नन्दकिशोर आचार्य : कवि, नाटककार, आलोचक, अनुवादक, अहिंसा दर्शन, गाँधी विचार और मानवाधिकार विमर्श के अध्येता। विविध विधाओं और विषयों से संबंधित मौलिक लेखक, अनुवाद और सम्पादन की लगभग 75 पुस्तकें प्रकाशित । केन्द्रीय साहित्य अकादमी, केन्द्रीय संगीत-नाटक अकादमी, राजस्थान साहित्य अकादमी, राजस्थान संगीत नाटक अकादमी, केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, उ.प्र. हिन्दी संस्थान, के. के. बिड़ला फाउंडेशन सहित अनेक संस्थानों से पुरस्कृत सम्मानित। राष्ट्रीय अन्तरराष्ट्रीय संस्थानों, विश्वविद्यालयों के आयोजनों में भागीदारी एवं व्याख्यान कविता-पाठ आदि। प्राकृत भारती अकादमी, जयपुर के लिए अहिंसा विश्वकोश के बाद इन दिनों अहिंसा-शांति ग्रंथमाला का सम्पादन ।’
महात्मा गाँधी के कुछ विचारों की वर्तमान सन्दर्भ में प्रासंगिकता और उनके राजनैतिक जीवन के कुछ विवादों को लेकर निरन्तर बहत होती रहती है। हमारे समय के एक प्रमुख गाँधी-अध्येता नन्दकिशोर आचार्य की इस पुस्तक में गाँधीजी के विचारों की सनातनता और विविध आयामों में उनकी वर्तमान प्रासंगिकता के तलस्पर्शी विवेचन के साथ-साथ उनसे जुड़े कुछ राजनैतिक विवादों की थाह लेने का सार्थक प्रयास किया गया है। महात्मा गाँधी की प्रासंगिकता को मापने का केन्द्रीय सूत्र है अपने सभी आयामों में अहिंसा ही हिंसा का एकमात्र विकल्प हो सकती है, क्योंकि हिंसा से हिंसा की टकराहट में विजयी सदैव हिंसा ही रहती है। यह पुस्तक, इसीलिए, महात्मा गाँधी के बारे में बने पूर्वग्रहों को भेद कर पाठक को उनसे अन्तरंग साक्षात्कार का अवसर देने का महत्त्वपूर्ण प्रयास है।
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