Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Sign In  |  Sign up
Your Cart (0)
Best Deals
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Language and Literature > हिन्दी साहित्य > नगाधिराज हिमालय - Himalaya The King of Mountains
Subscribe to our newsletter and discounts
नगाधिराज हिमालय - Himalaya The King of Mountains
नगाधिराज हिमालय - Himalaya The King of Mountains
Description

प्रकाशकीय

उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान समय-समय पर अपनी विविध प्रकाशन योजनाओं के माध्यम से साहित्य, विज्ञान, तकनीकी और मानविकी के अन्यान्य विषयों यथा दर्शन, राजनीति. इतिहास, कला, संगीत, मानवशास्त्र, धर्मशास्त्र, संस्कृति, पत्रकारिता अर्थशास्त्र, शिक्षाशास्त्र, समाजशास्त्र आदि विषयों की अनेक गौरवशाली एवं महत्त्वपूर्ण पुस्तकों का प्रकाशन करता रहा है।

इसी श्रृंखला में उत्कृष्ट प्रकाशन योजना के अन्तर्गत नगाधिराज हिमालय' पुस्तक का प्रकाशन किया जा रहा है। पुस्तक की विदुषी लेखिका श्रीमती शारदा त्रिवेदी ने अत्यन्त रोचक शैली में हिमालय के दर्शन करवाये हैं । भारतवर्ष की उत्तरी सीमा का निर्धारक, प्रहरी और अनन्य प्राकृति सुषमा का प्रतीक हिमाच्छादित हिमालय की पर्वत शृंखला पर्यटकों को अनायास ही अपनी ओर आकृष्ट करती है। पर्यटक की दृष्टि से लेखिका ने हिमालय की सुषमा को रेखांकित करने का प्रयास किया है। बीस अध्यायों में विभक्त इस पुस्तक में भारत की रक्षक पर्वतमालाएँ, नगाधिराज हिमालय का भौगोलिक तथा आर्थिक महत्त्व, उत्तर और दक्षिण भारत की पर्वतमालाएँ तथा उनकी ऐतिहासिक गरिमा, ऋषियों का आश्रम हरिद्वार. ऋषियों की तपोभूमि ऋषीकेश, मन्दाकिनी घाटी, शिव की क्रीड़ास्थली गुप्तकाशी, देवभूमि केदारनाथ, केदारनाथ से अलकनंदा घाटी की ओर, अलकनंदा घाटी का वैभव तथा बद्रीनाथ का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है। लेखिका ने भगीरथ की तप:स्थली गंगोत्री, हरसिल गोमुख, कालिन्दी घाटी का तीर्थ यमुनोत्री, पुष्पों का संसार फूलों की घाटी आदि की भी विवेचना की है।

पुस्तक की विदुषी लेखिका श्रीमती शारदा त्रिवेदी ने नगाधिराज हिमालय पर निवास करने वालों का भी वर्णन किया है। उन्होंने जनजीवन के सुधार के लिए कुछ सुझाव दिये हैं, उन्होंने हिमालय की यात्रा से लाभ की चर्चा की है। साथ ही उत्तराखण्ड की चार धाम यात्रा की भी संक्षेप में विवेचना की है।

आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि रोचक शैली में लिखी गयी इस पुस्तक का स्वागत हिन्दी जगत में होगा । इसी शुभाशा के साथ नगाधिराज हिमालय' पुस्तक सुधी समीक्षकों के सम्मुख प्रस्तुत है। आपके सुझाव हमारे पाथेय होंगे।

दो शब्द

भारतीय सस्कृति में महान उदात्त और विशाल की जो परिकल्पना है उसका जीवन्त प्रतीक हिमालय है। हिमालय योगियों और सन्तों की तपो भूमि है, पुण्य सलिल। गंगा और यमुना का उदगम स्थल है। यह भारतीय धर्म. दर्शन और साहित्य के केन्द्र बिन्दु के रूप में भी रूपायित है। सभी दृष्टियों से हिमालय को भारत का पर्याय कहा जा सकता है।

