बाबा नीब करौरी के अलौकिक प्रसंग: (Supernatural Incidents of Baba Neem Karauli)

बाबा नीब करौरी के अलौकिक प्रसंग: (Supernatural Incidents of Baba Neem Karauli)

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Item Code: HAA145
Author: बच्चन सिंह: (Bachchan Singh)
Publisher: Vishwavidyalaya Prakashan, Varanasi
Language: Hindi
Edition: 2012
ISBN: 9788171248568
Pages: 545
Cover: Paperback
Other Details: 8.5 inch X 5.5 inch
Weight 550 gm

श्री चरणों में

बाबा नीब करौरी अपने समय के महानतम संत थें । उनके जन्म काल के बारे में कोई प्रामाणिक विवरण उपलब्ध नहीं है लेकिन कुछ भक्त उनके जीवन का विस्तार 18 वीं शताब्दी से 20वीं शताब्दी तक मानते हैं । बहरहाल उन्होंने 11 सितम्बर 1173 को लौकिक शरीर त्याग दिया ।

बाबा नीब करौरी सर्वज्ञ थे, सर्वशक्तिमान थे और सर्वव्यापक थे । वे कहते थे, मैं हवा हूँ मझे कोई रोक नहीं सकता । मैं धर्म के प्रचार प्रसार के लिए पृथ्वी पर आया हूँ

बाबा समसामयिक संतों में सर्वोपरि थे । कुछ लोग उन्हें साक्षात् हनुमानजी का अवतार मानते थे तो कुछ संतों का कहना था कि नीब करौरी महाराज को हनुमानजी की सिद्धि है । वह कुछ भी कर सकते हैं । यदि मृत व्यक्ति को पुनर्जीवन देने की क्षमता किसी में है तो वह एकमात्र संत हैं नीब करौरी बाबा ।

बाबा ने कथा, प्रवचन, आडम्बर, प्रचार प्रसार से दूर रह कर दीन दुःखियों की सेवा में अपना सम्पूर्ण जीवन लगा दिया । भक्तों का आर्तनाद सुनकर तुरन्त पहुँच जातें और उसे संकट से उबार देते । वे भक्त वत्सल थे, गरीब नवाज थे और संकटमोचक थे । बाबा नीब करौरी का सम्पूर्ण जीवन अलौकिक क्रिया कलापों से भरा हुआ है । कोई शक्ति उन्हें एक जगह बाँध कर नहीं रख सकती थी । वे एक साथ भारत में भी होते और लंदन में भी । लखनऊ में भी और कानपुर में भी । पवन वेग से क्षण भर में ही कहीं भी अवतरित हो जाते । उन्हें कमरे में कैद करके रखना असम्भव था । सूक्ष्म रूप में बाहर निकल जाते और वांछित कार्य सम्पन्न कर लौट आते । महाराजजी का हर क्षण अलौकिक होता वे स्वयं अलौकिक जो थे ।

महाराजजी के भक्तों ने उनकी अलौकिक घटनाओं, लीलाओं और प्रसंगों को विभिन्न पुस्तकों में संकलित किया है । ये पुस्तकें अंग्रेजी में भी हैं और हिन्दी में भी । इस पुस्तक में महाराजजी के सभी अलौकिक किया कलापों को एक जगह संकलित करने का प्रयास किया गया है ।

विश्वविद्यालय प्रकाशन के संस्थापक श्री पुरुषोत्तमदास मोदी साहित्य और अध्यात्म में गहरी रुचि रखते हैं । वे धर्म, संस्कृति, अध्यात्म और संत महात्माओं से सम्बन्धित पुस्तकें सहर्ष प्रकाशित करते रहे हैं । सम्भवत: इसीलिए बाबा नीब करौरी ने उन्हें प्रेरणा दी कि उनके अलौकिक क्रिया कलापों को एक जगह संकलित और प्रस्तुतकिया जाय । श्री मोदी ने यह पवित्र कार्य मुझे सौंपा और महाराजजी की कृपा से मैंने यह कार्य सिर्फ तीन महीने में पूरा कर दिया । महाराजजी के अलौकिक किया कलापों के संकलन में मैंने अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी है । यदि कोई कमी रह गई होगी तो महाराजजी की प्रेरणा से अगले संस्करण में पूरी होगी, ऐसा मेरा विश्वास है ।

मैं बाबा नीब करौरी के उन सभी ज्ञात अज्ञात भक्तों का आभारी हूँ जिनके प्रत्यक्ष एवं परोक्ष सहयोग से यह पुस्तक तैयार हो सकी । मैं बाबा के अमेरिकी भक्त डॉ ० रिचर्ड एल्पर्ट (जिनका नाम बाबा ने रामदास रखा था) प्रोफेसर मनोविज्ञान, हारवर्ड विश्वविद्यालय, बोस्टन का विशेष आभारी हूँ जिनकी पुस्तक मिरेकिल आव लव से विशेष मदद मिली । इसके अलावा बाबा के परम भक्तों राजी दा और मुकन्दा का भी आभारी हूँ जिनकी पुस्तकों से मुझे खासी सामग्री प्राप्त हुई ।

अन्त में बाबा नीब करौरी के श्री चरणों में यह पुस्तक क्षमा प्रार्थना के साथ समर्पित कर रहा हूँ ।

अनुक्रम
श्री चरणों मेंv
सन्दर्भvii
मेरे नीब करौरी बाबा गोविन्दप्रसाद श्रीवास्तवix
वाणीसिद्ध महात्मा पारसनाथ सिंहxiii
1बाबा नीब करौरी का जीवन और महाप्रयाण1
2अलौकिक लीलाओं की लम्बी शृंखला36
3बाबा के महाप्रयाण के बाद की कुछ लीलाएं381
4नीब करौरी बाबा के वैचारिक प्रसंग452

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