Easy Returns
Easy Returns
Return within 7 days of
order delivery.See T&Cs
1M+ Customers
1M+ Customers
Serving more than a
million customers worldwide.
25+ Years in Business
25+ Years in Business
A trustworthy name in Indian
art, fashion and literature.

मोक्ष क्या है तथा प्रबोध क्या है ?: What is Liberation and what is Enlightenment?

$37
Includes any tariffs and taxes
Express Shipping
Express Shipping
Express Shipping: Guaranteed Dispatch in 24 hours
Specifications
Publisher: Vishveshvaranand Vedic Research Institute, Hoshiarpur
Author K. K. Sharma
Language: Hindi
Pages: 246
Cover: HARDCOVER
10.0x6.5 inch
Weight 660 gm
Edition: 2013
HCA752
Delivery and Return Policies
Ships in 1-3 days
Returns and Exchanges accepted within 7 days
Free Delivery
Easy Returns
Easy Returns
Return within 7 days of
order delivery.See T&Cs
1M+ Customers
1M+ Customers
Serving more than a
million customers worldwide.
25+ Years in Business
25+ Years in Business
A trustworthy name in Indian
art, fashion and literature.
Book Description
भूमिका

विद्वानों में, सनातन हो अथवा आर्य समाज, इन दोनों के विद्वानों में केवल एक वेद ही सर्वोपरि प्रमाण ग्रन्थ है। वेद के लिए एकवचन तथा बहुवचन, इन दोनों का प्रयोग होता है। वह क्यूं, यह शीघ्र ही स्पष्ट होगा। सनातन के अनुसार वेद में किसी समय एक लाख मन्त्र थे परन्तु आज हमें 26000 से कुछ ऊपर, दूसरे शब्दों में 27000 से कम संख्या में मन्त्र मिलते हैं। बाकी की मन्त्रराशि लुप्त है, वह सारी की सारी मन्त्रराशि, पिता से पुत्र तक तथा गुरु से शिष्य तक मौखिकता (by words of mouth) द्वारा संचरित होती आई। आखिर एक समय इस बात का विचार करते हुए कि भावी सन्तानों में उन की बुद्धि की प्रखरता तथा मेधा वैसी नहीं होगी जैसी कि उन के पूर्वजों की थी, तो इस मन्त्रराशि को चार भागों में एकत्रित किया गया और उस एकत्रीकरण का नाम संहिता हुआ। संहिता शब्द का अर्थ ही (collection) है और जिसने ऐसे किया उसे ऋषि वेदव्यास कहा जाता है। व्यास शब्द का अर्थ ही (compiler) है।

आर्यसमाज इस बारे में और धारणा रखता है। उन के अनुसार जितने मन्त्र मिलते हैं उतने ही थे और वे संहितारूप में पहले ही से थे। परन्तु (The Mahabharata saying that "the Veda is one" its significance is one, though different Vedas are constructed on account of misunderstanding. The Hindu view of life by S. Radhakrishnan P. 23)

उस एक लाख मन्त्रराशि की दृष्टि से वेद के लिए एकवचन का प्रयोग होता है और संहिताओं की दृष्टि से क्योंकि वे संख्या में चार हैं इसलिए वेद के लिए बहुवचन का प्रयोग होता है। वे संहिताएं यह हैं-ऋग्वेद संहिता, यजुर्वेद संहिता, सामवेद संहिता तथा अथर्ववेद संहिता। सामवेद के 104 मन्त्रों को छोड़, जिन में कि 5 मन्त्र दूसरी बार आये हैं, बाकी के सभी मन्त्र ऋग्वेद के हैं। यजुर्वेद वाजसनेयी संहिता के लगभग 30% मन्त्र ऋग्वेद के हैं, अथर्ववेद में लगभग 16% मन्त्र ऋग्वेद के हैं। 63 मन्त्र ऐसे हैं जो कि चारों वेदों में आये हैं।

अथर्ववेद जिसे ब्रह्मवेद भी कहा जाता है उस के अपने मन्त्रों का यज्ञ में प्रयोग नहीं किया जाता परन्तु उसमें ऐसे भी मन्त्र हैं जिन का यज्ञ में प्रयोग होता है और वे मन्त्र दूसरी संहिताओं के हैं। यह मन्त्रराशि ऋषियों के मन में स्फुरित हुई। इसलिए उन ऋषियों को मन्त्रद्रष्टा कहा जाता है। उन मन्त्रद्रष्टाओं में कुछ स्त्रियां भी थीं, ऋग्वेद में ऋषि अथवा ऋषिका का नाम लिखा मिलता है।

वेदमन्त्रों के उच्चारण का भी विधान है और वे उदात्त (raised-high), स्वरित (middle) और अनुदात्त (low-pitched) इन नामों से जाने जाते हैं। सामवेद में इन उच्चारणों के लिए मन्त्र वर्ण के ऊपर क्रमशः 1, 2, 3 लिखा होता है। अन्य तीन वेदों में, उदात्त के लिए कोई चिह्न नहीं होता, स्वरित के लिए वर्ण के ऊपर Vertical Mark होता है और अनुदात्त के लिए वर्ण के नीचे Horizontal Mark होता है। एक ही शब्द यदि दो बार लिखा हो परन्तु यह चिह्न भिन्न-भिन्न वर्ण पर हों तो उन का अर्थ भी भिन्न होता है।