हिमालय की अपूर्व सुषमा के कारण ही हिमालय का आकर्षण आज भी अक्षुण्य है। उसकी पुकार आज भी मानव-मन को उद्वेलित कर देती है। भूस्तर शास्त्र, प्राणिशास्त्र आध्यात्मिक ऐतिहासिक भव्यता और रोमांचकारी दृष्टि से नगाधिराज हिमालय पृथ्वी का मानदण्ड है । यह इतना विशाल है कि इसमें ससार के सभी दुख समा सकते हैं। इतना शीतल है कि सब प्रकार की चिन्तारूपी अग्नि को शान्त करने की सामर्थ्य भी इसमें है। इतना धनवान है कि कुबेर को भी आश्रय दे सकता है और इतना ऊँचा है कि मोक्ष की भी सीढ़ी बन सकता है।

हिमालय के आकर्षण में आध्यात्मिकता और सौन्दर्य का अदभुत सम्मिश्रण हुआ है। आदिकाल से आर्य ऋषियों ने सर्वप्रथम यहीं पर देवदारू की छाया में कलकल ध्वनि के मध्य सरिताओं के तट पर अज्ञात शक्ति का आहवान किया था । साधु सन्यासी. गृहस्थ. पीडित- प्रताडित. प्राकृतिक सुषमा के उपासक कवि. कलाकार वैज्ञानिक और खोज। सभी समान भाव से इस रम्यस्थली में ज्ञान और आनन्द की खोज में आते रहै हैं । इसमें मुक्ति के पिपासु भी थे. सौन्दर्य के लोलुप भी. सत्य की खोज करने वाले वैज्ञानिक थे तो योग साधना के द्वारा ब्रह्म की उपासना करने वाले तपस्वी भी। अस्तु हिमालय की चुम्बकीय शक्ति सभी को अनायास ही अपनी ओर खींचती है।

उत्तर प्रदेश हिन्दी सस्थान की उत्कृष्ट प्रकाशन योजना के अन्तर्गत प्रकाशित हो रही पुस्तक नगाधिराज हिमालय की विदुषी लेखिका श्रीमती शारदा त्रिवेदी ने हिमालय के सौन्दर्य को विभिन्न आयामों में विभक्त करते हुए एक पर्यटक की दृष्टि से रेखांकित करने का प्रयास किया है । आशा है इस महत्त्वपूर्ण पुस्तक का स्वागत होगा । मैं पुस्तक की लेखिका श्रीमती शारदा त्रिवेदी एव उत्तर प्रदेश हिन्दी सस्थान को इस पुस्तक के प्रकाशन पर बधाई देता हूँ और मेरा विश्वास है कि यह पुस्तक अपनी उपादेयता सिय करेगी।

 

अनुक्रमणिका

1

भारत की रक्षक पर्वतमालाएँ

1-5

2

नगाधिराज हिमालय का भौगोलिक तथा आर्थिक महत्त्व

6-16

3

उत्तर और दक्षिण भारत की पर्वतमालाएँ तथा उनकी ऐतिहासिक गरिमा

17-24

4

ऋषियों का आश्रम हरिद्वार

25-30

5

ऋषियों की तपोभूमि ऋषीकेश

31-35

6

मन्दाकिनी घाटी की ओर

36-40

7

शिव की क्रीड़ास्थली गुप्तकाशी

41-46

8

देवभूमि केदारनाथ

47-51

9

केदारनाथ से अलकनंदा घाटी की ओर

52-60

10

अलकनंदा घाटी का वैभव बद्रीनाथ

61-68

11

भगीरथ की तपस्थली गंगोत्री की ओर

69-77

12

देवदारु वनों के साये में हरसिल

78-86

13

भगीरथ की तपस्थली गंगोत्री

87-93

14

हिमशिखरों के देश में गोमुख

94-99

15

कालिन्दी घाटी का तीर्थ यमुनोत्री

100-109

16

पुष्पों का ससार फूलों की घाटी

110-116

17

जन-जीवन

117-120

18

कुछ सुझाव

121-124

19

हिमालय की यात्रा से लाभ

125-128

20

उत्तराखंड की चार धाम यात्रा

129-131

नगाधिराज हिमालय - Himalaya The King of Mountains

Item Code:
NZA853
Cover:
Paperback
Edition:
2003
Language:
Hindi
Size:
8.5 inch X 5.5 inch
Pages:
131(6 B/W illustrations)
Other Details:
Weight of the Book: 200 gms
Price:
$15.00   Shipping Free
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
नगाधिराज हिमालय - Himalaya The King of Mountains

