Subscribe for Newsletters and Discounts
Be the first to receive our thoughtfully written
religious articles and product discounts.
Your interests (Optional)
This will help us make recommendations and send discounts and sale information at times.
By registering, you may receive account related information, our email newsletters and product updates, no more than twice a month. Please read our Privacy Policy for details.
.
By subscribing, you will receive our email newsletters and product updates, no more than twice a month. All emails will be sent by Exotic India using the email address info@exoticindia.com.

Please read our Privacy Policy for details.
|6
Sign In  |  Sign up
Your Cart (0)
Best Deals
Share our website with your friends.
Email this page to a friend
Books > Hindu > हिन्दी > मैं मृत्यु सिखाता हूं: I Teach Death
Subscribe to our newsletter and discounts
मैं मृत्यु सिखाता हूं: I Teach Death
मैं मृत्यु सिखाता हूं: I Teach Death
Description

 

पुस्तक के विषय में

 

समाधि में साधक मरता है स्वयं, और चूंकि वह स्वयं मृत्यु में प्रवेश करता है, वह जान लेता हऐ इस सत्य को कि मैं हूं अलग, शरीर है अलग। और एक बार यह पता चल जाए कि मैं हूं अलग, मृत्यु समाप्त हो गई। और एक बार यह पता चल जाए कि मैं हूं अलग, मृत्यु समाप्त हो गई। और एक बार यह पता चल जाए कि मैं हूं अलग, और जीवन का अनुभव शुरू हो गया। मृत्यु की समाप्ति और जीवन का अनुभव एक ही सीमा पर होते हैं, एक ही साथ होते हैं। जीवन को जाना कि मृत्यु गई, मृत्यु को जाना कि जीवन हुआ। अगर ठीक से समझें तो ये एक ही चीज को कहने के दो ढंग हैं। ये एक ही दिशा में इंगित करने वाले दो इशारे हैं।

मृत्यु का सत्य

कुछ सत्य तो हैं जो हमें गुजरकर ही पता चलते हैं । मृत्यु का सत्य तो हमें मृत्यु से गुजरकर ही पता चलेगा । लेकिन उसकी तैयारी, कि पता चल सके, वह हमें जिंदगी में करनी पड़ेगी । मरने की तैयारी भी जिंदगी में करनी पड़ती है । और जो आदमी जिंदगी में मरने की तैयारी नहीं कर पाता, वह बड़े गलत ढंग से मरता है । और गलत ढंग से जीना तो माफ किया जा सकता है, गलत ढंग से मरना कभी माफ नहीं किया जा सकता । क्योंकि वह चरम बिंदु है, वह अल्टीमेट है, वह आखिरी है, वह जिंदगी का सार-निष्कर्ष है । अगर जिंदगी में छोटी-मोटी भूलें यहां-वहां की हों तो चल सकता है

लेकिन आखिरी क्षण में तो भूल सदा के लिए घिर और स्थायी हो जाएगी । और मजा यह है कि जिंदगी की भूलों के लिए पश्चात्ताप किया जा सकता है और जिंदगी की भूलों के लिए माफी मांगी जा सकती है और जिंदगी की भूलों को सुधारा जा सकता है, मौत के बाद तो सुधारने का उपाय नहीं रहता और भूल का पश्चात्ताप भी नहीं रहता, रिपेंटेंस भी नहीं कर सकते, क्षमा भी नहीं मांग सकते, सुधार भी नहीं कर सकते । वह तो आखिरी सील लग जाती है । इसलिए गलत ढंग से जिंदगी माफ भी कर दी जाए गलत ढंग से मरना माफ नहीं किया जा सकता । और ध्यान रहे, जो आदमी गलत ढंग से जीया है, वह ठीक ढंग से मर कैसे सकता है ।

जिंदगी ही तो मरेगी, जिंदगी ही तो उस बिंदु पर पहुंचेगी जहां से वह विदा होगी । तो जो मै जिंदगी भर था, वही तो मैं अपने अंतिम क्षण में समग्र रूप से इकट्ठा होकर हो जाऊंगा । वह अकुमलेटिव होगा । आखिरी क्षण में मेरा सारा जिंदगी का सब कुछ इकट्ठा होकर मेरे साथ खड़ा हो जाएगा । मेरी पूरी जिंदगी मै मरते क्षण में होऊंगा । अगर हम इसको ऐसा कहें कि जिंदगी फैली हुई घटना है, मौत सघन है । अगर हम इसको ऐसा कहे कि जिंदगी बहुत लंबे फैलाव का विस्तार है और मृत्यु सारे विस्तार का इकट्ठा, संक्षिप्त संस्कार है -इकट्ठा हो जाना है । मृत्यु बहुत एटामिक है । एक कण में

