॉमर्स के पाठ्यक्रम में 'व्यापार संगठन', अर्थशास्त्र के पाठ्यक्रम में पत्रकारिता का अंग है। इस दृष्टि से विज्ञापन चाहे किसी भी क्षेत्र में आएँ पर ये हैं मूलतः विशुद्ध व्यवसायिक प्रक्रिया ही, जिसके लिए प्रसारक, प्रकाशक या मीडिया को भुगतान अनिवार्य रूप से करना होता है। विज्ञापन दृश्य या श्रव्य रूप में होते हैं तथा सूचनात्मकता के अपने आवश्यक गुण के कारण बाज़ार तथा उपभोक्ता वर्ग पर व्यापक प्रभाव डालते हैं। अतः विज्ञापन, कॉमर्स, अर्थशास्त्र, पत्रकारिता, संस्कृति तथा संचार के साथ समाजशास्त्र को भी अपना क्षेत्र बनाते हैं। विज्ञापन का एकमात्र उद्देश्य किसी वस्तु, उत्पाद या सेवा के विक्रय या लाभको बढ़ाना होता है। मार्केटिंग में विज्ञापन की अहम् भूमिका होती है, मार्केटिंग मिक्स के चार प्रमुख बिंदुओं (1) निर्माण, (2) कीमत, (3) प्रमोशन, और (4) वितरण में विज्ञापन मूलतः प्रमोशन का हिस्सा है।
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