निराले हीरे की खोज: Searching of Rare Diamond

निराले हीरे की खोज: Searching of Rare Diamond

$12
Quantity
Ships in 1-3 days
Item Code: HAA171
Author: राहुल सांस्कृत्यायन: (Rahul Sankrityayan)
Publisher: Kitab Mahal
Language: Hindi
Edition: 2010
ISBN: 8122504043
Pages: 120
Cover: Paperback
Other Details 8.5 inch X 5.5 inch
Weight 120 gm

लेखक परिचय

 

निराले हीरे की खोज, विस्मृति के गर्भ में, सोने की ढाल और जादू का मुल्क, चारों उपन्यासों को स्वान्तः सुखाय के अतिरिक्त अपने नवतरुणों में साहस पैदा करने के ख्याल से भी 1924 में मैंने किन्हीं विस्मृत अंग्रेजी लेखकों के उपन्यासों में बहुत से परिवर्तन के साथ अनुवादित किया था ।

इतने साल पहले जय इन उपन्यासों का कायाकल्प करके मैंने अनुवाद किया था, उस समय हमारे देश के कितने ही समझदार सज्रनों को देश की स्वतन्त्रता दूर की नहीं, स्वप्र की बात मालुम होती थी, उस समय मेरा इन उपन्यासों के पात्रों को एक स्वतन्त्र देश के नागरिक की भाँति चित्रित करना काल तथा स्थान मनौचित्य का काम था, किन्तु अब वह बात नहीं हे और आशा है हमारे तरुण पाठक ज्ञान विज्ञान के परिचय तथा देश विदेश के पर्यटन के लिये अपने को अच्छे साहसी जिज्ञासु घुमकड़ सिद्ध करेंगे ।

 

प्रकाशकीय

 

हिन्दी साहित्य में महापंडित राहुल सांकृत्यायन का नाम इतिहास प्रसिद्ध और अमर विभूतियों में गिना जाता है । राहुल जी की जन्मतिथि 9 अप्रैल, 1893 ई. और मृत्युतिथि 14 अप्रैल, 1963 ई. है । राहुल जी का बचपन का नाम केदारनाथ पाण्डे था । बौद्ध दर्शन से इतना प्रभावित हुए कि स्वयं बौद्ध हो गये । राहुल नाम तो बाद में पड़ा बौद्ध हो जाने के बाद । सांकत्य गोत्रीय होने के कारण उन्हें राहुल सांकृत्यायन कहा जाने लगा ।

राहुल जी का समूचा जीवन घुमक्कड़ी का था । भिन्न भिन्न भाषा साहित्य एवं प्राचीन संस्कृत पाली प्राकृत अपभ्रंश आदि भाषाओं का अनवरत अध्ययन मनन करने का अपूर्व वैशिष्ट्य उनमें था । प्राचीन और नवीन साहित्य दृष्टि की जितनी पकड़ और गहरी पैठ राहुल जी की थी ऐसा योग कम ही देखने को मिलता है । घुमक्कड़ जीवन के मूल में अध्ययन की प्रवृत्ति ही सर्वोपरि रही । राहुल जी के साहित्यिक जीवन की शुरुआत सन् 1927 ई. में होती है । वास्तविक्ता यह है कि जिस प्रकार उनके पाँव नहीं रुके, उसी प्रकार उनकी लेखनी भी निरन्तर चलती रही । विभिन्न विषयों पर उन्होंने 150 से अधिक ग्रंथों का प्रणयन किया है । अब तक उनके 130 से भी अधिक ग्रंथ प्रकाशित हो चुके हैं । लेखों, निबन्धों एवं भाषणों का गणना एक गुल्लि काम है । राहुल जी के साहित्य के विविध पक्षों को देखने से ज्ञात होता है कि उनकी पैठ न केवल प्राचीन नवीन भारतीय साहित्य में थी, अपितु तिब्बती, सिंहली, अंग्रेजी, चीनी, रूसी, जापानी आदि भाषों की जानकारी करते हुए तत्तत् साहित्य को भी उन्होंने मथ डाला । राहुल जी जब जिसके सम्पर्क में गये, उसकी पूरी जानकारी हासिल की । जब वे साम्यवाद के क्षेत्र में गये, तो कार्ल मार्क्स, लेनिन, स्तालिन आदि के राजनीतिक दर्शन की पूरी जानकारी प्राप्त की । यही कारण है कि उनके साहित्य में जनता, जनता का राज्य और मेहनतकश मजदूरों का स्वर प्रबल और प्रधान है ।

