प्रस्तावना
ईश्वर की सृष्टि और सजीव एवं निर्जीव वस्तुओं के विकास क्रम में मनुष्य सर्वोच्च स्थान पर है। विवेक और स्वतंत्र इच्छाशक्ति से संपन्न मनुष्य आत्म-विकास के शिखर तक पहुँचने और अंततः मोक्ष प्राप्त करने के लिए अद्वितीय रूप से सक्षम है। वैदिक ऋषियों ने इस संभावना को देखा और जीवन जीने के लिए विचारों और मूलभूत अवधारणाओं का एक समूह विकसित किया, जिससे मनुष्य मोक्ष के इस लक्ष्य को प्राप्त कर सके। उन्होंने कुछ आदर्शों और सिद्धांतों पर आधारित जीवन शैली का प्रस्ताव रखा। इन्हें सामूहिक रूप से सनातन धर्म के नाम से जाना जाता है। प्राचीन काल से ही भारतीय समाज सनातन धर्म के सिद्धांतों का पालन जीवन शैली के रूप में करता आया है। यद्यपि पिछले 600 वर्षों में राजनीति में आए व्यापक परिवर्तनों और विदेशी आक्रमणों का समाज पर प्रभाव पड़ा है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण मैकाले के नेतृत्व में अंग्रेजों द्वारा भारतीय परंपराओं और मूल्यों पर आधारित पूर्ववर्ती शिक्षा प्रणाली को अंग्रेजी प्रणाली से प्रतिस्थापित करने के लिए उठाए गए कदम थे। यह ताबूत में आखिरी कील थी, और भारतीय समाज की आने वाली पीढ़ियों को सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों को प्रत्यक्ष रूप से सीखने का अवसर नहीं मिला। भारत की स्वतंत्रता के बाद स्थिति और भी खराब हो गई, क्योंकि नेहरूवादी संस्कृति का दृष्टिकोण पश्चिमी देशों के पक्षधर था। इन विचारों का औपचारिक परिचय अब शिक्षा प्रणाली में उपलब्ध नहीं है। सनातन धर्म के सिद्धांतों को अपने बच्चों तक पहुँचाने का मार्ग माता-पिता पर ही आ गया है। चूंकि समाज दोहरी आय वाले एकल परिवारों में परिवर्तित हो रहा है, इसलिए हमारी युवा पीढ़ी को सनातन धर्म की शिक्षा देने के अवसर कम होते जा रहे हैं। इसी कारण युवा पीढ़ी सनातन धर्म के विषय में दुविधा में है। हालांकि सनातन धर्म शब्द काफी परिचित है और चर्चा का एक आम विषय है, फिर भी इस विषय पर स्पष्टता की कमी है। इसलिए, आज हम या तो इस विषय से अनभिज्ञ हैं या गलत जानकारी रखते हैं। हालांकि, हाल ही में, युवा पीढ़ी में सनातन धर्म के बारे में अधिक जानने की रुचि बढ़ रही है। सनातन धर्म के सच्चे साधकों को इस विषय पर अपनी समझ को सुदृढ़ करने और अपने विश्वास को मजबूत करने में सहायता करने के लिए, इस पुस्तक में इन प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास किया गया है। यह पुस्तक सनातन धर्म के अंतर्गत आने वाले महत्वपूर्ण विषयों को अलग-अलग अध्यायों में संकलित करके इस आवश्यकता को पूरा करती है। पुस्तक में सनातन धर्म की संपूर्ण चर्चा प्रश्न-उत्तर प्रारूप में की गई है। इससे यह समकालीन, सुगम और स्पष्ट हो जाती है। मुझे आशा है कि पाठकों को यह उपयोगी लगेगी। यह पुस्तक अंग्रेजी संस्करण का हिंदी अनुवाद है। प्रकाशकों ने पुस्तक को पठनीय प्रारूप और उच्च गुणवत्ता में प्रकाशित करने में उत्कृष्ट कार्य किया है। इसके लिए हम उनके आभारी हैं। हमने अपनी जानकारी के अनुसार विषयों को यथासंभव प्रस्तुत किया है। यदि कोई चूक रह गई हो, तो यह पूरी तरह हमारी सीमा है। भविष्य के संस्करणों में किए जा सकने वाले संभावित सुधारों के बारे में पाठकों से सुझाव प्राप्त करके हमें प्रसन्नता होगी।
लेखक परिचय
बी. महादेवन ने भारतीय प्रबंधन संस्थान, बैंगलोर (आई.आई.एम. बैंगलोर) में ३२ वर्षों से अधिक समय तक प्रोफेसर के रूप में कार्य किया। इससे पहले, महादेवन ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, चेन्नई (आई.आई.टी. मदास) से औद्योगिक प्रबंधन में उत्पादन इंजीनियरिंग में बी.ई. की डिग्री प्राप्त की, जिसके बाद उन्होंने पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। महादेवन ने 2016-18 तक विन्मय विश्वविद्यालय के पहले कुलपति के रूप में कार्य किया। उन्होंने प्रबंधन के क्षेत्र में कई पुस्तकें लिखी है। उन्होंने भारतीय और विदेशी विश्वविद्यालयों में अध्यापन कार्य किया है। उन्होंने भारत की विभिन्न व्यावसायिक कंपनियों और केंद्र सरकार के सलाहकार के रूप में भी कार्य किया है। महादेवन ने भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और भगवद गीता सहित कई विषयों पर शोध किया है और पुस्तकें लिखी हैं। उन्होंने छात्रों और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए प्रबंधन और भारतीय संस्कृति पर पाठ्यक्रम संचालित किए हैं। उन्होंने यूट्यूब पर "प्रेक्टिकल वेदांत संवाद' के माध्यम से अपने विचार विस्तार से साझा किए हैं।
पुस्तक परिचय
ग्राचीन काल से ही भारतीय समाज सनातन धर्म के सिद्धांतों को जीवन शैली के रूप में अपनाता रहा है। इन विचारों का औपचारिक विषय अब शिक्षा प्रणाली में उपलब्ध नहीं है। बच्चों को सनातन धर्म के सिद्धांतों से अवगत कराने का मार्ग खोजना माता-पिता का कर्तव्य है। सनातन धर्म शब्द भले ही परिचित से और आम बोलवाल का विषय हो, लेकिन इस विषय पर स्पष्टता की कमी है। इसलिए, आज रूम या तो इस विषय के बारे में पूरी तरह से अनभिज्ञ हैं या गलत जानकारी रखते हैं। हालांकि, हाल ही में युवा पीढ़ी में सनातन धर्म के बारे में अधिक जानने की रुवि बढ़ रही है। यह पुस्तक सनातन धर्म के अंतर्गत आने वाले महत्वपूर्ण विषयों को अलग-अलग अध्यायों में संकलित करके इस आवश्यकता को पूरा करती है। पुस्तक में सनातन धर्म की पूरी चर्चा प्रश्न-उत्तर प्रारूप में की गई है। इससे यह समकालीन, सुगम और स्पष्ट बन जाती है।
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