कहते हैं हैं की इज़्ज़त, रुतबा, कामयाबी, शौहरत अपने साथ दुश्मन क लेकर आती है। दुश्मन के अलावा ये सब बैचैनी को भी न्योता देती हैं। कंधों पर सितारे और छाती पर तमगे लगाए एक आई.पी.एस. ऑफिसर व्याकुल होकर अपने अतीत को टटोलता हुआ भटक रहा है। उसी बेसब्री में वो अपने निजी फैसले केवल भावनाओं में बहकर लिए जा रहा है। प्यार, पॉसेसिवनेस और उपकार के इर्द गिर्द घूमती इस कहानी में कुछ कड़ियाँ जोड़ने के बाद, आई.पी.एस को महसूस होता है कि जीवन के संबंध बेमाने हैं। उन संबंधों के पाश को तोड़ने के लिए वह एक निर्णय लेकर चल पड़ा है। निर्णय कुछ ऐसा जिसे शायद सही और ग़लत के तराजू में तौल पाना संभव नहीं है।
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