पुस्तक परिचय
जल पृथ्वी पर सबसे महत्वपूर्ण और अनमोल संसाधन है। हमारे पूर्वजों ने यह सच्चाई समझी थी और इसी कारण से वे जल को संगीत, पवित्रता और जीवनदायी तत्त्व के रूप में पूजते थे। जल हर जीवित जीव के लिए आवश्यक होता है, समस्त प्राणियों के जीवन में इसका महत्त्व अपार है। जल की महत्ता के बारे में अधिक जानने के लिए हमें जल के प्रभाव, जल प्रदूषण, हिमाचल प्रदेश की प्रमुख नदियाँ, जलवायु परिवर्तन का जल संसाधनों पर प्रभाव और जल संरक्षण के बारे में भी जानना चाहिए। जल प्रदूषण एक बड़ी समस्या है जो विश्वभर में पर्यावरण को प्रभावित कर रही है। इसका कारण नगरों और उद्योगों से उत्पन्न प्लास्टिक और जहरीले पदार्थों का सीधा नदियों और झीलों में निकलना है। जल प्रदूषण से जीव जंतुओं, पेड़-पौधों और मानव स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। हिमाचल प्रदेश एक सुंदर पहाड़ी राज्य है और वहाँ कई प्रमुख नदियाँ बहती हैं। यहाँ की प्रमुख नदियों में सतलुज, चिनाब, यमुना, बस्पा, व्यास और रावी शामिल हैं। ये नदियाँ पानी की आपूर्ति के लिए महत्त्वपूर्ण हैं और हिमाचल प्रदेश की जलवायु को भी प्रभावित करती हैं। जलवायु परिवर्तन एक गंभीर समस्या है जो जल संसाधनों पर भी प्रभाव डालती है। तापमान वृद्धि, वर्षा की मात्रा और मौसमी बदलाव जल संसाधनों को प्रभावित कर रहे हैं। जल संसाधनों के घटने के कारण, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से खाद्य सुरक्षा, जल की उपलब्धता और आजीविका रूपी व्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ता है। उपर्युक्त दुष्प्रभावों से बचने के लिए हमें जल संरक्षण को प्राथमिकता देनी चाहिए। जल का सही इस्तेमाल, बारिश के पानी को इकट्ठा करना, नदियों और झीलों की सफाई और जल संरक्षा के लिए जागरूकता बढ़ाने जैसे कदम उठाने चाहिए। हमारे जीवन के लिए जल का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है, ताकि हम और आने वाली पीढ़ियाँ एक स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण में रह सकें। जल पृथ्वी पर मौजूद सबसे महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है और जीवन के लिए आवश्यक घटक है। यह एक रासायनिक और भौतिक द्रव है, जिसका वैज्ञानिक नाम हाइड्रोजन ऑक्साइड (H₂O) है। जल सभी प्राणियों व वनस्पतियों के जीवन के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। जीव-जन्तु जल के बिना जीवित नहीं रह सकते। जल की उपलब्धता उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य उत्पादन और स्वच्छता के लिए भी आवश्यक होती है। जल कई जीवित प्रक्रियाओं जैसे पाचन, संवर्धन, संश्लेषण और ऊर्जा उत्पादन में मदद करता है। यह हमारे शरीर की ऊर्जा संतुलन को बनाए रखता है, पोषण पहुँचाता है, शरीर को स्थिरता और सुगमता प्रदान करता है। जल पृथ्वी के पर्यावरण के लिए भी नितांत आवश्यक है। यह जलवायु प्रणाली को संतुलित रखता है, समुद्री और जलीय प्राणियों के लिए निवास स्थान भी है। यह मौसम प्रणाली को प्रभावित करने के साथ जलवायु परिवर्तन से संबंधित गतिविधियों को भी प्रभावित करता है। जल औद्योगिक उत्पादन, विद्युत उत्पादन, परिवहन और ऊर्जा उत्पादन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके साथ ही, कृषि क्षेत्र में सिंचाई के लिए जल का उपयोग होता है, जो फसलों की उच्च उत्पादकता और खाद्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने में मदद करता है। इन सभी कारणों से जल प्राकृतिक संतुलन, मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बेहद उपयोगी व महत्त्वपूर्ण होता है। हालांकि, जल का उपयोग बढ़ने के साथ, जल संरक्षण की भी आवश्यकता है। जल संसाधन के सही प्रबंधन और जल संरक्षण के उचित प्रयास से हम भविष्य में जल सम्पदा का सुरक्षित और निरंतर आनंद उठा सकेंगे।
