पुस्तक परिचय
उत्तर भारत की तरह दक्षिण भारत का इतिहास भी गौरवपूर्ण और विशिष्ट रहा है। भारतीय कला एवं संस्कृति को समृद्ध करने में दक्षिण भारतीय राजवंशों ने महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया है। सातवीं शताब्दी से बारहवीं शताब्दी के बीच के दक्षिण भारत का इतिहास अनेक दृष्टिकोण से उल्लेखनीय है। चालुक्य, पल्लव, राष्ट्रकूट, चोल, पाण्ड्य, होयसल, काकतीय आदि राजवंशों के सदस्यों ने मन्दिरों के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया और इस काल में अनेक मन्दिरों का निर्माण हुआ। इस प्रकार कला की उन्नति हुई। पल्लव राजवंश के शासनकाल में संस्कृत भाषा को विशेष प्रश्रय प्राप्त हुआ। राजवंशों की राजनीतिक गतिविधियाँ केवल दक्षिण भारत तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि वे उत्तर भारतीय राजनीति को भी प्रभावित करती रही। इस पुस्तक में दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण राजवंशों के राजनीतिक इतिहास की चर्चा की गई है।
लेखक परिचय
डॉ० प्रीति कुमारी एक प्रतिभावान इतिहासकार हैं। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से इतिहास विषय में एम० ए० एवं पी-एच० डी० की उपाधि प्राप्त की। वे निरन्तर शोधकार्य में संलग्न हैं। वर्तमान में प्रीति कुमारी व्याख्याता के पद पर मारवाड़ी कॉलेज, राँची विश्वविद्यालय के अंतर्गत कार्यरत हैं।
प्राक्कथन
उत्तर भारत की तरह दक्षिण भारत का इतिहास भी गौरवपूर्ण और विशिष्ट रहा है। भारतीय कला एवं संस्कृति को समृद्ध करने में दक्षिण भारतीय राजवंशों ने महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया है। सातवीं शताब्दी से बारहवीं शताब्दी के बीच के दक्षिण भारत का इतिहास अनेक दृष्टिकोण से उल्लेखनीय है। चालुक्य, पल्लव, राष्ट्रकूट, चोल, पाण्ड्य, यादव, होयसल, काकतीय आदि राजवंशों के सदस्यों ने मन्दिरों के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया और इसीलिए इस काल में अनेक मन्दिरों का निर्माण हुआ। इस प्रकार कला की उन्नति हुई। पल्लव राजवंश के शासनकाल में संस्कृत भाषा को विशेष प्रश्रय प्राप्त हुआ। परन्तु, धीरे-धीरे स्थानीय भाषाओं-तमिल, तेलगु, कन्नड़, मलयाली को प्रश्रय मिला और अभिलेख भी इन भाषाओं में लिखे जाने लगे। धर्म के क्षेत्र में शैव एवं वैष्णव मत का प्रभाव दक्षिण भारत में बढ़ा। राजनीतिक दृष्टिकोण से भी इन दक्षिण भारतीय राजवंशों ने भारतीय इतिहास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी। राजवंशों की राजनीतिक गतिविधियाँ केवल दक्षिण भारत तक ही सीमित नहीं रहीं, बल्कि वे उत्तर भारतीय राजनीति को भी प्रभावित करती रही। चोल एवं पाण्ड्य राजाओं का सम्बन्ध श्रीलंका के साथ था। पल्लवों का भी श्रीलंका से निकटतम सम्बन्ध था, परन्तु चोलों ने भी श्रीलंका के इतिहास को विशेष रूप से प्रभावित किया। श्रीलंका का एक बड़ा भाग चोल साम्राज्य का अभिन्न अंग था। चोलों ने दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों पर भी आक्रमण किया और अनेक देशों को अपने प्रभाव में रखा।
Hindu (हिंदू धर्म) (14082)
Tantra (तन्त्र) (1053)
Vedas (वेद) (732)
Ayurveda (आयुर्वेद) (2142)
Chaukhamba | चौखंबा (3457)
Jyotish (ज्योतिष) (1636)
Yoga (योग) (1213)
Ramayana (रामायण) (1311)
Gita Press (गीता प्रेस) (714)
Sahitya (साहित्य) (25503)
History (इतिहास) (9413)
Philosophy (दर्शन) (3729)
Santvani (सन्त वाणी) (2599)
Vedanta (वेदांत) (120)
Send as free online greeting card
Email a Friend
Visual Search
Manage Wishlist