डॉ. नरेंद्र सिंह उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद के ग्राम महुआरी, पोस्ट नाऊमुण्डा के निवासी हैं। वे स्वर्गीय श्री महंथ सिंह एवं स्वर्गीय श्रीमती शारदा सिंह के पुत्र हैं। उन्होंने एम.ए., बी. एड., एम. एड तथा पीएच.डी की उपाधियाँ प्राप्त की है और राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) उत्तीर्ण की है। वर्तमान में डी. नरेंद्र सिंह बिनोद बिहारी महतो मेमोरियल टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज, साहबहिवार, तोपचांची, धनबाद, झारखण्ड में प्राचार्य के पद पर कार्यरत हैं। 'भाषा संदर्श' के सहलेखक के रूप में उन्होंने भाषा-अधिगम, मातृभाषा, बहुभाषिकता तथा शिक्षा में भाषा की भूमिका जैसे विषयों को प्रस्तुत किया है। पुस्तक में विद्यार्थियों की भाषायी विविधता को समझने और उसे शिक्षण प्रक्रिया से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया गया है। गृह पताः मकान संख्या 108, वार्ड संख्या 14, लोहिया नगर, महुआरी, बाबा, हाटा, कुशीनगर.
डॉ. पूनम कुशवाहा का जन्म 23 अप्रैल 1990 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के गाँव भीमापार में हुआ। उनके पिता श्री मुनिराम कुशवाहा और माता श्रीमती गीता देवी हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा के अंतर्गत एम.ए. (गृह विज्ञान), एम.ए. (समाजशाख), एम.एड. तथा पीएच. डी. की उपाधियाँ प्राप्त की हैं। उन्होंने अपने अध्यापन जीवन की शुरुआत सहायक अध्यापिका के रूप में मुखराम महाविद्यालय, गाजीपुर, उत्तर प्रदेश से की। वर्तमान में डॉ. पूनम कुशवाहा प्रतीक कॉलेज ऑफ एजुकेशन, सिवान में सहायक अध्यापिका के पद पर कार्यरत हैं। उनका स्थायी पता गाँव भीमापार, पोस्ट भीमापार, जिला गाजीपुर, उत्तर प्रदेश है। डॉ. पूनम कुशवाहा का दृष्टिकोण व्यावहारिक और प्रेरक है। वे लेखन को केवल विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सशक्त साधन मानती हैं। उनके विचारों और अनुभवों की प्रासंगिकता शैक्षिक तथा सामाजिक दोनों ही क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है। उनके योगदान से पाठकों में ज्ञान, संवेदनशीलता और चिंतन की क्षमता विकसित होती है, जो उनकी लेखनी को विशिष्ट और प्रभावशाली बनाती है। वे 'मनोविज्ञान के तत्व: अर्भ से कुमार तक' पुस्तक की सह-लेखिका भी हैं, जिसे उन्होंने डॉ. अजय कुमार मौर्य के साथ संयुक्त रूप से लिखा है।
डॉ. अजय कुमार मौर्य का जन्म 10 सितम्बर 1987 को उत्तर प्रदेश के जनपद जौनपुर के ग्राम बड़ेरी (पोस्ट-बड़ेरी) में हुआ। उनके पिता श्री रामशंकर मौर्य एवं माता श्रीमती राजकुमारी मौर्या हैं। बचपन से ही उनमें अध्ययन, चिंतन और सृजनशील कार्यों के प्रति गहरी रुचि रही है। उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त करते हुए एम.ए. (मनोविज्ञान), एम.ए. (प्राचीन इतिहास), एम.एड., एन.ई.टी. एवं पी.एच.डी. की उपाधियाँ अर्जित की। शिक्षण क्षेत्र में डॉ. मौर्य का योगदान उल्लेखनीय रहा है। उनकी प्रथम नियुक्ति रॉयल प्रूडेंस कॉलेज, लखीमपुर खीरी के इतिहास विभाग (बी.एड.) में सहायक अध्यापक के रूप में हुई, जहाँ उन्होंने शिक्षक-प्रशिक्षण के क्षेत्र में समर्पण, अनुशासन और उत्कृष्टता का परिचय दिया। तत्पश्चात् उनकी द्वितीय नियुक्ति बी.टी.टी.सी. (स्वशासी), मुजफ्फरपुर, बिहार में हुई, जहाँ उन्होंने शिक्षा के आदर्शों और नैतिक मूल्यों के प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्तमान में डी. मौर्य गोरख सिंह बी.एड. कॉलेज, सिवान में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत हैं। वे 'मनोविज्ञान के तत्त्व: अर्भ से कुमार तक' पुस्तक के सह-लेखक भी हैं, जिसे उन्होंने डॉ. पूनम कुशवाहा के साथ लिखा है।
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