लेखक परिचय
जन्म : 18 सितम्बर, 1969 (हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला के गाँव मतियाना में)। शिक्षा : बी. एड., एम. ए. (भूगोल) पी.जी.डी.डी.एम. (आपदा प्रबंधन)। प्रकाशन : जल बचाओ, जीवन बचाओ जगरूकता एक प्रयास (प्रकाशनाधीन) NSS: A Holistic Development. शोध और संगोष्ठियाँ प्रदेश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में लेख प्रकाशित। राष्ट्रीय एवं राज्यस्तरीय संगोष्ठियों में वाचन एवं व्याख्यान। सम्मान : छात्रों के सर्वांगीण विकास के परिप्रेक्ष्य में शिक्षा पुरस्कार : 2020 राष्ट्रीय समाज सेवा रत्न सम्मान 2020 स्आर सम्मान 2020 शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट कार्योंएवं छात्र-छात्राओं के चारित्रिक, शारीरिक और सांस्कृतिक विकास हेतु योगदान के सम्मानार्थ वर्ष 2021 के लिए हिमाचल प्रदेश राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित एशिया प्राइड समान: 2021 कोरोना वारियर सम्मान 2021 सदस्य एन. एस. एस. राज्य सलाहकार समिति शिक्षा निदेशालय, हिमाचल प्रदेश। सम्प्रति : प्रधानाचार्य, राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (छात्र) कोटखाई, जिला शिमला (हि.प्र.)। स्थाई पता : गाँव/पोस्ट ऑफिस मतियाना, तहसील ठियोग, जिला शिमला (हि.प्र.) पिन : 171212 संपर्क : नीलपंख, नियर मोनाल पब्लिक स्कूल नार्थओक, संजौली शिमला-6 संपर्क सूत्र : 8219420927 Email: ajayvashisht9@gmai.com
दो शब्द
सृष्टि की रचना जल, पृथ्वी, अग्नि, आकाश और वायु पाँच तत्त्वों से हुई है। जल का इन पाँचों में महत्त्वपूर्ण स्थान है। जल भगवान का हमें दिया एक सुंदर उपहार है। वायु के बाद जल पृथ्वी पर सबसे महत्त्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है। जल के बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। चाहे वह मनुष्य हो, जीव-जन्तु हो या फिर पेड़-पौधे सभी का जीवन जल पर टिका हुआ है। पृथ्वी के जीव-जन्तुओं, पशु-पक्षियों, फसलों, वनस्पतियों, पेड़-पौधों आदि सभी के लिए जल अनिवार्य है। बिना जल के इन सभी का रह पाना सम्भव नहीं है। जल से संसार में जीवंतता है। चारों ओर फैली हरियाली, फसलें, फल-फूल आदि सभी जल के कारण ही जीवित हैं। जल के बिना जीवन की कल्पना ही असम्भव है। जल ने ही पृथ्वी पर चर-अचर जीव जगत् को सम्भव बनाया है। जीवाणु से लेकर स्थूलतम जीव हाथी तक और शैवाल से लेकर गगनचुम्बी वृक्षों तक सभी का जीवनाधार जल ही है। जल जीवन का आधार है। उदाहरण के लिए यदि आप किसी बर्तन में कुछ दिन के लिए पानी रख देंगे, तो कुछ दिन बाद उसमें से कुछ ना कुछ अवश्य उग जायेगा। यह इस बात को प्रमाणित करता है कि आख़िर किस प्रकार से जल जीवन के स्थापना में सहयोग करता है। चाहे वह मनुष्य हो, जीव-जन्तु हो या फिर पेड़-पौधे सभी का जीवन जल पर टिका हुआ है।
Hindu (हिंदू धर्म) (14019)
Tantra (तन्त्र) (1039)
Vedas (वेद) (732)
Ayurveda (आयुर्वेद) (2135)
Chaukhamba | चौखंबा (3470)
Jyotish (ज्योतिष) (1632)
Yoga (योग) (1212)
Ramayana (रामायण) (1313)
Gita Press (गीता प्रेस) (716)
Sahitya (साहित्य) (25198)
History (इतिहास) (9344)
Philosophy (दर्शन) (3712)
Santvani (सन्त वाणी) (2600)
Vedanta (वेदांत) (120)
Send as free online greeting card
Email a Friend
Visual Search
Manage Wishlist