राहुल की श्रन्नः संवेदना भानव है, मानवना की समृद्ध करना है। उनका पूरा साहित्य प्रगतिशील मन्त्री पर आधारिन है। वे लगातार भारतीय समाज की संरचना, जानि, वर्ण और वर्ग की विशिष्टना एवं शोषण के विभिन्न रूपों की जटिलता आदि'सवालों से जूनने रहे। उनकी रचनात्मकना तीन बिन्दुओं पर एक साथ सक्रिय दिखाई देती है। एक तरफ वह जीवन और समाज को बैज्ञानिक दृष्टि से पड़नाल करती है, दूसरी तरफ वह जीवन में हस्तक्षेप करते हुए आम जनता की सांस्कृतिक जगरन को पूरा करने की जिम्मेदारी निभाती है। तीसरी और वह जन साहित्य की परम्यरा को समृद्ध करती है। राहुल ने इतिहास लेखन को महत्त्वपूर्ण स्वीकार किया है। उनका यह मानना है कि इतिहास की तहों तले ही मानव विकास के वास्तविक सूत्र छिपे हैं। इस कार्य के लिए सन्तुलित इतिहास दृष्टि की आवश्यकता है। राहुल की सम्पूर्ण रचनात्मकता के मूल में यही दृष्टि काम करती है। राहुल साहित्य - दर्शन और यात्रा वृनान्तों में भी मानवीय सृजनशीलता की विकास - यात्रा रेखाकित करते हैं। उनके इतिहास ग्रंथों में राजाओं-रानियों और दरबारों की कथाएँ नहीं, उस समय के समाज की बहु - आयामी तस्वीर मिलनी है। राहुल का नाम उन साहित्यकारों में सटा लिया जाऐगा जिन्होंने भारतीय नवजागरण के कार्य में अपना योगदान दिया। राहुल ने देश-विदेश की यात्राओं के अपने जीवनानुभव को अपनी कृतियों में पिरोया। उन्होंने भारत की सक्रिय राजनीति में भाग लिया, कई बार जेल गये एवं स्वतन्त्रता संग्राम में अपना भरपूर योगदान दिया। इतने व्यस्त जीवन में उन्होंने जिस संख्या और परिमाण में साहित्य रचना की यह उन जैसे प्रतिभाशाली और अध्यवसायी व्यक्ति द्वारा ही सम्भव थ
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