राहुल जी बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न विचारक हैं । धर्म, दर्शन, लोकसाहित्य, यात्रासाहित्य, इतिहास, राजनीति, जीवनी, कोश, प्राचीन तालपोथियों का सम्पादन आदि विविध क्षेत्रों में स्तुत्य कार्य किया है । राहुल जी ने प्राचीन के खण्डहरों से गणतंत्रीय प्रणाली की खोज की । सिंह सेनापति जैसी कुछ कृतियों में उनकी यह अन्वेषी वृत्ति देखी जा सकती है । उनकी रचनाओं में प्राचीन के प्रति आस्था, इतिहास के प्रति गौरव और वर्तमान के प्रति सधी हुई दृष्टि का समन्यय देखने को मिलता है । यह केवल राहुल जी थे जिन्होंने प्राचीन और वर्तमान भारतीय साहित्य चिन्तन को समग्रत आत्मसात् कर हमें मौलिक दृष्टि देने का निरन्तर प्रयास किया है । चाहे साम्यवादी साहित्य हो या बौद्ध दर्शन, इतिहास सम्मत उपन्यास हो या वोल्गा से गंगा की कहानियाँ हर जगह राहुल जी की चिन्तक वृत्ति और अन्वेषी सूक्ष्म दृष्टि का प्रमाण मिलता जाता है । उनके उपन्यास और कहानियाँ बिलकुल एक नये दृष्टिकोण को हमारे सामने रखते हैं ।

समग्रत यह कहा जा सकता है कि राहुल जी न केवल हिन्दी साहित्य अपितु समूचे भारतीय वाङ्मय के एक ऐसे महारथी हैं जिन्होंने प्राचीन और नवीन, पौर्वात्य एवं पाश्चात्य, दर्शन एवं राजनीति और जीवन के उन अछूते तथ्यों पर प्रकाश डाला है जिन पर साधारणत लोगों की दृष्टि नहीं गई थी । सर्वहारा के प्रति विशेष मोह होने के कारण अपनी साम्यवादी कृतियों में किसानों, मजदूरों और मेहनतकश लोगों की बराबर हिमायत करते दीखते हैं ।

विषय के अनुसार राहुल जी की भाषा शैली अपना स्वरूप निर्धारित करती है । उन्होंने सामान्यत सीधी सादी सरल शैली का ही सहारा लिया है जिससे उनका समूर्ण साहित्य विशेषकर कथा साहित्य साधारण पाठकों के लिए भी पठनीय और सुबोध है ।

प्रस्तुत कृति निराले हीरे की खोज राहुल जी द्वारा अनूदित कहानियों का रोचक संग्रह है, जिसकी रचना उन्होंने सन् 1923 में की थी । प्रस्तुत संग्रह में बीस कहानियाँ हैं जिनका अनुवाद उन्होंने अपने साहित्यिक जीवन के प्रारम्भ काल में ही किया था । यह सभी कहानियाँ उनके घुमक्कड़ी प्रवृत्ति और ऐतिहासिक खोज की भूख मिटाने में सक्षम हैं । कहानियों का कलेवर अति मानवीय करुणा व रहस्यों से ओत प्रोत है ।

निराले हीरे की खोज की कहानियाँ राहुल जी की चमत्कारी लेखनी का एक नया और आकर्षक स्वरूप है

 

विषय सूची

समुद्र का उपद्रव

1

रेतीली खाड़ी में दो स्टीमर

5

महागर्त का तल

10

बँगले वाला आदमी

14

भगेलू की राम कहानी

19

जेल का भीतरी

25

कप्तान का सन्देश

32

भयंकर बुलबुला

38

महापथ

45

मुर्दों की गुफा

50

मोहनस्वरूप का भूत

59

आँख

67

शैतान की आँख

73

बँगले में क्या देखा सुना

80

पुष्पक का अंत

86

हमारा घनिष्ठ संघ

91

शुभाशा का निर्माण

97

यात्रारम्भ

101

जल भित्तिका

105

आँख का जानकार

110

 

Add a review
Have A Question

For privacy concerns, please view our Privacy Policy

CATEGORIES