सब इकट्ठा हो गया ।

इसलिए मृत्यु से बड़ी घटना नहीं है । पर मृत्यु एक ही बार घटेगी । इसका मतलब यह नहीं है कि आप और पहले नहीं मरे है । नहीं, वह बहुत बार घटी है । लेकिन एक जिंदगी में एक ही बार घटती

है । और एक जिंदगी में अगर आप सोए-सोए जीए तो वह नींद में ही घट जाती है । फिर दूसरी जिंदगी में वह नई होती है । फिर एक ही बार घटती है । और ध्यान रहे, जो आदमी इस जिंदगी मे होशपूर्वक मर सकता है- कांशस डेथ-वह आदमी दूसरी जिंदगी में होशपूर्वक जन्म लेता है । वह उसका दूसरा हिस्सा है ओंर जो होशपूर्वक मरता है-पार होशपूर्वक जन्म लेता हे, उसकी जिन्दगी किसी और तल पर चलने लगी वह पहली दफे ठीक से होशपूर्वक जिदगी के पूरे अर्थ को, प्रयोजन को, जिदगी की गहराई जोर ऊचाई को पकड पाता हे । जिदगी का पूरा सत्य उसके हाथ में आ पाता है ।

 

अनुक्रम

 

1

आयोजित मृत्यु अर्थात ध्यान और समाधि के प्रायोगिक रहस्य

1

2

आध्यात्मिक विश्व आदोलन-ताकि कुछ व्यक्ति प्रबुद्ध हो सकें

19

3

जीवन के मंदिर में द्वार है मृत्यु का

35

4

सजग मृत्यु और जाति-स्मरण के रहस्यों में प्रवेश

55

5

स्व हैं द्वार सर्व का निद्रा स्वप्न सम्मोहन ओर

81

6

मूर्च्छा से जागृति की ओर

105

7

मूर्च्छा में मृत्यु है और जागृति में जीवन

127

8

विचार नही वरन् मृत्यु के तथ्य का दर्शन

151

9

मैं मृत्यु सिखाता हूं

173

10

अंधकार से आलोक और मूर्च्छा से परम जागरण की ओर

197

11

संकल्पवान हो जाता है आत्मवान

223

12

नाटकीय जीवन के प्रति साक्षी चेतना का जागरण

249

13

सूक्ष्म शरीर, ध्यान-साधना एवं तंत्र-साधना के कुछ गुप्त आयाम

273

14

धर्म की महायात्रा मे स्वयं को दांव पर लगाने का साहस

301

15

संकल्प से साक्षी और साक्षी से आगे तथाता की परम उपलब्धि

327

 

 

मैं मृत्यु सिखाता हूं: I Teach Death

Item Code:
NZA644
Cover:
Hardcover
Edition:
2012
ISBN:
9788172610401
Language:
Hindi
Size:
9.0 inch X 5.5 inch
Pages:
376 (28 B/W illustrations)
Other Details:
Weight of the Books: 850 gms
Price:
$35.00   Shipping Free
Add to Wishlist
Send as e-card
Send as free online greeting card
मैं मृत्यु सिखाता हूं: I Teach Death

Verify the characters on the left

From:
Edit     
You will be informed as and when your card is viewed. Please note that your card will be active in the system for 30 days.

Viewed 3025 times since 16th Oct, 2018

 

पुस्तक के विषय में

 

समाधि में साधक मरता है स्वयं, और चूंकि वह स्वयं मृत्यु में प्रवेश करता है, वह जान लेता हऐ इस सत्य को कि मैं हूं अलग, शरीर है अलग। और एक बार यह पता चल जाए कि मैं हूं अलग, मृत्यु समाप्त हो गई। और एक बार यह पता चल जाए कि मैं हूं अलग, मृत्यु समाप्त हो गई। और एक बार यह पता चल जाए कि मैं हूं अलग, और जीवन का अनुभव शुरू हो गया। मृत्यु की समाप्ति और जीवन का अनुभव एक ही सीमा पर होते हैं, एक ही साथ होते हैं। जीवन को जाना कि मृत्यु गई, मृत्यु को जाना कि जीवन हुआ। अगर ठीक से समझें तो ये एक ही चीज को कहने के दो ढंग हैं। ये एक ही दिशा में इंगित करने वाले दो इशारे हैं।

मृत्यु का सत्य

कुछ सत्य तो हैं जो हमें गुजरकर ही पता चलते हैं । मृत्यु का सत्य तो हमें मृत्यु से गुजरकर ही पता चलेगा । लेकिन उसकी तैयारी, कि पता चल सके, वह हमें जिंदगी में करनी पड़ेगी । मरने की तैयारी भी जिंदगी में करनी पड़ती है । और जो आदमी जिंदगी में मरने की तैयारी नहीं कर पाता, वह बड़े गलत ढंग से मरता है । और गलत ढंग से जीना तो माफ किया जा सकता है, गलत ढंग से मरना कभी माफ नहीं किया जा सकता । क्योंकि वह चरम बिंदु है, वह अल्टीमेट है, वह आखिरी है, वह जिंदगी का सार-निष्कर्ष है । अगर जिंदगी में छोटी-मोटी भूलें यहां-वहां की हों तो चल सकता है