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 2988 times since 20th Apr, 2014

प्रकाशकीय

उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान समय-समय पर अपनी विविध प्रकाशन योजनाओं के माध्यम से साहित्य, विज्ञान, तकनीकी और मानविकी के अन्यान्य विषयों यथा दर्शन, राजनीति. इतिहास, कला, संगीत, मानवशास्त्र, धर्मशास्त्र, संस्कृति, पत्रकारिता अर्थशास्त्र, शिक्षाशास्त्र, समाजशास्त्र आदि विषयों की अनेक गौरवशाली एवं महत्त्वपूर्ण पुस्तकों का प्रकाशन करता रहा है।

इसी श्रृंखला में उत्कृष्ट प्रकाशन योजना के अन्तर्गत नगाधिराज हिमालय' पुस्तक का प्रकाशन किया जा रहा है। पुस्तक की विदुषी लेखिका श्रीमती शारदा त्रिवेदी ने अत्यन्त रोचक शैली में हिमालय के दर्शन करवाये हैं । भारतवर्ष की उत्तरी सीमा का निर्धारक, प्रहरी और अनन्य प्राकृति सुषमा का प्रतीक हिमाच्छादित हिमालय की पर्वत शृंखला पर्यटकों को अनायास ही अपनी ओर आकृष्ट करती है। पर्यटक की दृष्टि से लेखिका ने हिमालय की सुषमा को रेखांकित करने का प्रयास किया है। बीस अध्यायों में विभक्त इस पुस्तक में भारत की रक्षक पर्वतमालाएँ, नगाधिराज हिमालय का भौगोलिक तथा आर्थिक महत्त्व, उत्तर और दक्षिण भारत की पर्वतमालाएँ तथा उनकी ऐतिहासिक गरिमा, ऋषियों का आश्रम हरिद्वार. ऋषियों की तपोभूमि ऋषीकेश, मन्दाकिनी घाटी, शिव की क्रीड़ास्थली गुप्तकाशी, देवभूमि केदारनाथ, केदारनाथ से अलकनंदा घाटी की ओर, अलकनंदा घाटी का वैभव तथा बद्रीनाथ का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है। लेखिका ने भगीरथ की तप:स्थली गंगोत्री, हरसिल गोमुख, कालिन्दी घाटी का तीर्थ यमुनोत्री, पुष्पों का संसार फूलों की घाटी आदि की भी विवेचना की है।

पुस्तक की विदुषी लेखिका श्रीमती शारदा त्रिवेदी ने नगाधिराज हिमालय पर निवास करने वालों का भी वर्णन किया है। उन्होंने जनजीवन के सुधार के लिए कुछ सुझाव दिये हैं, उन्होंने हिमालय की यात्रा से लाभ की चर्चा की है। साथ ही उत्तराखण्ड की चार धाम यात्रा की भी संक्षेप में विवेचना की है।

आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि रोचक शैली में लिखी गयी इस पुस्तक का स्वागत हिन्दी जगत में होगा । इसी शुभाशा के साथ नगाधिराज हिमालय' पुस्तक सुधी समीक्षकों के सम्मुख प्रस्तुत है। आपके सुझाव हमारे पाथेय होंगे।

दो शब्द

भारतीय सस्कृति में महान उदात्त और विशाल की जो परिकल्पना है उसका जीवन्त प्रतीक हिमालय है। हिमालय योगियों और सन्तों की तपो भूमि है, पुण्य सलिल। गंगा और यमुना का उदगम स्थल है। यह भारतीय धर्म. दर्शन और साहित्य के केन्द्र बिन्दु के रूप में भी रूपायित है। सभी दृष्टियों से हिमालय को भारत का पर्याय कहा जा सकता है।

