"Those who were fighting for their rights, called Naxalites"
नक्सलवाद से सभी लोग परिचित हैं। संक्षेप में कहें तो भ्रष्टाचार, न सामाजिक शोषण, अन्याय, अत्याचार, ऊँच-नीच का भेदभाव और सामंतशाही के खिलाफ साम्यवाद-माओवाद विचारधारा से प्रेरित सशस्त्र संघर्ष को ही नक्सलवाद कहते हैं। इसकी शुरुआत सन 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी गाँव में हुई थी।
गाँव के शोषित लोगों द्वारा सामंतों के विरुद्ध प्रतिशोध की घटना से जन्मी यह मुहिम प्रारम्भक दिनों में बिहार के कुछ जिलों में नक्सलवाद बनाम जातीय संघर्ष का रूप ले लिया। सन् 2001 में गुरूदेव श्री श्री रविशंकर जी के प्रयास से यह जातीय सामूहिक हत्याओं का खूनी संघर्ष पूर्णतया खत्म हो गया, किन्तु तब तक नक्सल गलियारे में नक्सलवाद का नया रूप माओवादी कम्युनिस्ट सेण्टर (एम. सी. सी.) अस्तित्व में आ गया। सन् 2004 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इण्डिया (मार्क्सवादी लेनिनवादी) एम.सी.सी. और पीपल्स वार ग्रुप (पी. डब्ल्यू. जी.) के विलय से कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इण्डिया (माओवादी) नाम के नए संगठन ने जन्म लिया।
इस संगठन में हिंसक क्रांति के साथ माओवादी विचारधारा भी शामिल थी। एक अनुमान के मुताबिक यहीं से माओवादी देश चीन का प्रवेश होता है, और इस चीन प्रायोजित हिंसक क्रांति में भारतीय साम्यवादी, अरबन नक्सल के रूप में संगठन के थिंक टैंक बन कर शामिल हो गए। इनके प्रचार तंत्र ने विचारधारा का ऐसा प्रचार किया कि गाँवों में "चीन का चेयरमैन हमारा चेयरमैन" के नारे लगने लगे।
1966 में चीनी राष्ट्रपति माओत्से तुंग ने जिस "सांस्कृतिक क्रांति' की शुरुआत की थी, सन 1967 में भारतीय साम्यवादी नेता चारू मजूमदार, कानू सान्याल, जंगल सांथल आदि ने उसी "हिंसक सांस्कृतिक क्रांति" की संस्कृति को नक्सलबाड़ी में प्रयोग किया। इस प्रकार देखा जाए तो नक्सलवाद चीन की सांस्कृतिक क्रांति का भारतीय रूप है। चीन की इस क्रांति में 20 लाख लोोगें को मारा गया था। चीन की सांस्कृतिक क्रांति 1976 में अध्यक्ष माओत्से तंग की मृत्यु के साथ खत्म हो गई थी। भारत में सन 2009 तक नक्सलवाद अपनी चरम सीमा पर पहुँच चुका था। भारत के कुल 766 जिलो में से 10 राज्यों में फैले 180 जिले नक्सलवाद से प्रभावित थे।
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नक्सलवाद को देश की आन्तरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताया था। सन् 2009 में परिस्थितियाँ ही ऐसी थीं कि कोई नहीं कहता था कि नक्सलवाद खत्म होगा। उन हालात में गुरुदेव ने झारखण्ड मीडिया को चुनौती दी कि "हाँ, जिस भी अभियान में हमने हाथ डाला है, उस में सफल रहा हूँ। इस अभियान में भी सफल रहूँगा, नक्सलवाद खत्म होगा। मैंने उनको (नक्सलवादियों को) बता दिया है कि बुलेट छोड़ कर बैलेट पर आओ। ऐसा ही होग, अब सब ठीक हो जाएगा।"
झारखण्ड राज्य अपनी भौगोलिक स्थिति एवं सामाजिक आर्थिक विषमता के कारण नक्सल रेड कॉरिडोर का प्रवेश द्वार बन गया था। यहाँ का आदिवासी, दलित एवं पिछड़ा समाज जमींदारों, सामंतों एवं धनाढ्य उच्च जातियों के कुचक्रों में फँस कर त्रस्त था, आक्रोशित था। जंगलों से आच्छादित होने के कारण झारखण्ड भारत का सबसे अधिक नक्सल प्रभावित राज्य था। समय-समय पर राजनीजिक संरक्षण भी प्राप्त था। राज्य के पश्चिमोत्तर में स्थित पलामू प्रमण्डल का लातेहार जिला नक्सल रेड कॉरिडोर का बॉटलनेक' था।
मेरी न्यायाधीश के रूप में प्रथम नियुक्ति 1990 में बिहार के गया जिले में हुई थी। गया जिले में नक्सलवादी-जातीय खूनी संघर्ष की सामूहिक हत्याओं की घटनाओं को प्रत्यक्ष देखा था। अतः हम पति-पत्नी नक्सलवाद क्या है; क्यों है, इसके प्रभाव क्या हैं; इत्यादि के बारे में विस्तार से जानते थे। विद्यार्थी जीवन में छात्र राजनीति में थे, अतः साम्यवाद से खूब परीचित थे।
Hindu (हिंदू धर्म) (13842)
Tantra (तन्त्र) (1021)
Vedas (वेद) (738)
Ayurveda (आयुर्वेद) (2111)
Chaukhamba | चौखंबा (3226)
Jyotish (ज्योतिष) (1615)
Yoga (योग) (1178)
Ramayana (रामायण) (1319)
Gita Press (गीता प्रेस) (721)
Sahitya (साहित्य) (24990)
History (इतिहास) (9169)
Philosophy (दर्शन) (3661)
Santvani (सन्त वाणी) (2604)
Vedanta (वेदांत) (120)
Send as free online greeting card
Email a Friend
Visual Search
Manage Wishlist