लेकिन आखिरी क्षण में तो भूल सदा के लिए घिर और स्थायी हो जाएगी । और मजा यह है कि जिंदगी की भूलों के लिए पश्चात्ताप किया जा सकता है और जिंदगी की भूलों के लिए माफी मांगी जा सकती है और जिंदगी की भूलों को सुधारा जा सकता है, मौत के बाद तो सुधारने का उपाय नहीं रहता और भूल का पश्चात्ताप भी नहीं रहता, रिपेंटेंस भी नहीं कर सकते, क्षमा भी नहीं मांग सकते, सुधार भी नहीं कर सकते । वह तो आखिरी सील लग जाती है । इसलिए गलत ढंग से जिंदगी माफ भी कर दी जाए गलत ढंग से मरना माफ नहीं किया जा सकता । और ध्यान रहे, जो आदमी गलत ढंग से जीया है, वह ठीक ढंग से मर कैसे सकता है ।

जिंदगी ही तो मरेगी, जिंदगी ही तो उस बिंदु पर पहुंचेगी जहां से वह विदा होगी । तो जो मै जिंदगी भर था, वही तो मैं अपने अंतिम क्षण में समग्र रूप से इकट्ठा होकर हो जाऊंगा । वह अकुमलेटिव होगा । आखिरी क्षण में मेरा सारा जिंदगी का सब कुछ इकट्ठा होकर मेरे साथ खड़ा हो जाएगा । मेरी पूरी जिंदगी मै मरते क्षण में होऊंगा । अगर हम इसको ऐसा कहें कि जिंदगी फैली हुई घटना है, मौत सघन है । अगर हम इसको ऐसा कहे कि जिंदगी बहुत लंबे फैलाव का विस्तार है और मृत्यु सारे विस्तार का इकट्ठा, संक्षिप्त संस्कार है -इकट्ठा हो जाना है । मृत्यु बहुत एटामिक है । एक कण में

सब इकट्ठा हो गया ।

इसलिए मृत्यु से बड़ी घटना नहीं है । पर मृत्यु एक ही बार घटेगी । इसका मतलब यह नहीं है कि आप और पहले नहीं मरे है । नहीं, वह बहुत बार घटी है । लेकिन एक जिंदगी में एक ही बार घटती

है । और एक जिंदगी में अगर आप सोए-सोए जीए तो वह नींद में ही घट जाती है । फिर दूसरी जिंदगी में वह नई होती है । फिर एक ही बार घटती है । और ध्यान रहे, जो आदमी इस जिंदगी मे होशपूर्वक मर सकता है- कांशस डेथ-वह आदमी दूसरी जिंदगी में होशपूर्वक जन्म लेता है । वह उसका दूसरा हिस्सा है ओंर जो होशपूर्वक मरता है-पार होशपूर्वक जन्म लेता हे, उसकी जिन्दगी किसी और तल पर चलने लगी वह पहली दफे ठीक से होशपूर्वक जिदगी के पूरे अर्थ को, प्रयोजन को, जिदगी की गहराई जोर ऊचाई को पकड पाता हे । जिदगी का पूरा सत्य उसके हाथ में आ पाता है ।

 

अनुक्रम

 

1

आयोजित मृत्यु अर्थात ध्यान और समाधि के प्रायोगिक रहस्य

1

2

आध्यात्मिक विश्व आदोलन-ताकि कुछ व्यक्ति प्रबुद्ध हो सकें

19

3

जीवन के मंदिर में द्वार है मृत्यु का

35

4

सजग मृत्यु और जाति-स्मरण के रहस्यों में प्रवेश

55

5

स्व हैं द्वार सर्व का निद्रा स्वप्न सम्मोहन ओर

81

6

मूर्च्छा से जागृति की ओर

105

7

मूर्च्छा में मृत्यु है और जागृति में जीवन

127

8

विचार नही वरन् मृत्यु के तथ्य का दर्शन

151

9

मैं मृत्यु सिखाता हूं

173

10

अंधकार से आलोक और मूर्च्छा से परम जागरण की ओर

197

11

संकल्पवान हो जाता है आत्मवान

223

12

नाटकीय जीवन के प्रति साक्षी चेतना का जागरण

249

13

सूक्ष्म शरीर, ध्यान-साधना एवं तंत्र-साधना के कुछ गुप्त आयाम

273

14

धर्म की महायात्रा मे स्वयं को दांव पर लगाने का साहस

301

15

संकल्प से साक्षी और साक्षी से आगे तथाता की परम उपलब्धि

327

 