हिमालय की अपूर्व सुषमा के कारण ही हिमालय का आकर्षण आज भी अक्षुण्य है। उसकी पुकार आज भी मानव-मन को उद्वेलित कर देती है। भूस्तर शास्त्र, प्राणिशास्त्र आध्यात्मिक ऐतिहासिक भव्यता और रोमांचकारी दृष्टि से नगाधिराज हिमालय पृथ्वी का मानदण्ड है । यह इतना विशाल है कि इसमें ससार के सभी दुख समा सकते हैं। इतना शीतल है कि सब प्रकार की चिन्तारूपी अग्नि को शान्त करने की सामर्थ्य भी इसमें है। इतना धनवान है कि कुबेर को भी आश्रय दे सकता है और इतना ऊँचा है कि मोक्ष की भी सीढ़ी बन सकता है।

हिमालय के आकर्षण में आध्यात्मिकता और सौन्दर्य का अदभुत सम्मिश्रण हुआ है। आदिकाल से आर्य ऋषियों ने सर्वप्रथम यहीं पर देवदारू की छाया में कलकल ध्वनि के मध्य सरिताओं के तट पर अज्ञात शक्ति का आहवान किया था । साधु सन्यासी. गृहस्थ. पीडित- प्रताडित. प्राकृतिक सुषमा के उपासक कवि. कलाकार वैज्ञानिक और खोज। सभी समान भाव से इस रम्यस्थली में ज्ञान और आनन्द की खोज में आते रहै हैं । इसमें मुक्ति के पिपासु भी थे. सौन्दर्य के लोलुप भी. सत्य की खोज करने वाले वैज्ञानिक थे तो योग साधना के द्वारा ब्रह्म की उपासना करने वाले तपस्वी भी। अस्तु हिमालय की चुम्बकीय शक्ति सभी को अनायास ही अपनी ओर खींचती है।

उत्तर प्रदेश हिन्दी सस्थान की उत्कृष्ट प्रकाशन योजना के अन्तर्गत प्रकाशित हो रही पुस्तक नगाधिराज हिमालय की विदुषी लेखिका श्रीमती शारदा त्रिवेदी ने हिमालय के सौन्दर्य को विभिन्न आयामों में विभक्त करते हुए एक पर्यटक की दृष्टि से रेखांकित करने का प्रयास किया है । आशा है इस महत्त्वपूर्ण पुस्तक का स्वागत होगा । मैं पुस्तक की लेखिका श्रीमती शारदा त्रिवेदी एव उत्तर प्रदेश हिन्दी सस्थान को इस पुस्तक के प्रकाशन पर बधाई देता हूँ और मेरा विश्वास है कि यह पुस्तक अपनी उपादेयता सिय करेगी।

 

अनुक्रमणिका

1

भारत की रक्षक पर्वतमालाएँ

1-5

2

नगाधिराज हिमालय का भौगोलिक तथा आर्थिक महत्त्व

6-16

3

उत्तर और दक्षिण भारत की पर्वतमालाएँ तथा उनकी ऐतिहासिक गरिमा

17-24

4

ऋषियों का आश्रम हरिद्वार

25-30

5

ऋषियों की तपोभूमि ऋषीकेश

31-35

6

मन्दाकिनी घाटी की ओर

36-40

7

शिव की क्रीड़ास्थली गुप्तकाशी

41-46

8

देवभूमि केदारनाथ

47-51

9

केदारनाथ से अलकनंदा घाटी की ओर

52-60

10

अलकनंदा घाटी का वैभव बद्रीनाथ

61-68

11

भगीरथ की तपस्थली गंगोत्री की ओर

69-77

12

देवदारु वनों के साये में हरसिल

78-86

13

भगीरथ की तपस्थली गंगोत्री

87-93

14

हिमशिखरों के देश में गोमुख

94-99

15

कालिन्दी घाटी का तीर्थ यमुनोत्री

100-109

16

पुष्पों का ससार फूलों की घाटी

110-116

17

जन-जीवन

117-120

18

कुछ सुझाव

121-124

19

हिमालय की यात्रा से लाभ

125-128

20

उत्तराखंड की चार धाम यात्रा

129-131

Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy
Based on your browsing history
Loading... Please wait

Items Related to नगाधिराज हिमालय - Himalaya The King of... (Language and Literature | Books)

