आमुख
इस शोध प्रबन्ध के विवय का सुझाव 1970 में प्रो० राधाकृष्ण चोधरी, से मिला है। बाद है उन्होंने घपने निर्देशन में कार्य करने का अवसर भी प्रदान किया। 'हिन्दू पॉलिटी' के अध्ययन में मेरी विशेष रुचि प्रारम्भ से हो रही है। अतएव प्रस्तुत विषय पर कार्य करने में मुझे विशेष उत्साह एवं गौरव का धनुभव हुद्या । प्रोफेसर चौधरी की मात्र यह इच्छ थी कि प्रबन्ध राष्ट्रभाषा हिन्दी में हो। इस प्रबन्ध की रचना प्रो० राधाकृष्ण चौधरी के उत्साहवर्द्धक तथा स्नेह-सम्वलित निर्देशन में हुई है। उनकी सहायता और मार्गदर्शन के बिना यह कार्य कठिन या । पी० एच० डी० एक उपाधि है। इसे में इस रूप में मानता हूँ कि इससे विशेष ज्ञान की उपलब्धि भी होती है क्योंकि जबतक बोज-कार्य में लगा रहना पड़ता है तबतक तो अपरिपक्वता की स्थिति रहती है भोर इस कार्य के सम्पूर्ण हो जाने पर विहित विषय में परिपक्वता का अर्जन सतत प्रयास के कारण प्राप्त होता है। प्रस्तुत प्रवन्ध के प्रणयन में विद्वान गुरुजनों ने धरने बहुमूल्य समय का ध्यान न रखकर सर्वदा मुक्त हृदय से बाने योगदान एवं विचारों और सुझावों से मेरी पग-पग पर सहायता की। इसके बिना यह कार्य संभवतः सम्पूर्ण न हो पाता । प्रस्तुत विषय पर अभी तक वैज्ञानिक ढंग से कार्य नहीं हुया था। अतः हमने इसी वियय का चयन किया और इसपर यथाशक्ति काम करने का प्रयास किया है। मैंने जिन विद्वानों के धन से लाभ उठाया है उनके सम्बन्ध में भी अपनी कृतज्ञता प्रकट की है। यदि कहीं' चुरु' हो गयी हो तो उसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ। इस दिशा में हरेक श्ग पर इन विद्वानों ने हमारा मार्ग प्रशस्त किया है।
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