जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लाखों देशवासियों के साथ पिछले कई दशकों से हमारा विचार-विमर्श होता रहा है। इस पुस्तक को लिखने में हमारे विचारों ने उन्हीं से स्वरूप ग्रहण किया। ऐसे प्रत्येक पारस्परिक मिलन ने हमारे अनुभव को समृद्ध किया और उत्तम परिवार, उत्तम समाज तथा उत्तम राष्ट्र के बारे में हमारी समझ को विकसित किया। इस पुस्तक को लिखने के दौरान हमें पिछली कुछ शताब्दियों की अपने समाज के विकास और संयोजन की विशालता का एहसास हुआ। हमने समझा कि हमारे देश में विभिन्न प्रयोजनों से आनेवालों का इस पर कितना प्रभाव पड़ा। हम विशेष रूप से वाई. एस. राजन तथा उन सभी लोगों का धन्यवाद करते हैं, जो हमारे समाज व उसकी विशिष्टताओं को समझने में हमारे सहायक बने।
इस पुस्तक में प्रस्तुत आचार्य महाप्रज्ञजी विचारों को आकार देने में जिन अनुयायियों व श्रद्धालुजनों ने योगदान दिया, आचार्य महाप्रज्ञजी उन सभी को साधुवाद देते हैं। पुस्तक के लेखन से निरंतर जुड़े रहने व उसके प्रतिपाद्य विषय को सुचारु रूप प्रदान करने के लिए साध्वी नियोजिका विश्रुतविभा, प्रोफेसर मुनि महेंद्रकुमार, डॉ. सोहनलाल गांधी और प्रो. अरुण के. तिवारी विशेष साधुवाद के पात्र हैं।
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