उतर प्रदेश में स्थित भारत-नेपाल सीमा से 850 किलोमीटर और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से 190 किलोमीटर दूर चंदौसी शहर है। मुरादाबाद जिले में स्थित चंदौसी शहर की जनसंख्या एक लाख से अधिक है।' यह मेरे पूर्वजों की नगरी भी है, जहाँ पर मेरे पिता और उनके पूर्वजों का जन्म हुआ था।
ये कहानियाँ उस युग की हैं, जो गुजर गया है, जैसा कि मार्गरेट मिशेल के शब्दों में कहा जाए तो, "हवा के साथ धूमिल हो गया (gone with the wind)।" भारत के छोटे-बड़े शहरों की कहानियाँ- जब टेलीविजन नहीं था, लेकिन बच्चे फिर भी ऊबते नहीं थे (एक, दो, तीन सौ, जीत और लू)। जब साइकिल आम परिवहन का साधन थी और कार बहुत कम लोगों के पास थी (दौरा और बँटवारा)। जब धनी से धनी लोग भी 3-टियर सेकंड क्लास कोच में सफर करते थे व समोसे, जलेबी और घर की बनी पूरी सब्जी का आनंद लेते थे (यात्रा)। वह एक ऐसा समय था, जब कमी तो थी, परंतु लोग तब भी खुश रहते थे (विलायत)। जब चाटुकारिता से ज्यादा नैतिक मूल्यों पर जोर दिया जाता था (पाए लागू)। जब नाम का महत्त्व उन्हें धारण करने वाले व्यक्तियों से ज्यादा था (बापू)। जब जानवरों और मानवों को समान महत्त्व दिया जाता था (गायत्री)। जब चचेरे भाई-बहनों और सगे भाई-बहनों में समान रूप से अपनत्व व प्यार होता था (विवाह)। जब अगली पीढ़ी सवाल पूछने लगी थी और पिछली पीढ़ी को उनका जवाब देने में असहजता महसूस होती थी, लेकिन फिर भी मामले घर की चारदीवारी के भीतर सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाए जाते थे (पुलिया और परवरिश)। जब लोग घर की देहरी लाँघकर बाहर जाने लगे (सखी-सहेली), छोटे शहरों से बड़े शहरों और अंततः विदेशों की ओर जाने लगे (वापसी और उड़ान)। जब महिलाओं द्वारा घास के मैदान पर धूप सेंकते हुए समस्याओं का समाधान किया जाने लगा (सपने)। दृढ़ता और अटलता की कहानियाँ (पैसा), वीरता की कहानियाँ (कीड़ा-कीड़ा-कीड़ा और सेंध), हिम्मत की कहानी (सुराही), बुद्धिमत्ता और चपलता की कहानी (रोशनदान), मासूमियत की कहानी (नामकरण), विकास और प्रगति की कहानी (सोन पापड़ी) और कैसे एक घटना न केवल एक व्यक्ति के जीवन के पथ को, बल्कि उसकी आगामी पीढ़ी के जीवन को भी बदल सकती है (वापसी)। लेकिन इन सभी कहानियों को एकजुट करने वाला सामान्य धागा प्यार और भावनात्मक बंधन की उपस्थिति है।
ये कहानियाँ हम सबने बचपन से सुनी हैं- ऐसी कहानियाँ, जिनका आज कोई प्रामाणिक सबूत नहीं है और इसलिए इन्हें केवल कल्पना माना जा सकता है, लेकिन इन्हें मात्र काल्पनिकता के रूप में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इन कहानियों ने न केवल मुझे और मुझ जैसे अनगिनत लोगों को बाधाओं से संघर्ष कर जीतने और अपना सर्वोत्तम संभव हासिल करने के लिए प्रेरित किया है, बल्कि हमको हमारी क्षमता से अधिक अर्जित करने के लिए प्रोत्साहित किया है। कहानियों का स्वरूप सुलभ एवं सुगम बनाए रखने के लिए कुछ स्थानीय बोलचाल की भाषा का भी उपयोग किया गया है तथा जहाँ आवश्यक हो, कुछ वस्तुओं का चित्र भी प्रस्तुत किया गया है, ताकि युवा पाठक, जिन्होंने शायद इन्हें कभी नहीं देखा हो, उन्हें इन वस्तुओं के बारे में पता चल सके।
आशा करता हूँ कि आपकी यह कहानियों की यात्रा आनंदमयी रहेगी।
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