Curious Tales from The Himalayas
Item Code: NAO390
$20.00
Add to Cart
Buy Now
Buttertea At Sunrise: A Year in the Bhutan Himalaya
by Britta Das
Paperback (Edition: 2006)
Rupa Publication Pvt. Ltd.
Item Code: IDG439
$17.00
Add to Cart
Buy Now
The Official Biography of Swami Rama of The Himalayas
Item Code: NAI023
$27.50
Add to Cart
Buy Now
Simla Village Tales: Folktales From The Himalayas
by Alice Elizabeth Dracott
Paperback (Edition: 2003)
Pilgrims Publishing
Item Code: IDI945
$13.50
Add to Cart
Buy Now
Rain in The Mountains (Notes From the Himalayas)
by Ruskin Bond
Paperback (Edition: 1996)
Penguin Books
Item Code: NAD633
$25.00
Add to Cart
Buy Now
Tibetan Manuscripts and Inscriptions of Ladakh Himalaya
by Prem Singh Jina
Hardcover (Edition: 1998)
Sri Satguru Publications
Item Code: IHL091
$27.50
Add to Cart
Buy Now
A Pilgrimage To The Himalayas (and Other Silhouettes From Memory)
by Mahadevi Verma
Paperback (Edition: 2002)
Rupa Publication Pvt. Ltd.
Item Code: IDH229
$15.00
Add to Cart
Buy Now
The Rupa Book of Himalayan Quiz
by Bill Aitken
Paperback (Edition: 2004)
Rupa Publication Pvt. Ltd.
Item Code: IDE280
$7.50
Add to Cart
Buy Now
Remembering Dharampal
Item Code: NAO131
$30.00
Add to Cart
Buy Now
Lighting The Flame of Compassion
Item Code: NAG042
$15.00
Add to Cart
Buy Now
Byangsi Grammar and Vocabulary
by Suhnu Ram Sharma
Paperback (Edition: 2007)
-1
Item Code: NAM205
$25.00
Add to Cart
Buy Now
The Second Jim Corbett Omnibus (My India Jungle Lore Tree Tops)
by Jim Corbett
Hardcover (Edition: 2013)
Oxford University Press
Item Code: NAF719
$37.00
Add to Cart
Buy Now
Glorious Garhwal
by Ganesh Saili
Hardcover (Edition: 1995)
The Lotus Collection
Item Code: NAE532
$22.00
Add to Cart
Buy Now
Testimonials
Dear friends, I just placed my order for one Radhe-Shyam copper bangle and I am looking forward to seeing the quality of your products. I have been searching for years for this price range of bangle with 'Radhe Radhe' or 'Radhe-Shyam'. I may add more items as I was not through shopping when I clicked on PayPal. Thanks sooo much for providing such hard-to-find and fair-priced items! Sincerely, David Briscoe
David, USA
I got my two dupattas today and I'm SO HAPPY! Thank you so much. Such amazing quality and the pictures totally do it justice They are beautiful!!! Thank you
Nony, USA
I received my Ganesha Purana order today Books received in good condition and delivery was very fast. Thank you very much..:)) Very good customer service.
Lukesh sithambaram
I'm happy to order from you and not the global monopoly that is Amazon. ;)
Tom, USA
A great 'Dorje' has arrived. Thank you for your sincerity.
Hideo, Japan
Thank you for your amazing customer service! I ordered Liberating Isolation Sunday, March 24 and received it Friday, March 29! Much sooner than expected:) The book was packaged nicely and is in great shape! Thank you again!
James, USA
Om Shanti Shanti Shanti !!! Exotic India Thank You Thank You Thank You !!!
Fotis Kosmidis
Hi, I would like to thankyou for your excellent service. Postage was quick. Books were packaged well and all in good condition.
Pauline, Australia
Thank you very much. Your sale prices are wonderful.
Michael, USA
Kailash Raj’s art, as always, is marvelous. We are so grateful to you for allowing your team to do these special canvases for us. Rarely do we see this caliber of art in modern times. Kailash Ji has taken the Swaminaryan monks’ suggestions to heart and executed each one with accuracy and a spiritual touch.
Sadasivanathaswami, Hawaii
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2019 © Exotic India