लेखक परिचय
डॉ. कुमार परिमलेन्दु सिन्हा जन्म : लौरिया, पश्चिम चंपारण, बिहार, 21 सितंबर 1965 शिक्षा: एम.ए. (हिंदी), पीएचडी (हिंदी) जूनियर रिसर्च फेलो (यूजीसी) माध्यमिक शिक्षा : सी. के. हाई स्कूल, लौरिया, पश्चिम चंपारण, बिहार उच्च शिक्षा : पटना कॉलेज, पटना तथा स्नातकोत्तर हिंदी विभाग, पटना विश्वविद्यालय संप्रति : भारतीय रिज़र्व बैंक, नई दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय में महाप्रबंधक के पद पर पदस्थापित । भारतीय रिज़र्व बैंक में नियुक्ति के पूर्व राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार में कार्यरत प्रकाशित पुस्तकें : वित्तीय समावेशन और उसमें हिंदी की भूमिका, चुप्पियों के बीच का अंतराल (कविता संग्रह) कविताएँ, कहानियाँ, समीक्षा और बैंकिंग आर्थिक विषयों पर शोधपरक आलेख देश-विदेश की अनेक सुप्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित
पुस्तक परिचय
इतिहास बोध और काल बोध का चेतनशील संबध भारतीय इतिहास दर्शन की आधारशिला है। भारतीय परंपरा में प्रवहशीलता का प्रत्यग्र अनुभव करते हुए भी उसके अतिक्रमण का दर्शन होता है। भारतीय जीवन पद्धति में काल की अवधारणा दो रूपों में सार्थक रूप ग्रहण करती है। एक तो प्रतिक्षण आवर्तमान काल जो कभी अशेष नहीं होता, निरंतर पूरा होता रहता है, इसलिए वर्ष, वत्सर, अब्द, ऋतु जैसे शब्द जो कालावधि वाचक है, प्रवाहात्मक अर्थ पर बल देते हैं। काल का दूसरा रूप निरवधि काल जो अखंड होता है। पहले रूप से दूसरे रूप को जोड़ना ही साधना है। इतिहास बोध का संबंध काल बोध से है। इतिहास बोध का अर्थ इतिहास में निहित उसकी अंतर्चेतना का ज्ञान है। यह एक ऐसी चेतना होती है जो हमें अपने इतिहास, अतीत को वर्तमान में, समकालीन परिस्थितियों के परिप्रेक्ष्य में पुनः प्रस्तुत करने को प्रेरित करती है। यह पुनर्प्रस्तुतीकरण इतिहास को दोहराना मात्र नहीं है, अपितु इतिहास से कुछ सीखने, अतीत को भोगकर प्राप्त की गई वर्तमान ज्ञानात्मक और संवेदनात्मक चेतना के माध्यम से अतीत का पुनर्विश्लेषण और पुनर्मूल्यांकन उस इतिहास बोध का अंश है।
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