पुस्तक परिचय
गुरु तेगबहादुर जी भारत के इतिहास में धर्म की रक्षा हेतु बलिदान देने वाले पहले महापुरुष माने जाते हैं। उन्होंने न केवल हिन्दुओं की धार्मिक स्वतंत्रता के लिए प्राणों की आहुति दी बल्कि संपूर्ण मानवता को आस्था की स्वतंत्रता के प्रति जागृत किया। गुरु जी के सर्वोच्च बलिदान को भारतीय राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक अस्मिता के एक सशक्त प्रतीक के रूप में देखा जाता है। डॉ. रामप्रकाश की यह पुस्तक गुरु तेगबहादुर जी के जीवन और उनके बलिदान की गाथा को प्रस्तुत करती है। यह केवल एक ऐतिहासिक जीवनी नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक आत्मा, उसकी वैचारिक गहराई और संघर्षशीलता की पहचान है। यह पाठकों को अपने इतिहास पर गर्व करने का अवसर देती है, और उन्हें अपने वर्तमान और भविष्य को नैतिकता, सहिष्णुता और साहस के आधार पर गढ़ने की प्रेरणा भी देती है।
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