लेखक परिचय
एम.वी.आर.शास्त्री लोक जागरण का अलख जगाने एवं सामाजिक रूपान्तरण की प्रक्रिया को त्वण प्रदान करने वाले प्रख्यात सम्पादक एम.वी.आर.शास्त्री ने अनेक अज्ञात एवं अनछुए विषयों पर प्रामाणिक एवं संग्रहणीय कृतियाँ दी हैं जिनके अध्ययन से लेखक की मौलिक प्रतिभा की ऊर्जा से पाठक ऊष्णता प्राप्त करता है और कई अवसरों भर सामाजिक, सांस्कृतिक तथा राजनीतिक चेतना के स्तर पर पाठक अपने ज्ञान की श्री वृद्धि करने में गौरव का अनुभव करता है। तेलुगु भाषा में पत्रकारिता जगत् को समृद्ध करने वाले ईनाडु में एम.वी.आर. शास्त्री ने तेरह वर्ष तक सम्पादन के क्षेत्र में कई पदों में सफलतापूर्वक कार्य किया फिर घनीभूत अनुभव सम्पदा ले आप "आन्ध्र सभा दैनिक" में उप सम्पादक के पद पर प्रतिष्ठित हुए, चार वर्ष के उपरान्त दिसम्बर 1994 में आप आन्ध्रभूमि दैनिक के सम्पादक बने। नौ वर्ष से अधिक समय तक लोकप्रिय स्तम्भ "उन्नमाटा" अर्थात् "जो बात है" और छह वर्ष से अधिक समय तक "वीक पॉइन्ट" अर्थात् "कमज़ोर कड़ी" निपुणता से लिख रहे हैं। तीन दशक में अपने सैकड़ों सम्पादकीय अग्रलेख तथा ललित निबन्ध लिखे हैं- कश्मीर कथा के अतिरिक्त उन्नमाटा (जो बात है) एवं एदी चरित्रा (इतिहास कहाँ है?) आपकी बहुचर्चित कृतियाँ हैं।
पुस्तक परिचय
डॉ. भगवानशरण भारद्वाज जन्म-12 जनवरी, 1946, सिसौना, बरेली। शिक्षा-एम. ए. (हिन्दी-संस्कृत), साहित्याचार्य, साहित्यरत्न, पी-एच.डी. कृतियाँ-नवगीतःसर्जन और समीक्षा (सम्पादन), हिन्दी जीवनी-साहित्यः सिद्धान्त और अध्ययन (शोध-प्रबन्ध), सूर-काव्य का आस्वादन (आलोचना), हिन्दी साहित्य का विवेचनात्मक इतिहास (इतिहास), राम बिना मोरी सूनी अयोध्या (निबन्ध), कवीर सौरभ (आलोचना) विश्व की विभूतियाँ (जीवनी-साहित्य), कर्मयोग (दर्शन), राभायण-कथा (संस्कृति), भारत के योगी, योग के चमत्कार, आँसू और शोले (काव्य)। इनके अतिरिक्त सूर-मन्देभं तुलसी-वाङ्मय-विमर्श, प्रेमचन्द साहित्य-कोश आदि ग्रन्थों में लेख, टिप्पणी आदि तथा 'पल्लवों की ओट' एवं धुएं की लकीरें में चक्रपाणि नाम से कुछ कविताएं प्रकाशित। सम्पादित पत्रिकाएं-पांचाली तथा शोधस्वर (अर्ध-वार्षिक), ग्वालबाल तथा युवामन (मासिक), इसके अतिरिक्त विश्वात्मा, रसवन्ती, समीक्षा, सरस्वती, प्रकर, मधुमती, वीणा, प्राच्यभारती, नवनीत, संस्कृति, मानस-चन्दन, राष्ट्रधर्म, हितवाणी, पांचजन्य, कल्याण, प्रज्ञा, विश्वज्योति आदि हिन्दी पत्रिकाओं तथा सम्विद् सरस्वती-सौरभ, पारिजात, दिव्यज्योति, विश्वसंस्कृतम् आदि संस्कृत पत्रिकाओं में तीन सौ से अधिक आलेख, कहानियाँ तथा कविताएं प्रकाशित। शोध-निर्देशन-एक दर्जन शोधार्थियों को पी-एच. डी. प्राप्त, लगभग इतने ही अनुसंधान-रत। अन्य दायित्व-भारत संस्कृत-परिषद्, प्रज्ञा-भारती, विद्याभारती तथा रा. स्व. संघ के विविध दायित्वों का सक्रिय निर्वाह, शिक्षक संघ में भी सक्रियता।
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