लेखक परिचय
डॉ० किशोर पवार गत अड़तालिस वर्षों से मराठा विद्या प्रसारक समाज नासिक इस अग्रगण्य शैक्षणिक संस्था में प्राणिशास्त्र विषय के छात्रप्रिय, व्यासंगी अध्यापक व कुशल अनुशासन प्रिय प्रशासक के रूप में सुपरिचित हैं। आपने पुणे विश्वविद्यालय से कीटाणु विज्ञान विषय में एम०एस-सी० (1974) तथा पर्यावरण शास्त्र पर तीन वर्षों में पी-एच०डी० की उपाधि (1984) प्राप्त की। अनुसंधान हेतु आपको विश्वविद्यालय अनुदान आयोग नयी दिल्ली द्वारा तीन वर्षों के लिए अध्यापक शिष्यवृत्ति मिली थी। राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में आपके 16 शोध-प्रपत्र प्रकाशित हुए हैं। सिनसिनाटी (अमेरिका) की अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण परिषद् में आपने शोध प्रपत्र का पठन भी किया था। डॉ० किशोर पवार विज्ञान लेखक के नाते भी सुपरिचित हैं। गत तीस वर्षों से आपने अनेक जाने-माने समाचार पत्रों, साप्ताहिक, मासिक पत्रिकाओं में निरंतर विज्ञान लेखन किया है। आकाशवाणी पुणे, जलगाँव व नासिक केन्द्रों से आपके अनेक व्याख्यान, नभोनाट्य प्रसारित हुए हैं। विज्ञानस्थित रहस्य, अद्भुत जीवसृष्टि आदि की जान पहचान सामान्य मानव को होनी चाहिए, इस हेतु आपके निरंतर प्रयत्न जारी हैं। आपकी विज्ञान विषयक अनेक पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। पुणे, शिवाजी व उत्तर महाराष्ट्र विश्वविद्यालय जलगाँव के लिए प्राणिशास्त्र पर 25 क्रमिक पुस्तकें प्रकाशित हुयी हैं। विज्ञान का प्रसार हो, समाजस्थित अनिष्ट रूढियाँ, परंपराएँ, अंधश्रद्धा नष्ट हो, वैज्ञानिक दृष्टिकोण वृद्धिगत हो इस हेतु आप अंधश्रद्धा निमूर्लन समिति में कार्यरत हैं। आप पुणे विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य भी रह चुके हैं। महाराष्ट्र शासन ने 'आदर्श अध्यापक' का पुरस्कार देकर आपको इसी वर्ष सम्मानित किया है। पुणे विश्वविद्यालय ने आपको 'सर्वोत्तम प्राचार्य' पुरस्कार से सम्मानित किया है। आप वर्तमान में कर्मवीर शांतारामबापू कोंडाजी वावरे कला, विज्ञान एवं वाणिज्य महाविद्यालय, सिडको, नासिक-422 008, (महाराष्ट्र) में प्राचार्य के पद पर कार्यरत है।
पुस्तक परिचय
हमारी धरती पर अनगिनत किस्म के जीव-जन्तु मौजूद हैं। प्रत्येक जीव- जन्तु अपनी वंशवृद्धि के लिए संघर्ष करते हैं। ये सब जीव अलग-अलग ढंग के पर्यावरण में एक साथ मिल जुलकर रहते हैं। वैसे बदलाव निसर्ग ने उनमें किए हैं ताकि वे सुखचैन से जिंदगी गुजारें। उस बदलाव को ही समायोजन कहते हैं। उन जन्तुओं बारे में रोचक तथा मनोरंजक जानकारी प्रस्तुत पुस्तक में दी गयी है। साड़े चार अरब वर्ष पूर्व अपनी धरती का जन्म हुआ और बाद में उस पर सजीव-जीव सृष्टि का उदय हुआ। सौर कुल में अपनी धरती ऐसा ग्रह है कि जिस पर जीव सृष्टि का अस्तित्व है। विविधता से घटी हुई प्राणि-सृष्टि निसर्ग की एक अनमोल सम्पत्ति है। प्राचीन काल से धरती ने नैसर्गिक आपत्तिओं का सामना किया है, वातावरण के बदलाव, भूकम्प, ज्वालामुखी, हिमपात और मानव का निसर्ग पर होने वाले हस्तक्षेप तथा अतिक्रमण के कारण हजारों जीव-जन्तु नामशेष हो गये हैं। शहरी निसर्ग कोप से सागर सम्राट ट्रायलो बाइट्स और भूतल पर रहने वाले महाकाय डायनोसॉर्स हमेशा के लिए नामशेष हो गये हैं। अनेक पशु पक्षिओं की प्रजातियाँ भी नामशेष हो गर्मी, आज कई पशु पंक्षिओं के सिर्फ जीवाश्म बचे हैं। निसर्ग और मानव ने नामशेष किए विविध किस्म के जीव-जन्तुओं की मनोरंजक कहानी पाठकों को अवश्य पसंद आयेगी।
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