 

Post a Comment
 
Post Review
Post a Query
For privacy concerns, please view our Privacy Policy
Based on your browsing history
Loading... Please wait

Items Related to मैं मृत्यु सिखाता हूं: I Teach... (Hindu | Books)

Osho Talks: How To Be Really Alive (DVD)
Osho Shemaroo Entertainment Pvt. Ltd (2008)
Approx. 80 Minutes
Item Code: ICT041
$30.00
Add to Cart
Buy Now
Osho Talks: Loving Your Body (DVD)
Osho
Shemaroo Entertainment (2011)
66 Minutes
Item Code: IDB007
$22.00
Add to Cart
Buy Now
The Alchemy of Zen (Osho’s Insights on Conscious Living)
Item Code: IDL007
$16.50
Add to Cart
Buy Now
The Path of The Mystic (In Search of The Ultimate Freedom) (Osho)
by Osho
Hardcover (Edition: 2007)
A Rebel Book
Item Code: IHK071
$40.00
Add to Cart
Buy Now
Dimensions Beyond the Known By Osho
by Osho
Hardcover (Edition: 2008)
Rebel Books
Item Code: IHL602
$27.50
Add to Cart
Buy Now
My Diamond Days with Osho (The New Diamond Sutra)
by Ma Prem Shunyo
Paperback (Edition: 2013)
Full Circle Publishing
Item Code: IDL061
$25.00
Add to Cart
Buy Now
Above All, Don’t Wobble by Osho (Individual Meetings with a Contemporary Mystic)
by Osho
Hardcover (Edition: 2007)
Rebel Books
Item Code: IHL003
$30.00
Add to Cart
Buy Now
Ah This! (Osho on Zen)
by Osho
Paperback (Edition: 2010)
A Full Circle Book
Item Code: IHL336
$23.50
Add to Cart
Buy Now
Be Still And Know
by Osho
Hardcover (Edition: 2010)
Osho Media International
Item Code: NAE006
$30.00
Add to Cart
Buy Now
Sufis – The People of the Path (Volume 1)
by Osho
Hardcover (Edition: 2006)
Osho Media International
Item Code: IHK042
$37.50
Add to Cart
Buy Now
Work is Love Made Visible
by Osho
Hardcover (Edition: 2011)
Osho Media International
Item Code: NAE317
$40.00
Add to Cart
Buy Now
Meditation: The First And Last Freedom (A Practical Guide To Meditation)
by Osho
Hardcover (Edition: 2011)
Osho Media International
Item Code: NAE145
$35.00
Add to Cart
Buy Now
Bliss: Living Beyond Happiness and Misery (Talks on The Shiva Sutras)
by Osho
Hardcover (Edition: 2011)
Osho Media International
Item Code: NAD869
$30.00
Add to Cart
Buy Now
Testimonials
I am so glad I came across your website! Oceans of Grace.
Aimee, USA
I got the book today, and I appreciate the excellent service. I am 82, and I am trying to learn Sanskrit till I can speak and write well in this superb language.
Dr. Sundararajan
Wonderful service and excellent items. Always sent safely and arrive in good order. Very happy with firm.
Dr. Janice, Australia
Thank you. I purchased some books from you in the past and was so pleased by the care with which they were packaged. It's good to find a bookseller who loves books.
Ginger, USA
नमास्कार परदेस में रहने वाले भारतीयों को अपनी सभ्यता व संकृति से जुड़े रहने का माध्यम प्रदान करने हेतु, मैं आपका अभिनंदन करती हूँ| धन्यवाद
Ankita, USA
Namaste, This painting was delivered a little while ago. The entire package was soaking wet inside and out. But because of the extra special care you took to protect it, the painting itself is not damaged. It is beautiful, and I am very happy to have it. But all is well now, and I am relieved. Thank you!
Janice, USA
I am writing to convey my gratitude in the service that you have provided me. We received the painting of the 10 gurus by Anup Gomay on the 2nd January 2019 and the painting was packaged very well. I am happy to say that the recipient of the gift was very very happy! The painting is truly stunning and spectacular in real life! Thank you once again for all your help that you provided.
Mrs. Prabha, United Kingdom
I am writing to relay my compliments of the excellent services provided by exoticindia. The books are in great condition! I was not expecting a speedy delivery. Will definitely return to order more books.
Dr. Jamuna, New Zealand
I just received my powder pink wool shawl. It is beautiful. I bought it to wear over my dress at my son's wedding this coming Spring & it will be perfect if it's chilly in the garden. The package came very promptly & I couldn't be more pleased.
Pamela, Canada
I very much appreciate the tailoring service you offer. Many friends are delighted to see my last purchase. Hopefully more customers will contact you soon.
Ann, USA
Language:
Currency:
All rights reserved. Copyright 2019 © Exotic India