प्रस्तावना

यह विज्ञान का युग है, विशेषकर भौतिक विज्ञान की अन्धविश्वास तथा भ्रमात्मिक श्रद्धा से सीधी टक्कर है। यह दोनों ही रिलीजन (religion) के तले खूब पनपते हैं। रिलीजन तथा धर्म में महान् अन्तर है। ऐसा अन्तर पण्डित नेहरू ने भी अपनी पुस्तक Discovery of India में माना है। वैशेषिक दर्शनकार महर्षि कणाद ने धर्म का लक्षण करते हुए कहा है कि जिस से कल्याण तथा मोक्ष की सिद्धि हो उसे धर्म कहा जाता है (1.1.2)। अच्छी बात का स्रोत कहीं से भी क्यों न हो उसे अपना लेना चाहिए और बुरी बात अपने ही से क्यों न हो उसे त्याग देना चाहिए।

वैज्ञानिक प्रतिभाशाली तथा मेधावी व्यक्ति हैं। उनकी उपलब्धियां तथा आविष्कार विस्मयकर हैं। उनसे इस बात की आशा नहीं की जानी चाहिए कि वे किसी भी बात को केवलमात्र किसी वक्ता के व्यक्तित्व से प्रभावित हो कर अथवा किसी लेखक के लेख से भाव-विभोर हो कर अपना लें, कारण कि विज्ञान का अनुशासन इस बात की अनुमति नहीं देता है। वैज्ञानिक तो अपनी प्रयोगशाला में, वैज्ञानिक ढंग से परीक्षा करने पर यदि वह वाद (theory) अबाधित सिद्ध हो तब उसे मान्यता प्रदान करता है अन्यथा नहीं, प्रश्न उठता है कि क्या कोई ऐसा वाद अथवा सिद्धान्त है जो परीक्षा करने पर अबाधित सिद्ध हो और उन की श्लाघा का पात्र बन सके, तो उस का उत्तर हाँ में है, उस सिद्धान्त को प्रस्तावना

वेदान्त कहते हैं। वेद के सिद्धान्त को वेदान्त कहा जाता है। विचार का विषय रूपनिर्णीत अर्थसिद्धान्त कहलाता है और संक्षेप में वह सिद्धान्त नीचे वर्णित है :

चरम सत्य (Ultimate Reality) केवलमात्र एक ही है और उसे ब्रह्म कहा जाता है। इस ब्रह्माण्ड का उपादानकारण प्रकृति है। उपादानकारण उसे कहते हैं जिसका कि कार्य के स्वरूप में प्रवेश हो। जैसे कि घट के स्वरूप में मृतिका का प्रवेश है, मुंद्रि के स्वरूप में स्वर्ण का प्रवेश है। मेज के स्वरूप में लकड़ी का प्रवेश है। खड्ग के स्वरूप में लोहे का प्रवेश है। ऐसे ही इस ब्रह्माण्ड के स्वरूप में जिस का प्रवेश है उसे प्रकृति कहा जाता है।

जीव तथा ईश्वर, इन दो का भेद औपाधिक है अर्थात् उपाधिकृत है। जीव की उपाधि अन्तःकरण है और ईश्वर की उपाधि माया है। उपाधि उसे कहते हैं जो अपने से बड़ी वस्तु को अपने भीतर जनाती हो परन्तु न अपने आप को जानती हो और न किसी दूसरे को। दृष्टान्त के रूप में आप के सामने पानी से भरी हुई एक बालटी है। पृथ्वी पर वह थोड़ा सा स्थान घेरे हुए है परन्तु इस पृथ्वी से लाखों गुणा बड़ा सूर्य वह अपने भीतर दिखलाती है परन्तु न तो अपने को जानती है, न ही पृथ्वी तथा सूर्य को। यदि बालटी का पानी गंदला है तो उस में पड़ने वाला सूर्य का प्रतिबिम्ब भी गंदला होगा। यदि पानी हिलता है तो प्रतिबिम्ब भी हिलता होगा। दूसरी ओर सूर्य की गर्मी से बालटी का पानी भी गर्म होना आरम्भ होने लग गया होगा।

Frequently Asked Questions
  • Q. What locations do you deliver to ?
    A. Exotic India delivers orders to all countries having diplomatic relations with India.
  • Q. Do you offer free shipping ?
    A. Exotic India offers free shipping on all orders of value of $30 USD or more.
  • Q. Can I return the book?
    A. All returns must be postmarked within seven (7) days of the delivery date. All returned items must be in new and unused condition, with all original tags and labels attached. To know more please view our return policy
  • Q. Do you offer express shipping ?
    A. Yes, we do have a chargeable express shipping facility available. You can select express shipping while checking out on the website.
  • Q. I accidentally entered wrong delivery address, can I change the address ?
    A. Delivery addresses can only be changed only incase the order has not been shipped yet. Incase of an address change, you can reach us at help@exoticindia.com
  • Q. How do I track my order ?
    A. You can track your orders simply entering your order number through here or through your past orders if you are signed in on the website.
  • Q. How can I cancel an order ?
    A. An order can only be cancelled if it has not been shipped. To cancel an order, kindly reach out to us through help@exoticindia.com.
Add a review
Have A Question
By continuing, I agree to the Terms of Use and Privacy Policy
Book Categories