लेखक परिचय
गुलशन मदान जन्म 18 जनवरी 1961, कैथल (हरियाणा) भारतीय स्टेट बैंक में सेवारत । गुलशन मदान प्रकाशित कृतियां - 1. धूप के इश्तिहार (गजले) 2. कुछ कदम फुटपाथ पर (गजले) 3. कतरे में समन्दर (गजलें) 4. सुलगती रेत पर (गजले) 5. श्री गुरु गीता (हिन्दी काव्यानुवाद) 6. बुल्लेशाह (हिन्दी काव्यानुवाद) 7. फुलवारी (बाल गीत) 8. लाख टके की बात (दोहा संग्रह) फिल्म लेखक संघ मुम्बई, अक्षरधाम समिति (रजि.), साहित्य सभा कैथल, गज़ल मंच कैथल, संस्कार भारतीर्ट आदि संस्थाओं से सम्बद्ध । प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं एवं महत्वपूर्ण संग्रहों में कविताएं, लघुकथाएं, गज़लें व कहानियां प्रकाशित। कुछ रचनाएं अन्य भाषाओं में अनूदित । आकाशवाणी व दूरदर्शन से कई बार रचनाएं एवं वार्ताएं प्रसारित। मुम्बई के सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक माननीय भूपेन्द्र-मिताली, और नीरज गांधी की गजल कैसेटों में गजलें शामिल। आकाशवाणी एवं दूरदर्शन पर गज़लों का नियमित संगीतबद्ध प्रसारण। हरियाणा के राज्यपाल एवं केन्द्रीय संसदीय हिन्दी समिति सहित अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित एवं पुरस्कृत। नाना कवि सम्मेलनों व साहित्यिक गोष्ठियों में सहभागिता एवं विभिन्न आयोजनों का मंच संचालन। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरूक्षेत्र में एम.फिल. की डिग्री हेतु लिखा शोध 'गजल के आईने में गुलशन मदान' पुस्तक रूप में प्रकाशित।
पुस्तक परिचय
गुलशन मदान की कहानियों का 'एलबम' कहानी का महत्व किसी से छिपा नहीं है। बचत से लेकर उम्र के आखिरी पड़ाव तक कोई न कोई कार्य सामने आ खड़ी होती है। आगे क्या हुआ...आगे होगा.. कहानी ही इस जिज्ञासा को उठाती है केसे कहानी ही इसे शांत करती है। ठीक उस एलबम को तरह जो हमारे सामने बन्द पड़ी है और उसे देखने के लिये हमारे हाथ अनायस ही आगे बढ़ जाते हैं। हालांकि उस बन्द पड़ी एलबम में तमाम तस्वीरें इतनी उभर कर न भी आयी हों, याने कि 'लाईट एन्ड शेड' का उभार कई जगह दब भी सकता है परन्तु जो तस्वीर बिल्कुल सही उभर कर आयी हो उसे तो कितनी भी देर तक निहारा जा सकता है। गुलशन मदान की कहानियों का यह एलबम भी ठीक उसी एलबम की तरह है जिसमें मध्यवर्गीय परिवार की तस्वीरों को बखूबी उतारने का प्रयास किया गया है। 'आखिरी सहारा' में बाबू रामगोपाल की त्रासदी को दर्शाते हुए जीवन का यही तथ्य सामने आता है कि एक बाप अपने चार बच्चों को तो पाल सकता है परन्तु चार बेटे मिल कर असहाय पिता को नहीं संभाल सकते। 'आस्था' एक प्रेम-प्रसंग को उठाती है परन्तु इसमें भी लेखक ने कहानी को विखरने नहीं दिया। 'अग्निपरीक्षा' पुरूष की लोलुपता की कहानी है। 'दाहसंस्कार' में आज के खोखले और स्वार्थी होते रिश्तों का वर्णन है। व्यक्ति के संस्कार भी दाह होते जा रहे हैं, इस पंक्ति से लेखक ने अन्तर्मन को छुआ है। एलबम' शीर्षस्थ कहानी सम्बन्धों का एक बहुत ही सफल एवं स्वाभाविक चित्रण है। 'चलो इक बार फिर से' तन्हाई का अहसास लिए दो अजनबी लोगों के बीच गजल की खुशबू बिखेरता संवाद है। इसमें लेखक ने बड़े खुबसूरत अंदाज से अपने शायर होने का लाभ उठाया है। गुलशन अब तक गजल की विधा में बहुत सक्रिय रहे और उनकी अनेक गज़लें शुष्क मौसम में ठड़ी फुहार के छींटे दे अन्तर्मन को भिगो जाती हैं। कहानी में भी उनका प्रयास भविष्य के लिए। एक सार्थक कोशिश का आभास देता है। अपने इस प्रयास को वह जारी रखे तो निःसन्देह भविष्य में एक कहानीकार के रूप में भी स्थापित हो सकता है।
Hindu (हिंदू धर्म) (13849)
Tantra (तन्त्र) (1021)
Vedas (वेद) (738)
Ayurveda (आयुर्वेद) (2110)
Chaukhamba | चौखंबा (3226)
Jyotish (ज्योतिष) (1615)
Yoga (योग) (1178)
Ramayana (रामायण) (1319)
Gita Press (गीता प्रेस) (721)
Sahitya (साहित्य) (24994)
History (इतिहास) (9175)
Philosophy (दर्शन) (3663)
Santvani (सन्त वाणी) (2604)
Vedanta (वेदांत) (120)
Send as free online greeting card
Email a Friend
Visual Search
Manage Wishlist