पुस्तक के विषय में
'खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी' स्वाधीनता संग्राम में जिन लोगों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया उनमें महारानी लक्ष्मीबाई का नाम उल्लेखनीय है।
अंग्रेजों से युद्ध करते हुए उन्होंने अपना जीवन बलिदान कर दिया और अंत तक हार नहीं मानी।
राष्ट्र की रक्षा के लिए जीवन उत्सर्ग की ऐसी मिसाल बहुत कम मिलती है। महारानी लक्ष्मीबाई से संबंधित ऐतिहासिक और विश्वसनीय घटनाओं को डा. शशि शर्मा ने रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है।
प्रस्तावना
'खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी ।' देश की आजादी ओर उस आजादी को पाने के लिए जो लडाई लड़ी गई थी, उसकी बात छिड़ते ही यह पंक्ति अपने आप हमारी जुबान पर उभर आती हे मन में गौरव का अनुभव होता है कि पुरुषों की तरह लडने वाली रानी लक्ष्मीबाई हमारे देश में जन्मी थीं वास्तव मे देखा जाए तो किसी भी देश का इतिहास ऐसी ही महान विभूतियों से जीवित रहता है
रानी लक्ष्मीबाई 'भारत की महान नारियां' श्रृंखला की दूसरी कड़ी है लक्ष्मीबाई का नाम इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा हुआ हे इस पुस्तक को लिखते समय सामग्री की प्रामाणिकता एक बड़ी चुनोती थी, क्योंकि लक्ष्मीबाई का नाम घर-घर में रम गया है। इसलिए उनके बारे में बहुत-सी बातें, घटनाए, अलग-अलग रूपों में मिलती हैं इनमें मैंने कुछ खास बातो का ध्यान रखा है, जेसे जिन घटनाओं का उल्लेख किया जाए वे ऐतिहासिक ओर विश्वसनीय हों, भाषा आम बोलचाल की हो और उन्हें ऐसे सरल, रोचक रूप में प्रस्तुत किया जाए जिससे वे एक ओर कथा की तरह पाठकों का बांधे रखें ओर दूसरी ओर इतिहास की तरह जानकारी भी दे इस रूप में यह कोशिश कितनी सफल रही हे, यह पुस्तक रूप में आपके सामने है।
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