उत्तराखंड में आर्थिक विकास और नियोजन एक बहुआयामी विषय है जो राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के आर्थिक पक्ष और यहाँ की असीमित विकास की संभावनाओं के लिए किये जा रहे क्रियाकलापों से संबंधित है।
राज्य के संदर्भ में देखा जाय तो यहाँ के आर्थिक विकास की वास्तविक गति राज्य गठन के पश्चात ही दिखाई देती है जब धरातलीय स्तर पर क्षेत्रीय समस्याओं के निवारण के लिए जनहित की विभिन्न योजनाओं पर विचार किया जाने लगा ताकि प्रदेश बहुमुखी विकास की ओर उन्मुख हो सके। उद्योग शून्य इस क्षेत्र में उद्योग स्थापना के लिए संभावनायें तलाशी जाने लगी। पर्वतीय भूभाग के पहाड़ी ढलानों पर औद्योगिक भवनों का निर्माण और यातायात की कठिनाई के कारण एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचना जटिल कार्य था। ऐसे स्थानों पर उद्योग स्थापना के लिए नियोजन की बात करना कल्पना मात्र था।
किंतु समय ने करवट बदली और उत्तराखंड का औद्योगिक विकास तीव्र गति से आगे की ओर अग्रसर हुआ। उत्तराखंड राज्य गठन से पूर्व यहाँ पर 14163 लघु स्तरीय औद्योगिक इकाइयाँ पंजीकृत थीं जिनमें 38509 व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त था, जबकि जनवरी, वर्ष 2024 तक 70178 लघु, सूक्ष्म एवं मध्यम स्तरीय उद्योगों का पंजीकरण हुआ जिसमें 366450 व्यक्तियों को रोजगार दिया गया।
जब हम आर्थिक क्षेत्र के अन्य माध्यम कृषि व्यवसाय का अवलोकन करते हैं तो ज्ञात होता है कि उत्तराखंड का कुल भौगोलिक क्षेत्र 53483 वर्ग किमी है। राज्य गठन के वित्तीय वर्ष में 2000-2001 में यहाँ कुल खाद्यान्नों का उत्पादन 1647 लाख मैट्रिक टन था। जबकि इसी अवधि में 202 हैक्टेयर कृषि क्षेत्र में कमी आई। किंतु अनाज के उत्पादन में 1.05 लाख मैट्रिक टन की वृद्धि हुई जो अच्छे बीज, खाद और सिंचाई के साधनों में सुधार का परिणाम था।
प्रदेश में पशुपालन की स्थिति चिंताजनक है। उत्तराखंड में वर्ष 2003 में गोवंशीय पशुओं की संख्या 2188194 थी जो वर्ष 2019 में घटकर 866318 हो गयी। यही कारण था कि वर्ष 2018-19 में 204288 किग्रा दुग्ध उत्पादन हुआ जो वर्ष 2022-23 में घटकर 185161 किग्रा हो गया।
वन प्राचीन काल से ही हमारे लिए महत्वपूर्ण रहे हैं। वन विभाग इनका वैज्ञानिक प्रबंधन करता है। उत्तराखंड में वन पंचायत प्रणाली है। यह भारत का एक मात्र ऐसा राज्य है। उत्तराखंड वन, पर्यावरण एवं वन्य जीवों का संरक्षण प्रदान करने वाला प्रमुख क्षेत्र है। यहाँ पर बाघों की संख्या 650, गुलदार 3115 तथा हाथियों की संख्या 2026 है।
नमामि गंगे परियोजना के अन्तर्गत उत्तराखंड का 23372 वर्ग किमी क्षेत्र आच्छादित है। इसमें गंगा तथा उसकी 11 सहायक नदियों के जलागम क्षेत्रों में कार्य किया जा रहा है जिसमें नई पौध लगाना, गंगा वाटिका, पथ वृक्षारोपण, भूमि संरक्षण, रिवर फ्रंट डेवलपमेंट, अग्रिम मृदा कार्य आदि किये जा रहे हैं।
उत्तराखंड के नियोजन और विकास के अन्तर्गत अमृत योजना, प्रधानमंत्री आवास, योजना, स्मार्ट सिटी मिशन, मुख्यमंत्री पलायन रोकथाम जैसी योजनाएँ सम्मिलित हैं। इसी प्रकार प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना, जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, हर खेत को पानी, किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान योजनाएँ चल रही हैं। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग के मध्य 125 किमी लम्बी रेलवे लाइन एक महत्वपूर्ण विकासात्मक परियोजना है जिससे दूरस्थ क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।
प्रस्तुत पुस्तक में यही सभी आर्थिक प्रगति व नियोजन संबंधी जानकारियाँ उपलब्ध कराई गई हैं जिससे सामान्य नागरिकों को भी उत्तराखंड में आर्थिक विकास और नियोजन संबंधी जानकारी उपलब्ध हो सकेगी।
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