डॉ. अमित कुमार जन्म: 30 जून 1985 शिक्षा: एम.ए. (दर्शनशास्त्र), यू.जी.सी (नेट), पी-एच.डी. अध्यापनः 13 अगस्त 2013 से 06 अप्रैल 2017 तक दर्शनशास्त्र विभाग, बी.एन.एम. कॉलेज, बड़हिया (ति.माँ. भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर) में अतिथि शिक्षक के रूप में कार्यरत। 20 मई 2017 से 15 मार्च 2026 तक स्नातकोत्तर दर्शनशास्त्र विभाग, के.एस.एस. कॉलेज, लखीसराय में विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत। 16 मार्च 2026 से विश्वविद्यालय दर्शनशास्त्र विभाग, मुगेर विश्वविद्यालय, मुंगेर में सहायक प्राध्यापक (वरीय) के रूप में वर्तमान में कार्यरत। प्रकाशनः विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में शोध रचनाओं का सफलतापूर्ण प्रकाशन।
प्रस्तुत पुस्तक यहूदी, ईसाई और इस्लाम धर्मों की उत्पत्ति, विकास एवं मान्यताओं के संदर्भ में लिखी गई है। इस पुस्तक में किये गये अध्ययन और उन पर आधारित विश्लेषणों के आधार पर प्रतिपादित धार्मिक मान्यताओं के आलोक में यह स्पष्ट है कि ये तीनों धर्म सामी परिवार के तीन सदस्य माने जाते रहे है। साथ ही साथ इस पुस्तक में इस तथ्य को भी दर्शाया गया है कि सामी धर्मों जैसे यहूदी, ईसाई और इस्लाम में पाये जाने वाली विस्तारवादी प्रवृत्तियों के परिणामस्वरूप धर्मांतरण जैसे माध्यमों को अपनाते हुए अन्य धर्मावलम्बियों के आस्थाओं को रूपान्तरित करने का प्रयास किया जाता रहा है। अपनी आस्था को सार्वभौम रूप एवं धार्मिक तथा आध्यात्मिक नेतृत्व प्रदान करने के उद्देश्य से इन नबीमूलक धर्मावलम्बियों के द्वारा अन्य धर्मों की आस्थाओं को दरकिनार करते हुए अपनी आस्था का फैलाव इस दूरी तक करने का प्रयास किया गया है कि पूरे विश्व पर आधिपत्य कायम किया जा सके। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए किये गये प्रयासों के कारण ही अन्तर-सभ्यात्मक संघर्ष की स्थिति पैदा होती है।
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