पुस्तक परिचय
अभिनंदनः कुशल चिकित्सक का सहज स्वभाव और मधुर व्यवहार-विशेषता है डॉ. त्रिलोकी नाथ पडिय की। वह अनुभवी और योग्य चिकित्सक हैं। सदा ही सेवा भावना से चिकित्सा का कार्य वह करते रहे हैं। एक कुशल और सफल चिकित्सक के सभी गुण उनमें हैं। इसके हैं। इसके साथ ही कई असाध्य रोगों पर शोध करते रहना और रोगियों के हाथ में विश्वास की नई मशाल दे देना उनकी विशिष्ट उपलब्धि रही है। यही कारण है कि जो भी उनके सम्पर्क में आता है, स्वस्थ हो जाता है। फिर किसी अन्य चिकित्सक के पास जाना भी उसे भाता नहीं। डॉ. पांडेय की योग्यता इससे भी प्रकट है कि उन्हें आग्रह पूर्वक दक्षिण अफ्रीका बुलाया गया और कई बरस वहां रहकर उन्होंने आयुर्वेद चिकित्सालय की स्थापना की तथा कितने ही युवा वैद्य तैयार किए। आज अधिकतर स्त्री-पुरुष दबाव और तनाव के परिवेश में जीवन जीते हैं। भाग-दौड़ और गहमागहमी बहुत है। कोई शांति से जीवन बिताना चाहे, तो भी समाज ऐसा करने नहीं देता। इससे मानसिक रोग अधिक होते हैं। जुकाम, खांसी, बुखार की तरह मानसिक रोग नहीं होते। उनमें अक्सर रोगी का संतुलन गड़बड़ा जाता है। रोग बढ़ता है तो उग्र हो उठता है। मन के रोगों की चिकित्सा के लिए रोगी और डॉक्टर-दोनों में बहुत धैर्य होना चाहिए। एलोपैथी में इन रोगों का सही इलाज नहीं है। प्रायः इन्हें दवाओं से दबाया जाता है। आयुर्वेद में हमारे ऋषियों ने कभी अमृत घोला था यानी उसे जीवन-चिकित्सा बनाया था। डॉ. त्रिलोकी नाथ पांडेय की कृति आयुर्वेद के माध्यम से मन के रोगों की चिकित्सा पर विस्तार से मार्गदर्शन करती है। आज के परिवेश में यह एक अनमोल कृति बन गई है।
लेखक परिचय
डॉ. त्रिलोक नाथ पाण्डेय जन्म : ग्राम सेमरी (जनपद कबीरनगर) प्रारम्भिक शिक्षा बस्ती में हुई। बाद में तिबिया कॉलेज से आयुर्वेदाचार्य किया। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में मन के रोगों पर शोध कार्य किया और पी. एचडी की उपाधि प्राप्त की। राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, वाराणसी, अखिल भारतीय चिकित्सा संस्थान, नई दिल्ली तथा केन्द्रीय आयुर्वेद अनुसंधान परिषद में कार्यरत रहे। सन् 1996 में आयुर्वेद तथा पंचकर्म के प्रचार-प्रसार के लिए दक्षिण अफ्रीका गए। पांच वर्ष तक वहां रहकर चिकित्सा के अलावा जड़ी-बूटियों पर अनुसंधान भी किया। मन तथा मस्तिष्क रोगों की चिकित्सा के विशेषज्ञ । अपस्मार अर्थात एपिलिप्सी पर विशिष्ट अनुसंधान किया तथा मोनोग्राफ भी लिखा। सम्प्रति-अपने चिकित्सालय में विविध रोगों का निदान एवं परामर्श।
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