स्लो प्रोडक्टिविटी एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक है, जो कार्यक्षमता और उत्पादकता पर ध्यान केंद्रित करती है। इसमें लेखक यह बताते हैं कि तेज़ी से काम करना हमेशा प्रभावी नहीं होता। उन्होंने यह तर्क दिया है कि अत्यधिक दबाव और तेज़ी से काम करने की प्रवृत्ति लोगों को तनावग्रस्त और असंतुष्ट कर देती है। इसके बजाय, धीरे-धीरे और सोचे-समझे तरीके से काम करने से न केवल उत्पादकता बढ़ती है, बल्कि जीवन में संतुलन भी आता है।
कार्यभार प्रबंधन के आक्रामक पुनर्विचार से लेकर मौसमी बदलाव लाने तक, अपने प्रदर्शन को दीर्घकालिक गुणवत्ता की ओर मोड़ने तक, स्लो प्रोडक्टिविटी ओवरलोड से बचने और सार्थक उपलब्धि हासिल करने के लिए एक कालजई तकनीक द्वारा, एक रोडमैप प्रदान करती है। काम की दुनिया में एक नई क्रांति आने वाली है। स्लो प्रोडक्टिविटी बिलकुल वही है, जिसकी हमें ज़रूरत है।
पुस्तक में यह विचार प्रस्तुत किया गया है कि कम लेकिन गुणात्मक काम करना अधिक फायदेमंद होता है। जब हम अपने काम को धीरे-धीरे और सटीक तरीके से करते हैं, तो हम लंबे समय तक ऊर्जावान रहते हैं और मानसिक शांति प्राप्त कर सकते हैं।
1966 की गर्मियों की बात है। जॉन मैकफी को द न्यू यॉर्कर के लिए एक स्टाफ लेखक के रूप में दो वर्ष पूरी होने वाले थे। वे प्रिंसटन, न्यू जर्सी के पास अपने घर के पीछे के आँगन में ऐश ट्री के नीचे एक पिकनिक टेबल पर लेटे हुए थे। उन्होंने अपनी 2017 की किताब ड्राफ्ट नंबर 4 में उस दौर को याद करते हुए कहा, 'मैं करीब दो सप्ताह तक उस पर लेटा रहा, शाखाओं और पत्तियों को घूरता रहा, अपने डर और घबराहट से जूझता रहा।' द न्यू यॉर्कर में मैकफी के पाँच लंबे-चौड़े लेख छप चुके थे। उससे पहले वे सात साल तक टाइम के एसोसिएट एडिटर रह चुके थे। दूसरे शब्दों में, वे पत्निका में लिखने के लिए नए नहीं थे, जिस लेख ने उन्हें उन गर्मियों में उनकी पिकनिक टेबल पर चिपका-सा दिया था, वह अब तक का सबसे जटिल लेख था जिसे उन्होंने लिखने की कोशिश की थी।
मैकफी ने पहले प्रोफाइल लिखे थे, जैसे द न्यू यॉर्कर के लिए उनका पहला प्रमुख लेख, 'ए सेंस ऑफ़ व्हेयर यू आर', जो प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के बास्केटबॉल स्टार बिल ब्रैडली के बारे में था। उन्होंने ऐतिहासिक लेख भी लिखे थे : 1966 के वसंत में संतरे पर दो-भाग का उनका एक लेख छपा था जिसमें इस साधारण फल के बारे में 500 ईसा पूर्व में चीन में इसके पहले संदर्भ तक जाकर इसका पूरा इतिहास बताया गया था। हालाँकि मैकफी को अब दक्षिणी न्यू जर्सी के पाइन बैरेंस के असंभव रूप से व्यापक विषय पर लिखना था। वे इस पर बहुत कुछ करने की कोशिश कर रहे थे। एक केंद्रित प्रोफ़ाइल लिखने के बजाय उन्हें कई पात्नों की कहानियों को बुनना था, जिसमें वहाँ के ख़ास माहौल को देखकर और लोगों से बातचीत के आधार पर विस्तार से लिखना शामिल था। किसी एक वस्तु के इतिहास को संक्षेप में पेश करने के बजाय उन्हें पूरे इलाके की भूवैज्ञानिक, पारिस्थितिक और यहाँ तक कि राजनीतिक पृष्ठभूमि में गोता लगाना था।
मैकफी ने अपनी पिकनिक टेबल पर लगने से पहले इस विषय पर शोध करने में आठ महीने बिताए थे। उन्होंने बाद में कहा था कि उनके पास 'एक गोदाम को भरने लायक सामग्री' जुट गई है। अब तो उन्हें याद तक नहीं रहा था कि वे अपने प्रिंसटन स्थित घर से पाइन बैरेंस तक की यात्रा कितनी बार कर चुके हैं। अकसर अपने प्रवास को बढ़ाने के लिए वे एक स्लीपिंग बैग साथ लेकर जाते थे। उन्होंने सभी प्रासंगिक किताबें पढ़ी थीं और सभी संबंधित लोगों से बात की थी। अब जब उन्हें लिखना शुरू करना था, तो वे अभिभूत महसूस कर रहे थे। 'शुरुआत में आत्मविश्वास की कमी मुझे गलत नहीं लगती।' उन्होंने समझाते हुए कहा था, 'इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपने पहले जो कुछ किया है, वह बहुत अच्छा रहा हो। आपका पिछला लेख कभी भी आपके लिए अगला लेख नहीं लिख सकता।' तो मैकफी अपनी पिकनिक टेबल पर लेटकर ऐश ट्री की शाखाओं को देखते हुए यह जानने की कोशिश कर रहे थे कि तमाम स्रोतों और कहानियों के इस ढेर को एक लेख में कैसे बुना जाए। वे दो सप्ताह तक उस मेज़ पर लेटे सोचते रहे और आख़िरकार उनकी समस्या का समाधान फ्रेड ब्राउन के रूप में आया।
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