पुस्तक परिचय
मेरा मानना है कि कहानी जितनी बनावटीपन से दूर होती है उतनी ही सम्प्रेषणीय और लोकप्रिय बनती है। कहानी में यथार्थ की निर्मिति नहीं की जा सकती अपितु यह तो देखे, भोगे अथवा अनुभव किए हुए का ही व्यक्त रूप होता है। बनाया हुआ यथार्थ अधिक समय तक टिक नहीं पाता अथवा उसमें से यथार्थ की सुगंध नहीं आ सकती। मेरे पहले कहानी संग्रह 'अधूरी नहीं हूँ' की कहानियों की भाँति इस संग्रह की कहानियाँ भी बनावटीपन से दूर यथार्थ की सुगंध से युक्त हैं...।
लेखक परिचय
डॉ. अंजु वेद शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.ए, एम.ए. एम.फिल एवं पी. एचडी उपाधि प्रकाशित पुस्तकें : (1) बोधा के काव्य में लोक संस्कृति (2) रीतिकालीन साहित्य की आलोचना का अध्ययन कहानी संग्रह 'अधूरी नहीं हूँ शीर्षक से पहला कहानी संग्रह प्रकाशित अन्य गतिविधियां : विभिन्न समाचार पत्र एवं पत्रिकाओं में लगभग दो दर्जन लेख प्रकाशित - यूट्यूब पर 'कहानीमाला' नामक चैनल पर विभिन्न स्व रचित एवं अन्य महत्वपूर्ण कहानियों का वाचन
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