'Love Jihad' is not True Love; There is an International Conspiracy Going on in the Name of Love!
भारतमें 'लव जिहाद' की घटनाएं हो रही हैं, ऐसे आरोप अनेक वर्षोंसे लग रहे हैं; परन्तु राष्ट्रीय स्तरपर इसकी चर्चा आरम्भ हुई, 'द केरल स्टोरी' चलचित्रके कारण ! यह चलचित्र केरलकी सच्ची घटनाओंपर आधारित था । तब भी 'सेक्युलर' वादियोंका आक्षेप था कि चलचित्रमें बताए अनुसार वास्तवमें केरलमें 'लव जिहाद' की ३२ सहस्र घटनाएं नहीं हुई हैं ! चलिए कुछ क्षणोंके लिए मान लेते हैं कि ३२ सहस्र घटनाएं नहीं हुईं; परन्तु 'यदि वास्तवमें ऐसी एक भी घटना हुई है, तब भी तो वह अनुचित है।' ज्ञातव्य है कि 'लव जिहाद' के माध्यमसे इस्लाम पंथमें धर्मांतरित होकर 'आइसिस' के आतंकवादी दलमें सम्मिलित होने गई केरलकी ४ युवतियां अब तक अफगानिस्तानमें ही फंसी हुई हैं। इस विषयपर 'लव जिहाद' को झुठलानेपर तुले विरोधक कुछ भी कहनेको तैयार नहीं हैं। मुसलमान वोटबैंक बनाए रखनेके लिए 'सेक्युलर' वादियोंने 'द केरल स्टोरी' चलचित्रका विरोध किया। यहां हमें यह ध्यानमें रखना चाहिए कि जो 'सेक्युलर' वादी 'लव जिहाद' की सच्चाई दिखानेवाला चलचित्र स्वीकार करनेको तैयार नहीं हैं, वे वास्तवमें 'लव जिहाद' की भयावहता कैसे स्वीकार कर पाएंगे ? क्या वे हिन्दू लडकियोंकी रक्षा हेतु कोई प्रयास करेंगे ?
भारतकी हिन्दू लडकियोंको कोई जिहादी प्रेमके जालमें फंसा लेता है और उनसे उनके माता-पिता, संस्कृति, धर्म, अस्तित्व सबकुछ ले लेता है। उन्हें अपने परिवार-देश-धर्म के विरोधमें 'जिहाद' करनेके लिए तैयार किया जाता है, यह कोई सामान्य बात नहीं है! दिल्लीकी साक्षी दीक्षितकी क्रूर हत्या हो अथवा मुंबईकी श्रद्धा वालकरके टुकडे-टुकडे करना हो, यही दिखाई देता है कि इन जिहादियोंको किसी बातका कोई भय नहीं रह गया है। श्रद्धा वालकरकी हत्याके उपरान्त देशमें 'लव जिहाद' की घटनाओंपर गम्भीरतासे चर्चा होने लगी ।
श्रद्धा वालकरकी हत्या एकमात्र प्रकरण नहीं है। इससे पूर्व और इसके पश्चात भी निधि गुप्ता, अंकिता सिंह, निकिता तोमर, काजल, मानसी दीक्षित, तनिष्का शर्मा, खुशी परिहार, वर्षा चौहान, हिना तलरेजा आदि सैकडों हिन्दू युवतियोंके साथ भी इसी प्रकारकी क्रूरता हुई है। अनेक लडकियोंके शव बंद सूटकेसमें मिले हैं। अनेक लडकियोंका जीवन नष्ट हो गया है; परन्तु तब भी प्रतिदिन सैकडों लडकियां इस प्रेमजालमें फंसकर अपना जीवन नष्ट कर रही हैं। भारतके अनेक राज्योंमें धर्म-परिवर्तनके विरोधमें कानून बनाए गए हैं; परन्तु ये कानून इन 'लव जिहाद' की घटनाओंको रोकनेमें सक्षम सिद्ध नहीं हो पाए हैं।
एक ओर सेक्युलरवादियोंका दावा है कि 'लव जिहाद मात्र कल्पना है', 'यह अस्तित्वमें ही नहीं है'; परंतु प्रत्यक्षमें हिन्दू युवतियोंका प्रेमजाल में फंसना, धर्मान्तरण कर मुसलमान बनना, हत्या, बलात्कार, ऐसी घटनाएं प्रतिदिन सामने आ रही हैं। तो यह विरोधाभास क्यों है ? इस संदर्भमें वास्तविकताका तथा कुछ तथ्योंका अवलोकन करना आवश्यक है ।
'लव जिहाद' हिन्दू धर्म एवं राष्ट्र के विरुद्ध एक अघोषित युद्ध ही है। इस षड्यन्त्रमें हिन्दुस्थानके शत्रुराष्ट्र 'पाकिस्तान' का भारी मात्रामें योगदान है। यह सर्वज्ञात है कि भारतकी गोपनीय जानकारी हस्तगत करने हेतु हिन्दुस्थानके दूतावासमें उच्च पदपर आसीन गुप्तचर महिला अधिकारी माधुरी गुप्ताको पाकिस्तानके सेनाधिकारीने प्रेमपाशमें फंसाया था । अर्थात, 'लव जिहाद' के रूपमें यह प्रच्छन्न युद्ध, प्रत्यक्ष आतंकवादी आक्रमणसे भी भयानक है। इस राष्ट्रव्यापी समस्याका सर्व प्रकारसे विश्लेषण करनेका प्रयास इस पुस्तकमें किया है।
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