लेखक परिचय
प्रेरणा अग्रवाल फिल्म, सीरियल एवं रंगमंच जगत में सुश्री प्रेरणा अग्रवाल का एक विशिष्ट स्थान है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, दिल्ली से स्नातकोत्तर अभिनय में विशेषज्ञता। लखनऊ में जन्मी एवं लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक। शास्त्रीय गायन में चार वर्ष और कत्यक नृत्य में तीन वर्ष का प्रशिक्षण। फिल्म एवं टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इण्डिया, पुणे से फिल्म एप्रिसिएशन कोर्स। वर्तमान में तीन दशकों से मुम्बई में सक्रिय। आयीजक एवं फिल्म फेस्टिवल डायरेक्टर काशी इंडियन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल अवार्ड्स, "कीफा"। फिल्म लेखन एवं निर्माण - फीचर फिल्म "बावली" "बेस्ट चिल्ड्रेन फीचर फिल्म ऑफ द इयर" अवार्ड और कई फिल्मोत्सवों में अनेक अवाडों से सम्मानित । लघु फिल्में लेखन एवं निर्माण - मेरा बेटा, मैडम, द एंड ऑफ एन इंटरव्यू, स्पिट, हैंग ओवर। सीरियल लेखन एवं निर्माण सपना, तुम्हारे इंतज़ार में मुन्नी। सीरियल लेखन - पहचान, मेरा हमसफर, कशमकश जिन्दगी की, दाग, काला सिन्दूर। वैव सीरीज़ लेखन - जिंदगीनामा। फैलोशिप (शोध) सशक्त संस्कृत रंगमंच की नायिकाओं की आधुनिक परिवेश में प्रासंगिकता, समकालीनता, उपयोगिता एवं महत्व। लेखन - महाकवि कालिदास द्वारा रचित विश्वविख्यात संस्कृत नाटक अभिज्ञानशाकुन्तलम का आधुनिक स्वरुप-स्वर्णशिखा। व्यावसायिक नाटकों का लेखन एवं निर्माण शरारत, प्यार हुआ चोरी-चोरी, प्यार में कभी-कभी, मुझसे शादी करोगी, चुपके-चुपके, चांदनी, चाँद और चकोरी, दिल है आशिकाना। लेखन, निर्माण एवं मंचन आज़ादी का अमृत महोत्सव के अवसर पर "मागिनी हाजरा- गांधी बूढ़ी" नाटक तथा उसमें मार्तगिनी की मुख्य भूमिका का निर्वाह। उपन्यास, कहानियों एवं कविताओं का नाट्य रूपान्तर एक रात, मीठी ईद, मंटो की मोज़ेल, मंटो की सुगंधी, जिप्सीज़ एवं स्टोन गेस्ट (पुश्किन की लम्बी कवितायें)। विदेशी नाटकों का अंग्रेजी से हिन्दी में अनुवाद द ग्लास मैनेजरी, द फर्स्ट एण्ड द लास्ट, द डॉक्टर इन स्पाईट ऑफ हिमसेल्फ, जू स्टोरी, एक्ट विदाउट वर्ड्स। प्रकाशित नाटक - मंटी की मोजेल, मीठी ईद, प्यार में कभी-कभी, मंटो की सुगंधी, चांदनी चाँद और चकीरी, दिल है आशिकाना। मार्तगिनी हाजरा। प्रकाशित कहानी संग्रह - मां। बाल नाटक अंतराल, संक्रमण, एक सरल कहानी। गीत एवं गजल लेखन - फिल्म, सीरियल एवं नाटक। सम्प्रति - मुम्बई में स्थाई निवास। फिल्म, सीरियल एवं रंगमंच से सम्बद्ध ।
पुस्तक परिचय
शबरी के राम" नाटक, कालजयी रचना "रामायण" महाकाव्य की गाया का एक शक्तिशाली पुनर्कधन है। ये नाटक "शबरी के राम" न केवल भारत की कला और संस्कृति को बढ़ावा देता है, बल्कि यह हमारे महान महाकाव्यों और पवित्र ग्रंथों का भी प्रचार करता है जो हमारी भारतीय संस्कृति और सभ्यता का अभिन्न अंग है। इस नाटक में शबरी के सिर्फ इस जन्म की नहीं, अन्य जन्मों की भी कहानियाँ हैं जो ये दर्शाती है कि वह कितने जन्मों से प्रभु श्रीराम की दर्शनाभिलाषी थी। "शबरी के राम" शबरी और भगवान राम की कालजयी कथा की उन अनकही घटनाओं की श्रृंखला प्रस्तुत करता है जो आज तक पाठकों एवं दर्शकों के समक्ष प्रकट नहीं हुई थी और इस प्रकार वह उन्हें मंत्रमुग्ध कर देता है। इसमें भगवान राम के चौदह वर्ष के वनवास, रावण द्वारा सीता का हरण तथा श्रीराम द्वारा अपनी अनन्य भक्त तपोधने शबरी तक पहुँचने की यात्रा जैसी घटनाओं को उत्कर्ष रूप में दर्शाया गया है। प्रभु श्रीराम के अद्भुत चरित्र के साथ-साथ शबरी का चरित्र भी अनोखा बन जाता है और हृदय में रच-बस जाता है। कथा, नाटक के प्रवाह को बड़ी गति से, दिल को छूते हुए आगे की ओर ले चलती है। "शबरी के राम" जैसी कालजयी गाथा की रचना जैसे मेरे पूरे जीवन को सार्थक कर गई।
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